
Bombay High Court: व्हाट्सऐप पर छात्रों को कथित तौर पर रोमांटिक मैसेज भेजने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक सहायक शिक्षक की बर्खास्तगी को सही माना है। आरोपी शिक्षक का याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि शिक्षक और छात्राओं की उम्र में बहुत अंतर है इसके बाद भी इस तरह का संपर्क करना एक गंभीर मामला के अंतर्गत आता है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में स्कूल प्रबंधन को कड़ा फैसला लेने का पूरा अधिकार है।
याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने साफ किया कि यह फैसला शिक्षक के पढ़ाने के काम या प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि कक्षा के बाहर उसके व्यवहार को लेकर लिया गया है। कोर्ट के मुताबिक, अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि करीब 30 साल का शिक्षक छात्राओं के संपर्क में था और व्हाट्सऐप पर संदेश भेज रहा था। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि मैसेज की सामग्री पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है, क्योंकि चैट रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए थे। इसके बावजूद कोर्ट ने माना कि उम्र के बड़े अंतर के साथ किसी छात्र से निजी मैसेजिंग करना ही स्कूल प्रबंधन के असंतोष के लिए काफी है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि मामला सामने आने पर शिक्षक ने उसी दिन लिखित माफी दी थी और बाद में यह नहीं कहा कि माफी किसी दबाव में दी गई थी। शिक्षक की नियुक्ति 2020 में तीन साल की प्रोबेशन पर हुई थी। दिसंबर 2022 में शिकायत मिलने के बाद स्कूल ने जनवरी 2023 में एक महीने का वेतन देकर उसकी प्रोबेशन समाप्त कर दी। शिक्षक की ओर से दलील दी गई थी कि वह स्थायी कर्मचारी बनने वाला था, इसलिए पूरी जांच प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि प्रोबेशन पर होने के कारण स्कूल प्रबंधन को “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत उसकी सेवा समाप्त करने का अधिकार था। अंत में कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि स्कूल के पास यह मानने के लिए पर्याप्त आधार थे कि शिक्षक का आचरण एक शिक्षक के अनुरूप नहीं था।
Published on:
30 Jan 2026 06:01 pm
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