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मुजफ्फरपुर, Jun 07, 2026

गोविंद हत्याकांड की मिस्ट्री सुलझी, 25 लाख की रंगदारी और गर्लफ्रेंड की हत्या का बदला लेने के लिए मारी गोली

Govind Sharma Murder Case: मुजफ्फरपुर पुलिस की एसआइटी ने चर्चित गोविंद शर्मा मर्डर केस का खुलासा कर दिया है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि इस हत्याकांड के पीछे जमीनी विवाद में 25 लाख की रंगदारी और शूटर की प्रेमिका की हत्या का बदला कारण था। इस मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड बाबुल चौधरी और शूटर सौरभ उपाध्याय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि मुख्य शूटर राजा सिंह की तलाश में छापेमारी जारी है।

govind sharma murder case

मामले की जानकारी देते पुलिस अधिकारी

Govind Sharma Murder Case: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुए कुख्यात शूटर गोविंद शर्मा हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। SIT की जांच और आरोपियों से पूछताछ में पता चल है कि गोविंद शर्मा की हत्या सिर्फ एक जमीन विवाद का नतीजा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे बदले की कहानी भी थी। पुलिस की गिरफ्त में आए शूटर सौरभ उपाध्याय ने पुलिस को बताया है कि गोविंद शर्मा के मर्डर की वजह उसकी प्रेमिका आयशा शेख की हत्या और पैसों का गबन था।

पैसे भी डूबे और प्रेमिका भी खोई

पुलिस के सामने दिए अपने बयान में सौरभ ने बताया कि साल 2023 में उसने अपनी सुरक्षा का हवाला देकर हथियार खरीदने के लिए समस्तीपुर के एक बिचौलिए निशांत के जरिए गोविंद शर्मा से संपर्क किया था। गोविंद ने उसे दो लाख रुपये में हथियार देने का सौदा तय किया। सौरभ ने उस वक्त हथियार के मोह में आकर 20,000 बैंक से लोन लिया और बाकी के 80,000 अपने एक दोस्त से उधार मांगकर, कुल एक लाख रुपये गोविंद को सौंप दिए। लेकिन गोविंद शर्मा ने सौरभ के वे पैसे भी हड़प लिए और उसे कोई हथियार भी नहीं दिया। विवाद तब और गहरा गया जब पैसे वापस मांगने पर दोनों के बीच दुश्मनी बढ़ गई और गोविंद शर्मा ने सौरभ को सबक सिखाने के लिए उसकी प्रेमिका आयशा शेख की गोली मारकर हत्या करवा दी।

गोविंद और बाबुल के बीच था जमीन का विवाद

इस हत्याकांड का दूसरा पहलू मास्टरमाइंड रविकांत उर्फ बाबुल चौधरी से जुड़ा है। बाबुल चौधरी का मिठनपुरा के मदनानी गली स्थित तीन कट्ठा कीमती जमीन को लेकर गोविंद से विवाद चल रहा था। गोविंद उस जमीन का काम करने के एवज में बाबुल से 25 लाख और 10 धुर जमीन की रंगदारी मांग रहा था, साथ ही विश्वविद्यालय की ठेकेदारी छोड़ने का दबाव बना रहा था। जब दोनों के दुश्मन एक ही थे, तो उनके रास्ते मिलने तय थे। अप्रैल 2026 में मुजफ्फरपुर के बनारस बैंक चौक से सटे एक मैदान में सौरभ के रिश्ते के मामा अमित पांडेय उर्फ अंकित त्रिपाठी के माध्यम से बाबुल चौधरी और सौरभ उपाध्याय की पहली मुलाकात हुई।

मुलाकात के दौरान ही बाबुल ने सौरभ को साफ कह दिया कि अगर इस इलाके में जिंदा रहना है, तो गोविंद को रास्ते से हटाना ही होगा, क्योंकि गोविंद ने दोनों के पीछे अपने शूटर लगा रखे हैं। प्रेमिका की मौत का बदला लेने के लिए बेताब सौरभ तुरंत इस खूनी साजिश का हिस्सा बन गया और उसी मैदान में गोविंद शर्मा को ठिकाने लगाने की अंतिम स्क्रिप्ट लिख दी गई। बाबुल चौधरी ने साहेबगंज के परसौनी निवासी एक और कुख्यात शूटर राजा सिंह को इस काम के लिए 5 लाख रुपये की सुपारी देकर टीम में शामिल किया।

सिग्नल ऐप से की रेकी

साजिश के तहत पहले 30 अप्रैल को पटना के नंदन अपार्टमेंट में गोविंद की हत्या की कोशिश की गई, लेकिन वहां योजना सफल नहीं हो सकी। इसके बाद बाबुल चौधरी ने पता लगाया कि गोविंद मुजफ्फरपुर के अमर सिनेमा रोड स्थित आइकॉन टावर के फ्लैट नंबर 205 में रह रहा है। बाबुल ने पूरी चालाकी दिखाते हुए शूटर सौरभ को उसी टावर की चौथी मंजिल पर फ्लैट नंबर 406 किराए पर दिलवा दिया और उसका सारा खर्च खुद उठाया। मकसद साफ था कि गोविंद को भनक भी न लगे और उसकी हर हरकत पर नजर रखी जा सके।

गोविंद की रेकी करने के लिए बाबुल ने सौरभ को पांच सिमकार्ड, दो कीपैड मोबाइल और एक एंड्रॉयड फोन मुहैया कराया। सौरभ पूरी तरह से सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड सिग्नल ऐप का इस्तेमाल करके गोविंद के आने-जाने, उठने-बैठने की पल-पल की जानकारी बाबुल चौधरी तक पहुंचाता था। 30 मई की रात बाबुल चौधरी और उसके सहयोगी वैभव ने अमर सिनेमा रोड के पास सौरभ को बुलाकर चार पिस्तौलों से भरा एक बैग और एक काले रंग की स्कूटी सौंपी, जिसे चुपचाप अपार्टमेंट की बेसमेंट पार्किंग में खड़ा कर दिया गया।

चिकन-शराब की पार्टी के बाद सीढ़ियों पर अंधाधुंध फायरिंग

31 मई की सुबह ही चारों पिस्तौलों में कारतूस लोड करके उन्हें गद्दे के नीचे छिपा दिया गया था। बाबुल ने निर्देश दिया था कि दोपहर में मुख्य शूटर राजा सिंह भी फ्लैट पर पहुंच जाएगा। हत्या वाली रात करीब 8:00 बजे बाबुल चौधरी ने अपने गुर्गे वैभव के हाथ से दोनों शूटरों के लिए चावल, चिकन, शराब और कुछ नकदी फ्लैट नंबर 406 में भिजवाई। दोनों शूटरों ने जमकर शराब पी, चिकन खाया और हथियार चमकाते हुए गोविंद के आने का इंतजार करने लगे।

रात के ठीक 9:50 बजे तीसरी मंजिल की खिड़की से नजर रख रहे राजा सिंह ने देखा कि गोविंद की सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार आइकॉन टावर के अंदर दाखिल हो रही है। दोनों शूटर अपनी-अपनी पिस्तौलें तानकर सीढ़ियों में छिप गए। गोविंद जैसे ही बेसमेंट में कार पार्क करके सीढ़ियों से ऊपर की तरफ बढ़ा, तीसरी मंजिल की सीढ़ी से सौरभ और दूसरी मंजिल की सीढ़ी से राजा सिंह ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। पहली गोली सीधे गोविंद के सीने में लगी। लहूलुहान गोविंद जान बचाने के लिए वापस नीचे बेसमेंट की तरफ भागा, लेकिन दोनों शूटर गोलियां बरसाते हुए उसका पीछा करने लगे।

चार गोली लगने के बाद भी लड़ता रहा गोविंद

गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी गोविंद शर्मा ने हार नहीं मानी और बेसमेंट में सुरक्षा गार्ड की लकड़ी की कुर्सी उठाकर शूटरों पर पलटवार कर दिया। चार गोलियां लगने के बावजूद गोविंद के अंदर इतनी ताकत और गुस्सा बाकी था कि उसने आगे बढ़कर शूटर सौरभ उपाध्याय का गला दबोच लिया। गोविंद एक हाथ से सौरभ का गला भींच रहा था और दूसरे हाथ से कुर्सी से उसे मार रहा था। इसी बीच सौरभ ने गोविंद पर फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसकी पिस्तौल ऐन वक्त पर मिसफायर हो गई।

इसी बीच सौरभ चिल्लाने लगा। सौरभ की चीख सुनकर दूसरा शूटर राजा सिंह तेजी से आगे बढ़ा और उसने सीधे गोविंद के सिर में गोली मार दी। गोली लगते ही गोविंद का हाथ ढीला पड़ा और वह जमीन पर गिर गया।

कचरे में फेंके कपड़े और मड़ई में काटी रात

वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों शूटर उसी काली स्कूटी से फरार हो गए। कुछ दूरी पर मुख्य सड़क की गली में मास्टरमाइंड बाबुल चौधरी गाड़ी स्टार्ट किए उनका इंतजार कर रहा था। बाबुल ने तुरंत उनसे सारे मोबाइल फोन और सिमकार्ड वापस ले लिए ताकि कोई डिजिटल सबूत न छूटे। वहां से वे पुरानी गुदरी स्थित मनीष के घर पहुंचे, जहां छत पर मच्छरदानी के भीतर चारों हथियारों को लपेटकर छिपा दिया गया। सौरभ ने अपनी खून से सनी शर्ट घर के पीछे कचरे के ढेर में फेंक दी। इसके बाद बनारस बैंक चौक पर कपड़े बदलकर दोनों शूटर शहर के बाहरी इलाके में स्थित नदी के बांध पर बाबुल की बताई एक मड़ई (झोपड़ी) में रात भर छिपे रहे।

अगले दिन सौरभ बैरिया बस स्टैंड से बस पकड़कर पटना भागा, जहां उसे पता चला कि पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है और बाबुल चौधरी का नाम सामने आ चुका है। वह डरकर नेपाल भागने के लिए रक्सौल बॉर्डर पहुंचा, लेकिन बॉर्डर बंद होने के कारण उसे रेलवे स्टेशन के पास रात काटनी पड़ी, जहां मुजफ्फरपुर पुलिस की एसआइटी ने उसे दबोच लिया।

उधर, मास्टरमाइंड बाबुल चौधरी शूटर राजा सिंह को 25,000 रुपये देकर वैशाली और समस्तीपुर होते हुए सिलीगुड़ी भाग गया था, लेकिन जब उसे पता चला कि वह नामजद आरोपी बन चुका है, तो वह देश से बाहर भागने की फिराक में दरभंगा एयरपोर्ट पहुंचा, जहां घेराबंदी कर बैठी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और मुख्य शूटर राजा सिंह की तलाश में पुलिस झारखंड के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

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