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कहीं पछताना न पड़ जाए…डिजिटल-AI से हो जाइए सावधान! ताजा सर्वे में बड़ा खुलासा

AI Security Threats: 61% लोग साइबर हमलों से डरे हुए हैं। 51% सीईओ चिंतित हैं… क्योंकि 47% कंपनियां आधुनिक खतरों से निपटने में नाकाम हैं।

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AI Security Threats

डिजिटल-एआइ युगः डेटा चोरी और साइबर फ्राड से डरे बिजनेस लीडर्स, सर्वे से खुलासा (इमेज सोर्स: चैट GPT जनरेटेड फोटो)

Cyber Fraud: भारतीय कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा अब सबसे बड़ी चुनौती है। एक नए सर्वे में 51% बिजनेस लीडर्स ने इसे प्राथमिक जोखिम माना। 'फिक्की-ईवाय रिस्क सर्वे 2026' की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। इसमें डिजिटल युग के बढ़ते खतरों पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीकी जोखिम अब सीधे कंपनी के कामकाज से जुड़ गए हैं।

सर्वे के अनुसार, 61% लोग साइबर हमलों से डरे हुए हैं। डेटा चोरी और धोखाधड़ी को 57% ने बड़ा जोखिम माना। लगभग 47% कंपनियां इन आधुनिक खतरों से निपटने में नाकाम हैं। साइबर हमलों से कंपनियों की प्रतिष्ठा और वित्त पर असर पड़ता है। डिजिटल बदलाव कंपनियों की प्रतिस्पर्धी स्थिति को प्रभावित कर रहे हैं। यह सर्वे 137 सीईओ और सीनियर डिसीजन-मेकर्स पर आधारित है। इसमें 21% प्रतिभागी टेक्नोलॉजी सेक्टर से थे। प्रोफेशनल सर्विसेज दूसरे नंबर पर।

साइबर अटैक अब सिर्फ आईटी मुद्दा नहीं। यह ऑपरेशनल कंटिन्यूटी से जुड़ा है। 61% लीडर्स मानते हैं कि साइबर हमले वित्तीय और रेपुटेशनल खतरा हैं। तेज टेक्नोलॉजिकल बदलावों को 61% कंपनियां प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाला मान रहे हैं।

दोधारी तलवार बना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

सर्वे के अनुसार, आज के दौर में एआइ एक 'दोधारी तलवार' बन गया है। करीब 60% विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी पिछड़ापन घातक है। सही समय पर नई तकनीक न अपनाना नुकसानदेह हो सकता है। वहीं, 54% लोग एआइ के एथिकल और गवर्नेंस संबंधी जोखिमों से चिंतित हैं। इन जोखिमों का प्रबंधन अभी भी प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है।

टैलेंट की कमी और कार्यबल की चुनौतियां

सर्वे में टैलेंट की कमी को गंभीर मुद्दा बताया गया है। करीब 64% लीडर्स कुशल कर्मचारियों की कमी से परेशान हैं। इससे कंपनियों के प्रदर्शन और विकास पर सीधा असर पड़ रहा है। लगभग 59% ने उत्तराधिकार योजना में कमजोरी जताई। कुशल पेशेवरों की कमी स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है।

जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक संकट

भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को 48% अधिकारियों ने बड़ी चुनौती माना। जलवायु परिवर्तन भी अब वित्तीय जोखिम में बदल रहा है। करीब 45% विशेषज्ञों ने इसके कारण वित्तीय नुकसान की आशंका जताई। ईएसजी नियमों का पालन न करना भी भारी पड़ सकता है। 44% लोग इसे कंपनी के लिए बड़ा रिस्क मानते हैं।

बाजार की मांग और नियामक बदलाव

ग्राहकों की बदलती मांग 49% कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती है। करीब 67% लोग नियामक बदलावों से चिंतित दिखे। अनुपालन तंत्र नियमों की बदलती गति के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा। सप्लाई चेन में बाधा भी 54% अधिकारियों की बड़ी चिंता है।

राजद के कई बड़े नेता और तेजश्री यादव की पत्नी ने कहा था कि बिहार में खेल होना अभी बाकि है। ऐसा होने के डर से ही नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा के नजदीक चाणक्य होटल में रात को रुकवाया।

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लव सोनकर

लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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