लखनऊ, Jun 05, 2026

लखनऊ(UP Panchayat Election 2026) : उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों की तैयारी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि ओबीसी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में सरकार को बहुत पहले तेजी दिखानी चाहिए थी। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि आरक्षण का मामला लंबे समय से सरकार के संज्ञान में था, फिर भी प्रक्रिया अभी भी अधर में लटकी हुई है।
कोर्ट ने कहा कि ओबीसी आयोग गठित कर सिफारिशें मांगी गईं, लेकिन उन पर तेजी से अमल नहीं किया गया। बेंच ने कहा, 'ऐसा प्रतीत होता है कि प्रक्रिया अभी जारी है। नियमानुसार इसमें लगभग छह महीने का समय लगता है।' कोर्ट ने पंचायतों के लोकतांत्रिक स्वरूप और समयबद्ध चुनाव कराने की संवैधानिक जरूरत पर भी जोर दिया।
आशीष कुमार सिंह, ओम प्रकाश प्रजापति और खुशीराम द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग को 10 जुलाई 2026 तक पंचायत चुनावों की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि ओबीसी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है, जबकि निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का प्रकाशन 10 जून 2026 को प्रस्तावित किया है।
याचिकाकर्ताओं ने उस शासनादेश को चुनौती दी है जिसमें ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 243-ई की भावना के विरुद्ध है, जो पंचायतों में नियमित चुनाव सुनिश्चित करता है।
उत्तर प्रदेश में पिछले ग्राम पंचायत चुनाव 2021 में हुए थे। पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद कई पंचायतों में प्रशासक तैनात हैं। ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद राज्य सरकार ने नई प्रक्रिया शुरू की, जिसमें ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। इस देरी से पूरे चुनाव कार्यक्रम पर असर पड़ रहा है।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से साफ है कि कोर्ट पंचायती राज संस्थाओं में लोकतंत्र की निरंतरता बनाए रखने पर जोर दे रहा है। यदि समय पर रिपोर्ट संतोषजनक नहीं आई तो कोर्ट आगे सख्त कदम उठा सकता है।
वर्तमान में पूरे प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतें प्रशासकों के भरोसे चल रही हैं। किसानों, महिलाओं और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध चुनाव बेहद जरूरी माने जाते हैं।
राज्य सरकार और आयोगों पर अब दबाव बढ़ गया है कि वे ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करें ताकि पंचायत चुनाव बिना और देरी के कराए जा सकें।
Published on: 05 Jun 2026 12:12 pm

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