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नागौर में सड़क हादसों का खतरा बढ़ा, बड़े एक्सीडेंट स्पॉट डेढ़ गुना हुए

जिले में बढ़े बड़े एक्सीडेंट स्पॉट, सडक़ हादसों में इजाफा बना चिंता का विषय, वर्ष 2024 में 28 बड़े एक्सीडेंट स्पॉट थे, जो 2025 में बढकऱ 40 हो गए, 2024 की बजाए 2025 में सडक़ हादसे व मृतकों की संख्या भी बढ़ी

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Accident file photo

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नागौर. जिले में सडक़ सुरक्षा को लेकर हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं। वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में न केवल सडक़ हादसों की संख्या बढ़ी है, बल्कि बड़े एक्सीडेंट स्पॉट्स की संख्या में भी डेढ़ गुना इजाफा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में जिले में 28 बड़े एक्सीडेंट स्पॉट चिह्नित थे, जो वर्ष 2025 में बढकऱ 40 हो गए हैं। इसके साथ ही हादसों में घायल होने और जान गंवाने वालों की संख्या भी बढ़ी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि एक्सीडेंट स्पॉट्स बढऩे की वजह निरंतर मॉनिटरिंग है, लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और है। कई बार जिम्मेदारों को एक्सीडेंट स्पॉट्स की जानकारी होने के बावजूद समय पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। सडक़ चौड़ीकरण, स्पीड ब्रेकर, संकेतक बोर्ड, स्ट्रीट लाइट और अवैध अतिक्रमण हटाने जैसे उपाय यदि समय रहते किए जाएं तो हादसों में कमी लाई जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर लगातार बढ़ता यातायात, तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी, रोड इंजीनियरिंग में खामियां और सडक़ किनारे अवैध निर्माण हादसों के प्रमुख कारण बन रहे हैं। कई स्थानों पर हाइवे के किनारे दुकानों, ढाबों और अन्य निर्माणों के कारण सडक़ें संकरी हो गई हैं, जिससे वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने की मजबूरी होती है और हादसे हो जाते हैं। जिले में बढ़ते हादसों का एक बड़ा कारण यातायात नियमों के प्रति लापरवाही भी है। हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना, ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग और शराब पीकर वाहन चलाना आम हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सडक़ सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी भी हादसों को बढ़ावा दे रही है।

दुर्घटनाओं व मृतकों की संख्या

दुर्घटनाओं की संख्या

वर्ष - 2023 - 378

वर्ष 2024 - 375

वर्ष 2025 - 385

मृतकों की संख्या

वर्ष - 2023 - 283

वर्ष 2024 -273

वर्ष 2025 - 284

चार या चार से ज्यादा दुर्घटना वाले स्पॉट चिह्नित

सडक़ सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जिन स्थानों को एक्सीडेंट स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है, वहां साल में चार या चार बार से ज्यादा दुर्घटनाएं हुईं। इन स्थानों पर अंधे मोड़, खराब सडक़ स्थिति, पर्याप्त संकेतक न होना, अवैध कट और गलत ढंग से बने सर्विस रोड जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर सुधार कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। जिले में नियमित रूप से सडक़ सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही पुलिस, परिवहन विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

दुर्घटनाओं से जीडीपी को हर वर्ष 3 प्रतिशत नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट भी सडक़ हादसों की बढ़ती संख्या को लेकर गंभीर है। भारत में सडक़ दुर्घटनाओं के कारण हर वर्ष सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को करीब 3 प्रतिशत का नुकसान होता है, जो विश्व में सबसे ज्यादा है। यह नुकसान केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय स्तर पर भी गहरा प्रभाव डालता है।

निरंतर मॉनिटरिंग का परिणाम

जिला सडक़ सुरक्षा समिति की हर महीने होने वाले बैठकों के तहत जिले में होने वाले सडक़ हादसों के स्थानों को चिह्नित किया गया है। निरंतर मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप ही एक्सीडेंट स्पॉट की संख्या बढ़ी है, अब इनके सुधार पर काम होगा।

- चम्पालाल जीनगर, एडीएम, नागौर