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पेपर बैक के नाम पर कॉलेज छात्रों की जेब पर डाका, कोई सुनने वाला नहीं

सेमेस्टर व्यवस्था में विश्वविद्यालय की मनमानी, दो बार वसूली जा रही फीस, मेरिटोरियस विद्यार्थियों को भी हर सेमेस्टर में मिल रही बैक, ताकि उसके नाम पर वसूल सकें भारी फीस

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नागौर. नई शिक्षा नीति-2020 के तहत कॉलेज शिक्षा में की गई सेमेस्टर प्रणाली विश्वविद्यालय के लिए जहां कमाई का जरिया बन गई है, वहीं कॉलेज विद्यार्थियों के लिए आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सबब बन गई है। इसकी वजह है हर सेमेस्टर में किसी ने किसी विषय में जानबूझकर ‘बैक’ (अनुत्तीर्ण) दिया जाना और फिर बैक की परीक्षा लेने के बहाने मोटी फीस वसूलना। ताज्जुब की बात यह है कि मेरिटोरियस छात्र भी इस कुव्यवस्था के शिकार हो रहे हैं, जबकि अन्य विषयों में उनको अच्छे नम्बर मिल रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें रिवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) की व्यवस्था नहीं है। यदि इसी प्रकार चलता रहा तो तीन साल की स्नातक डिग्री लेने में विद्यार्थियों को चार साल लग जाएंगे।

रिवैल्यूएशन का सिटस्म नहीं, विद्यार्थी परेशान, सुनने वाला कोई नहीं

पहले साल में एक बार परीक्षा होने से फीस एक बार ही वसूली जाती थी। नई शिक्षा नीति में दो बार परीक्षा होने से फीस भी दो बार लगती है और वो भी पहले से अधिक। पहले कम नम्बर आने या ‘बैक’ आने पर विद्यार्थी रिवैल्यूएशन(पुनर्मूल्यांकन)/रीचेकिंग करवा लेते थे। इसका लगभग सभी को फायदा मिलता था। अब ऐसा सिस्टम नहीं है। ‘बैक’ आने पर विद्यार्थी रिवैल्यूएशन नहीं करवा सकते। उन्हें संबंधित विषय की परीक्षा वापस देनी पड़ेगी और उसकी फीस 1350 रुपए भरनी होगी। पूरे सेमेस्टर की फीस 1700 से 1800 रुपए है, वहीं ‘बैक’ वाले विषय की फीस 1350 रुपए रखी गई है।

सभी कॉलेजों की यही स्थिति

नागौर जिले के सभी महाविद्यालय एमडीएस विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। यहां के सभी कॉलेजों के विद्यार्थी इस बैक व्यवस्था से पीडि़त हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि आंतरिक मूल्यांकन और थ्योरी परीक्षा में दूसरे विषयों में अच्छे अंक होने के बावजूद उन्हें एक विषय में बैक दी जा रही है। बैक आने पर उन्हें वापस परीक्षा शुल्क के साथ मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बोझ परेशानी भरा है।

सेमेस्टर प्रणाली की मुख्य समस्याएं

- ‘बैक’ (अनुत्तीर्ण) की समस्या।

- आर्थिक कमजोर छात्रों पर फीस का बोझ।

- मेरिटोरियस छात्र भी प्रभावित।

- पुनर्मूल्यांकन का अभाव।

- शैक्षणिक सत्र में देरी।

- अतिरिक्त परीक्षा दबाव।

उच्च स्तर पर पहुंचाएंगे समस्या

नई शिक्षा नीति में की गई सेमेस्टर व्यवस्था में प्रतिभावान विद्यार्थियों के भी किसी न किसी विषय में बैक देकर फीस के नाम पर मोटी वसूली करना गलत है। यह शिक्षा प्रणाली में मूल्यांकन प्रक्रिया की खामियों को दर्शाता है। इससे कॉलेज छात्र मानसिक रूप से प्रताडि़त हो रहे हैं। हम इस मुद्दे को उच्च स्तर पर पहुंचाएंगे।

- सुरेन्द्र काला, जिला संयोजक, एबीवीपी, नागौर

विद्यार्थियों की बात उच्चाधिकारियों को भेजी

बैक की समस्या को लेकर गत दिनों विद्यार्थियों ने ज्ञापन दिया था, जिसको उच्चाधिकारियों को अग्रेषित कर दिया है।

- डॉ. हरसुखराम छरंग, प्राचार्य, श्री बीआर मिर्धा कॉलेज, नागौर

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लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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