
नागौर में अनार की खेती
नागौर. परंपरागत खेती के लिए पहचाने जाने वाले नागौर जिले में अब कृषि की तस्वीर तेजी से बदल रही है। बदलते मौसम, घटते जलस्तर और बढ़ती लागत के बीच किसान अब नवाचारों की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। उद्यानिकी खेती, पॉली हाउस तकनीक और आधुनिक कृषि उपकरणों के माध्यम से किसान न केवल अधिक उत्पादन ले रहे हैं, बल्कि अपनी अलग पहचान भी बना रहे हैं। सरकारी योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन ने इस बदलाव को गति देने में अहम भूमिका निभाई है।
जिले में अनार, खजूर, बेर और पपीता जैसी उद्यानिकी फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। पहले जहां किसान पारंपरिक फसलों जैसे बाजरा, ग्वार, तिल, मूंग, कपास, सरसों, तारामीरा और चना की फसल तक सीमित थे, वहीं अब उद्यानिकी खेती से उन्हें बेहतर आय मिलने लगी है। अनार और खजूर जैसी फसलें कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं, जिससे शुष्क क्षेत्र के किसानों को बड़ा फायदा हो रहा है। कई किसानों ने इन फसलों के माध्यम से स्थानीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई है।
पॉली हाउस तकनीक आ रही रास
पॉली हाउस तकनीक भी जिले में कृषि का नया चेहरा बनकर उभरी है। सीमित भूमि और कम पानी की उपलब्धता के बावजूद किसान पॉली हाउस के जरिए सब्जियों और फूलों का अधिक उत्पादन ले रहे हैं। खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी और रंगीन फूलों की खेती पॉली हाउस में सफलतापूर्वक की जा रही है। नियंत्रित तापमान और नमी के कारण फसलें मौसम की मार से सुरक्षित रहती हैं और गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इससे किसानों को बाजार में अच्छी कीमत मिल रही है।
सरकारी योजनाओं की भूमिका
कृषि में तकनीकी नवाचार पहुंचाने में सरकारी योजनाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, सूक्ष्म सिंचाई योजना और पॉली हाउस अनुदान, सोलर ऊर्जा संयंत्र पर अनुदान योजनाओं के तहत किसानों को आर्थिक सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाने से पानी की बचत के साथ-साथ उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है। कृषि विभाग के अधिकारी समय-समय पर खेतों का निरीक्षण कर किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं।
पढ़े-लिखे युवा कर रहे खेती
जिले में खेती की तस्वीर बदलने में पढ़े-लिखे युवाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। पहले जहां पढ़े-लिखे युवा खेती से दूर रहते थे, वहां अब आईआईटी व कृषि में स्नातक की पढ़ाई किए हुए युवा भी खेती में नवाचार कर रहे हैं। कई युवा किसान अब आधुनिक कृषि की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पढ़े-लिखे युवा पारंपरिक नौकरी के बजाय कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाकर नवाचार कर रहे हैं। वे मोबाइल ऐप, मौसम पूर्वानुमान, ऑनलाइन मार्केटिंग और आधुनिक मशीनों का उपयोग कर खेती को लाभकारी बना रहे हैं। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
नागौर में अपार संभावनाएं
उद्यानिकी विभाग के कृषि अधिकारी स्वरूपराम जाखड़ ने बताया कि तकनीकी नवाचारों और सरकारी सहयोग से नागौर जिला आने वाले वर्षों में उद्यानिकी और आधुनिक कृषि का प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि जिले की कृषि अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। नवाचारों के इस दौर में नागौर का किसान आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है और कृषि की बदलती तस्वीर भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है।
सफलता की कहानी
विदेशों में जा रहा कालड़ी का अनार
जिले के कालड़ी गांव के रेतीले धोरों में प्रगतिशील किसान अशोक जांगू की ओर से करीब 40 बीघा जमीन में लगाए गए 5 हजार अनार के पौधों से हर साल दो हजार क्विंटल की पैदावार हो रही है। अनार की खेती पूरी तरह ऑर्गेनिक होने के चलते इनकी डिमांड विदेशों तक है। जांगू ने बताया कि पहले अनार महाराष्ट्र के सांगोला मंडी भेजे जाते हैं, वहां जांच के बाद जर्मनी सहित अन्य देशों में भेजे जाते हैं। उन्होंने अनार की खेती करने वाले किसानों से कहा कि अनार के पौधों की कटिंग सबसे महत्वपूर्ण है, जो नासिक से मजदूर बुलाकर करवाते हैं।
टांकला में अमरूद सहित 28 प्रकार के फलों का बगीचा
टांकला के प्रगतिशील किसान लिखमाराम मेघवाल ने कोरोना काल में बागवानी करने की ठानी और सबसे पहले अमरूद के पौधे लगाए। इसके बाद अनार, अंजीर, बेर, किन्नू, मौसमी, चीकू सहित 28 प्रकार के पौधे लगा दिए। लिखमाराम ने बताया कि पूरी तरह ऑर्गेनिक बागवानी होने के चलते अमरूद 100 रुपए किलो तक बिकते हैं। शुरू में ऑनलाइन जानकारी ली, लेकिन बाद में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर फार्म पौण्ड भी बनाया और छह बीघा में बगीचा लगाया।
Published on:
05 Feb 2026 11:06 am
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