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नागौर, Jun 07, 2026

पानी की टंकी का बिल पास करने के बदले छह लाख की रिश्वत मांगी, 3 अभियंताओं पर मामला दर्ज

पीएचईडी की एईएन शांति देवी, जेईएन सतवीर तथा तत्कालीन प्रोजेक्ट जेईएन आशीष मीणा की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच अजमेर चौकी के सीआई नरेन्द्र सिंह को सौंपी गई

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नागौर. डीडवाना-कुचामन जिले के नावां क्षेत्र में पानी की टंकी निर्माण कार्य का बिल पास करने के एवज में लाखों रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने दो सहायक अभियंताओं (एईएन) और एक कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एसीबी के अनुसार संवेदक से बिल भुगतान के बदले पहले छह लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी, बाद में सौदा पांच लाख रुपए में तय होने की बात सामने आई।

नागौर एसीबी चौकी एएसपी कल्पना सोलंकी ने बताया कि संवेदक से रिश्वत मांगने की शिकायत पर एसीबी काफी समय से अभियंताओं को ट्रेप करने की कोशिश कर रही थी। जांच के दौरान उनके पास रिश्वत मांगने से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग भी पहुंची, जिसके आधार पर मांग का सत्यापन किया गया। जांच में पीएचईडी की एईएन शांति देवी, जेईएन सतवीर तथा तत्कालीन प्रोजेक्ट जेईएन आशीष मीणा की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच अजमेर चौकी के सीआई नरेन्द्र सिंह को सौंपी गई है।

कई बार हुए प्रयास, हर बार बच गए

एसीबी एएसपी सोलंकी ने बताया कि रिश्वत मांगने की शिकायत पर सितंबर 2025 में एईएन शांति देवी और जेईएन सतवीर के खिलाफ रिश्वत मांगने का सत्यापन किया गया था। वहीं निर्माण कार्य के दौरान प्रोजेक्ट जेईएन रहे आशीष मीणा का सत्यापन 27 जनवरी 2026 को किया गया। वर्तमान में आशीष मीणा मकराना में एईएन के पद पर कार्यरत हैं। एसीबी ने आरोपियों को रंगे हाथों पकडऩे के लिए 3 और 4 फरवरी को ट्रैप की कार्रवाई के लिए जाल बिछाया था, लेकिन अभियंताओं को इसकी भनक लग गई। जिसके बाद अभियंताओं ने परिवादी से कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि तुम एसीबी टीम के साथ घूम रहे हो, इसलिए मामला ठंडा होने के बाद बात करना। इसके बाद मार्च में एसीबी ने वापस ट्रैप की कोशिश की, लेकिन कार्रवाई से ठीक पहले संबंधित अधिकारी सतर्क होकर गायब हो गए।

पहले तीन लाख, काम होने के बाद दो लाख

जांच में सामने आया कि पांच लाख रुपए की रिश्वत में से तीन लाख रुपए काम होने से पहले और दो लाख रुपए बिल भुगतान होने के बाद देने की बात तय हुई थी। हालांकि ट्रैप की कार्रवाई सफल नहीं हो सकी, लेकिन रिश्वत मांगने के पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर एसीबी ने तीनों अभियंताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

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