
Union Budget 2026 (सोर्स- पत्रिका)
NRI Property : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2026 (Union Budget 2026) पेश करते हुए प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए रियल एस्टेट निवेश के नियमों में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने मध्यम वर्ग को राहत देने और अफोर्डेबल हाउसिंग (किफायती घरों) को आम आदमी की पहुंच में रखने के लिए एक सख्त कदम उठाया है। बजट में घोषणा की गई है कि यदि कोई एनआरआई (NRI Property Tax)भारत में 1 करोड़ रुपये तक की कीमत वाली प्रॉपर्टी में लेन-देन करता है या उसे नियमों के विरुद्ध होल्ड करता है, तो उस पर भारी 'पैनल्टी' (Penalty) लगाई जाएगी।
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि अक्सर देखने में आता है कि एनआरआई छोटे और मझोले शहरों में 1 करोड़ तक की प्रॉपर्टी खरीद कर उसे निवेश के तौर पर छोड़ देते हैं। इससे स्थानीय निवासियों के लिए घरों की कीमतें बढ़ जाती हैं। नए नियमों के मुताबिक, अब 1 करोड़ रुपये तक की प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने पर एनआरआई को विशेष घोषणा पत्र देना होगा। यदि इसमें कोई भी अनियमितता पाई गई या प्रॉपर्टी को लंबे समय तक खाली छोड़ कर स्पेक्युलेशन (सट्टेबाजी) की गई, तो प्रॉपर्टी की कीमत का एक निश्चित हिस्सा जुर्माने के तौर पर वसूल किया जाएगा।
टैक्स नियमों में भी बदलाव सिर्फ पैनल्टी ही नहीं, बल्कि 1 करोड़ तक की प्रॉपर्टी बेचने पर एनआरआई के लिए टीडीएस (TDS) की दरों में भी बदलाव के संकेत दिए गए हैं। सरकार का मकसद साफ है कि एनआरआई लग्जरी सेगमेंट में निवेश करें, लेकिन किफायती और मिड-сеगमेंट हाउसिंग को भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध रहने दें। इस फैसले से टियर-2 और टियर-3 शहरों के रियल एस्टेट बाजार में बड़ी हलचल मचने की संभावना है।
जानकारों का मानना है कि इस फैसले के बाद रियल एस्टेट मार्केट में 1 करोड़ से नीचे के फ्लैट्स और मकानों की कीमतों में करेक्शन आ सकता है। एनआरआई निवेशक अब अपना पैसा कमर्शियल प्रॉपर्टी या 1 करोड़ से ऊपर की लग्जरी प्रॉपर्टी में शिफ्ट कर सकते हैं। वहीं, भारत में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवार, जो घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह खबर राहत भरी हो सकती है क्योंकि अब उन्हें एनआरआई निवेशकों से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ेगी।
वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि यह नियम 1 अप्रेल 2026 से प्रभावी होगा। ऐसे में, जिन एनआरआई के पास पहले से 1 करोड़ तक की संपत्तियां हैं, उन्हें भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक समय सीमा दी जा सकती है। यह कदम रियल एस्टेट में काले धन के प्रवाह को रोकने में भी मददगार साबित होगा।
प्रॉपर्टी सलाहकारों का कहना है कि यह फैसला 'दोगुनी तलवार' जैसा है। रियल एस्टेट फेडरेशन के मुताबिक, "इससे शॉर्ट टर्म में मार्केट में मंदी आ सकती है क्योंकि एनआरआई खरीदारों का एक बड़ा हिस्सा 50 लाख से 1 करोड़ के बीच निवेश करता है। हालांकि, लंबी अवधि में यह वास्तविक खरीदारों (End Users) के लिए फायदेमंद होगा।" वहीं, एनआरआई संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है और इसे भेदभावपूर्ण बताया है।
बजट घोषणा के बाद अब सबकी नजरें केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नोटिफिकेशन पर टिकी हैं। अगले कुछ दिनों में सरकार इस 'पैनल्टी' के स्लैब और नियमों की विस्तृत जानकारी जारी करेगी। यह भी देखा जाएगा कि क्या एनआरआई को अपनी पुश्तैनी जायदाद बेचने पर भी इस दायरे में रखा जाएगा या उन्हें कुछ छूट मिलेगी।
बहरहाल,जहां 1 करोड़ तक की प्रॉपर्टी पर सख्ती हुई है, वहीं इसका सीधा फायदा लग्जरी रियल एस्टेट को मिल सकता है। एनआरआई अब छोटे निवेश के बजाय बड़े टिकट साइज वाले विला और पेंटहाउस की तरफ रुख करेंगे, जिससे मेट्रो शहरों में लग्जरी घरों की मांग बढ़ने के आसार हैं।
Updated on:
01 Feb 2026 12:50 pm
Published on:
01 Feb 2026 12:49 pm
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