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इस राज्य में बनने जा रही BJP की नई सरकार, नितिन नबीन ने इस बड़े नेता को दी है CM फेस चुनने की जिम्मेदारी

मणिपुर में नई सरकार के गठन को लेकर तस्वीर आज शाम तक साफ होने की उम्मीद है। आज दिल्ली में मणिपुर के बीजेपी विधायक दल की बैठक में नेता चुना जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...

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BJP के विधायक दल की बैठक (File Photo)

भाजपा ने मणिपुर में नई सरकार के गठन की कवायद शुरू कर दी है। बीजेपी की संसदीय बोर्ड ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को मणिपुर में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए ऑब्जर्वर बनाया है। आज भाजपा की विधायक दल की बैठक होने की संभावना है। मणिपुर से NDA के 20 विधायक रविवार रात को दिल्ली पहुंचे, जबकि अन्य विधायक बीते सोमवार को पार्टी हाईकमान से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे।

विधायक दल के नेता के नाम का ऐलान

दिल्ली पहुंचने वाले नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत सिंह, पूर्व मंत्री वाई. खेमचंद सिंह और BJP प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी शामिल हैं। आज शाम तीन बजे पार्टी विधायक दल के नेता का ऐलान कर सकती है। इसके बाद पार्टी राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। चर्चा है कि पार्टी कुकी-जो समुदाय को संतुष्ट करने के लिए 10 कुकी विधायकों में से एक को डिप्टी सीएम बना सकती है।

12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन खत्म होने की आखिरी तारीख

मणिपुर में हिंसा के बाद एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 60 सदस्यों वाली विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था। राज्यपाल ने सिंह के इस्तीफे के 4 दिन बाद यानी 13 फरवरी 2025 से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। राष्ट्रपति शासन खत्म होने की आखिरी तारीख 12 फरवरी 2026 है। इसलिए भाजपा जल्द से जल्द राज्य में सरकार के गठन को लेकर तस्वीर साफ करना चाहती है।

राष्ट्रपति शासन क्यों बढ़ाना ऑप्शन नहीं है?

संवैधानिक चुनौतियों के कारण भी मोदी सरकार एक साल से अधिक समय तक राष्ट्रपति शासन का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ा सकती है। दरअसल, संविधान के तहत, किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन अधिकतम तीन साल के लिए लगाया जा सकता है, बशर्ते हर छह महीने में संसदीय मंजूरी मिले। हालांकि, 1978 के 44वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के तहत, एक साल से ज्यादा के विस्तार के लिए दो शर्तें जरूरी हैं। पहली यह घोषणा कि राष्ट्रीय आपातकाल लागू है और दूसरी कि चुनाव आयोग (EC) यह प्रमाणित करे कि मुश्किलों के कारण चुनाव नहीं कराए जा सकते। अगर ये शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो राष्ट्रपति शासन एक साल से ज्यादा नहीं हो सकता और चुनाव या सरकार का गठन होना ही चाहिए।

केंद्र के हस्तक्षेत्र से हिंसा काबू

मोदी सरकार का मानना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति नाज़ुक है। हालांकि, राष्ट्रपति शासन से कुछ हद तक व्यवस्था बनी है, हिंसा में काफी कमी आई है और पिछले कुछ महीनों में शायद ही कोई हत्या हुई हो। केंद्र का मानना है कि यह काफी हद तक राज्य में तैनात सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस दोनों पर केंद्र के सीधे नियंत्रण के कारण संभव हुआ है।

वहीं, दिसंबर 2025 में भाजपा के संगठन महासचिव बी एल संतोष और पार्टी के नॉर्थईस्ट कोऑर्डिनेटर संबित पात्रा पूर्वोत्तर की यात्रा पर थे। पार्टी ने दोनों नेताओं को इंफाल में स्थिरता का टोह लेने के लिए भेजा था। इस दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने इंफाल में प्रदेश मुख्यालय में बीजेपी विधायकों के साथ एक बंद कमरे में मीटिंग की। बीजेपी नेताओं ने पार्टी के सहयोगियों से भी मुलाकात की थी।