
अजीत पवार की विमान हादसे में हुई मौत (Photo-IANS)
विमान हादसे में अजित पवार की मौत के बाद चाचा से बगावत कर बनाई गई उनकी पार्टी एनसीपी के भविष्य को लेकर अटकलें भी शुरू हो गई हैं। अजित पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा काफी ऊंची थी। उन्होंने इसे कभी छिपाया भी नहीं। साथ ही, इसे पूरी करने की राह में चाचा शरद पवार को ही रोड़ा भी समझा। शायद यही वजह थी कि जब शरद पवार ने मई 2023 में एनसीपी की बैठक में अचानक इस्तीफा देने की घोषणा की तो अजित पवार ने यही जाहिर किया था कि चाचा ने सही ही किया है।
वह चाहते थे शरद पवार किसी कीमत पर इस्तीफा वापस नहीं लें, लेकिन करीब दस दिन बाद पवार ने इस्तीफा वापसी का ऐलान कर दिया। इसके बाद अजित पवार ने कुछ देर के लिए चुप्पी साध ली थी और दो महीने बाद ही पार्टी तोड़ दी। इसके बाद चाचा पर जोरदार हमले जारी रखे और उनके गढ़ बारामती से चुनाव लड़ कर उनकी नाक कटाने का संकल्प ले लिया।
अजित के तेवर देख शरद समर्थक एक नेता ने कहा था कि अजित पवार ने बीजेपी से शरद पवार को राजनीतिक रूप से खत्म करने की सुपारी ली है। इस बात में सच्चाई हो न हो, लेकिन यह सच है कि अजित पवार ने शरद पवार को राजनीतिक रूप से धराशाई कर दिया।
2023 में मई का महीना शुरू ही हुआ था कि शरद पवार के एक फैसले ने एनसीपी और महाराष्ट्र की सियासत का पारा काफी चढ़ा दिया। शरद पवार ने भाषण के बीच में जैसे ही पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफे की पेशकश की, वहां मौजूद सब लोग सन्न रह गए। कई नेताओं ने कहा- हम इसे नहीं मानते, आपको इस्तीफा वापस लेना पड़ेगा। लेकिन, अजित पवार का रुख अलग था।
अजित पवार का कहना था कि चाचा ने उम्र और सेहत का ख्याल रखते हुए सही फैसला किया है। उन्होंने कहा था कि वह किसी नए नेता के हाथ में कमान देना चाह रहे हैं। वह जो कोई भी होगा, पार्टी का काम 'साहेब' (शरद पवार) की निगरानी में ही होगा। इसलिए उनके इस्तीफे को लेकर भावुक होने की जरूरत नहीं है।
अजित पवार इस्तीफा वापस लेने की मांग करने वाले नेताओं को भी ऐसा नहीं करने देना चाहते थे। यहां तक कि शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को भी इस मसले पर बात नहीं करने देना चाह रहे थे। उल्टा, उन्होंने माहौल बनाया कि चाचा इस्तीफा वापस नहीं लेंगे। यहां तक कहा कि प्रतिभा ताई (शरद पवार की पत्नी) से उनकी बात हुई है, शरद पवार फैसला नहीं बदलेंगे।
लेकिन, जब शरद पवार ने फैसला बदल लिया तो अजित पवार का रुख भी बदल गया। वह उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं दिखे, जिसमें पवार ने इस्तीफा वापस लेने की घोषणा की। दिन भर उनका कोई बयान भी नहीं आया।
अजित पवार के बागी होने और बीजेपी से हाथ मिलाने की तैयारी होने की अटकलें तभी से लगने लगी थीं। इस बारे में पत्रकारों ने शरद पवार से सवाल भी किया। इस पर चाचा पवार ने जवाब दिया, 'इसमें कोई सच्चाई नहीं है। क्या प्रेस कॉन्फ्रेंस में सारे रिपोर्टर आते हैं?' बाद में अजित पवार ने एक बयान जारी कर चाचा के इस्तीफा वापस लेने के फैसले का स्वागत किया।
वैसे, दो महीने बाद ही अजित पवार ने बगावत कर पार्टी तोड़ दी और एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए। दिसंबर 2023 में उन्होंने पार्टी की बैठक में शरद पवार के इस्तीफे को 'नौटंकी' बताया और कहा कि शरद पवार ने एनसीपी नेताओं को बुला कर कहा था कि वे इस्तीफा वापस लेने की मांग करते हुए प्रदर्शन करें। उन्होंने यह भी कहा कि शरद गुट उनसे समझौता करने की कोशिश में हैं और इसके लिए 12 अगस्त को पुणे में एक कारोबारी के घर बैठक भी हुई।
शरद समर्थक नेता और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि अजित पवार को बीजेपी ने शरद पवार का राजनीतिक करियर खत्म करने की सुपारी दी है अजित ने उन्हें भी आड़े हाथ लिया। साथ ही, शरद पवार के गढ़ बारामती से लोकसभा चुनाव लड़ने की भी घोषणा की।
चुनाव आया तो उन्होंने बारामती में ही शरद यादव को चित करने की ठानी और करके भी दिखाया। इस बीच पार्टी का नाम और निशान हासिल करने की लड़ाई में भी वह शरद पवार को हरा चुके थे। एक समय जिस बारामती से वह राजनीति में चमके थे, उसे शरद पवार के लिए त्याग दिया था। लेकिन, फिर उसी बारामती में उसी शरद पवार की नाक कटवाने का संकल्प पूरा किया और वहीं आखिरी सांस भी ली।
Published on:
28 Jan 2026 08:58 pm

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