
यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। 9,12,696 करोड़ रुपये के इस बजट को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट बताते हुए राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
इस साल का बजट पिछले वर्ष से करीब 12% बड़ा है। 2017-18 में जहां यूपी का बजट करीब 3.85 लाख करोड़ था, वहीं अब यह 9.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यानी नौ वर्षों में बजट आकार दोगुने से भी अधिक हो गया है।
इस बजट की सबसे बड़ी खासियत पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) है, जिसके लिए 1.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव किया गया है। पूंजीगत व्यय वह खर्च होता है जो सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, बिजली, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी दीर्घकालिक परियोजनाओं पर किया जाता है। इसका असर लंबे समय तक रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। कुल व्यय 9.13 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 6.64 लाख करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 2.48 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय शामिल हैं।
सरकार ने 10 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर देने का लक्ष्य रखा है। साथ ही लड़कियों की शादी में सहायता राशि बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने का ऐलान किया गया है। 50 से अधिक नई योजनाओं के जरिए युवाओं, किसानों और उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बजट में बच्चों के लिए बड़े एलान किए हैं। फ्री टैबलेट और स्मार्ट फोन के लिए 2374 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अलावा, माध्यमिक शिक्षा के लिए 22167 करोड़ की योजना प्रस्तावित है। उच्च शिक्षा के लिए 6195 करोड़ की योजना प्रस्तावित है। वहीं, छात्राओं को स्कूटी के लिए 400 करोड़ दिए हैं।।
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने प्रदेश की आर्थिक प्रगति के महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए, जो नीचे दिए गए हैं...
जीएसडीपी (GSDP): वर्ष 2024-2025 में प्रदेश की जी0एस0डी0पी0 30.25 लाख करोड़ रुपये आकलित की गई है, जो 13.4 प्रतिशत की वृद्धि है।
प्रति व्यक्ति आय: वर्ष 2016-2017 में जो आय 54,564 रुपये थी, वह 2024-25 में दोगुने से अधिक होकर 1,09,844 रुपये पहुंच गई है. वर्ष 2025-26 में इसके 1.20 लाख रुपये होने का अनुमान है।
गरीबी उन्मूलन: प्रदेश में लगभग 6 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं।
एसडीजी रैंकिंग: नीति आयोग के SDG इंडिया इंडेक्स में यूपी 29वें स्थान (2018-19) से सुधार कर 18वें स्थान (2023-24) पर आ गया है।
सरकार के मुताबिक, वर्ष 2024-2025 के त्वरित अनुमान के अनुसार यूपी की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2024-25 में 30.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 13.4% की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रति व्यक्ति आय 2016-17 के 54,564 रुपये से बढ़कर 1,09,844 रुपये हो चुकी है और अगले वर्ष 1.20 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार का दावा है कि 6 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं और बेरोजगारी दर घटकर 2.24% रह गई है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अनूप कुमार मिश्रा के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय का लगभग दोगुना होना वास्तविक विकास का मजबूत संकेत है। उनका मानना है कि जीएसडीपी में 13.4% की वृद्धि और इंफ्रास्ट्रक्चर व सामाजिक सुरक्षा पर बढ़ता खर्च राज्य की सतत आर्थिक प्रगति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि 6 करोड़ लोगों का बहुआयामी गरीबी से बाहर आना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है और यूपी अब हाई ग्रोथ स्टेट बनने की दिशा में बढ़ रहा है।
हालांकि, प्रोफेसर मिश्रा ने आगे की चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, राज्य को ह्यूमन कैपिटल निर्माण, स्किल गैप कम करने, स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने, ग्रामीण-शहरी अंतर घटाने और किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ने पर विशेष फोकस करना होगा।
Updated on:
11 Feb 2026 05:08 pm
Published on:
11 Feb 2026 05:02 pm
