
11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना पेश करेंगे 2026–27 का बजट, आकार 9 लाख करोड़ के करीब रहने का अनुमान (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP Budget 2026-27: उत्तर प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों की दिशा तय करने वाला विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। वित्तमंत्री सुरेश खन्ना 11 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट सदन में पेश करेंगे। चूंकि यह चुनावी वर्ष है, इसलिए बजट के लोकलुभावन होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार विकास, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण योजनाओं पर विशेष फोकस रख सकती है। हालांकि नए बजट की सौगातों से पहले पिछले बजट के खर्च का लेखा-जोखा भी कई सवाल खड़े कर रहा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पेश बजट और अनुपूरक अनुदानों को मिलाकर कुल बजट आकार ₹8,65,079.46 करोड़ रहा। लेकिन 11 महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी सरकार ने विभागों को कुल स्वीकृत राशि का केवल 54.42% (₹4,70,835.97 करोड़) ही जारी किया। यह दर्शाता है कि योजनाओं की घोषणा और जमीनी क्रियान्वयन के बीच अब भी बड़ा अंतर है।
सकारात्मक पक्ष यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नियमित समीक्षा बैठकों के चलते विभागों ने जारी धनराशि का 91% खर्च कर लिया।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाइयों और संसाधनों की कमी की शिकायतें आम हैं। इसके बावजूद:
यानी स्वास्थ्य क्षेत्र को औसत से बेहतर फंडिंग मिली, फिर भी जमीनी स्तर पर सुधार अपेक्षित है।
परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह का विभाग बजट आवंटन में पीछे रहा। विभाग को स्वीकृत बजट का केवल 42.60% ही मिला। इससे सड़क सुरक्षा, बस सेवाओं और ढांचागत सुधार की गति प्रभावित हो सकती है।
सरकार का दावा है कि विकास की कुंजी इंफ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन संबंधित विभागों की स्थिति मिश्रित रही:
| विभाग | जारी बजट (%) |
| ऊर्जा विभाग | 69.27% |
| नगर विकास | 47.22% |
| नमामि गंगे | 39.11% |
| सिंचाई विभाग | 45% |
यह आंकड़े बताते हैं कि कई अहम परियोजनाओं को अभी भी पूर्ण वित्तीय समर्थन नहीं मिला।
आगामी बजट का आकार करीब 9 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। पिछले साल का बजट ₹8.08 लाख करोड़ था, जो उससे पहले की तुलना में 9.8% अधिक था। इस बार चुनावी साल होने के कारण सामाजिक योजनाओं, किसान हित, रोजगार और महिला कल्याण योजनाओं पर ज्यादा फोकस रहने की उम्मीद है।
सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह लोकलुभावन योजनाओं और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए। राजस्व संग्रह, जीएसटी हिस्सेदारी और केंद्र से मिलने वाले अनुदान बजट के आकार और क्रियान्वयन को प्रभावित करेंगे।
विपक्ष पहले ही आरोप लगा चुका है कि बजट घोषणाओं का पूरा पैसा जमीन पर नहीं पहुंचता। आगामी सत्र में विपक्ष इन आंकड़ों के आधार पर सरकार को घेर सकता है।
| बिंदु | आंकड़े |
| कुल बजट आकार (2025–26) | ₹8,65,079.46 करोड़ |
| विभागों को जारी | ₹4,70,835.97 करोड़ (54.42%) |
| खर्च की गई राशि | ₹4,28,495.95 करोड़ |
| आगामी बजट अनुमान | ₹9 लाख करोड़ |
Updated on:
08 Feb 2026 03:26 pm
Published on:
08 Feb 2026 03:23 pm
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