
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फोटो: ANI)
Strategy: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP Internal Purge 2026) के अंदर इन दिनों एक बड़ा और रहस्यमयी 'शुद्धीकरण' (Xi Jinping Political Purge) अभियान चल रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने विरोधियों और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे शीर्ष अधिकारियों को एक-एक कर रास्ते से हटा रहे हैं। हालांकि चीन इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग कह रहा है, लेकिन वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि यह सत्ता को पूरी तरह केंद्रित करने की एक कोशिश है। भारत के लिए चीन की यह आंतरिक उठापटक (China India Border Dispute) केवल एक पड़ोसी देश का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हमारी सीमाओं और अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ मामला है।
हाल के महीनों में चीन के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और रॉकेट फोर्स के शीर्ष जनरलों का गायब होना या उन्हें पद से हटाया जाना एक बड़े संकट की ओर इशारा कर रहा है। जिनपिंग का यह अभियान अब सेना (PLA) के अंदर गहराई तक पहुंच गया है। इसका उद्देश्य उन अधिकारियों को बाहर करना है, जो जिनपिंग की 'आक्रामक विस्तारवादी' नीति पर सवाल उठा सकते हैं या जिनका झुकाव पश्चिमी देशों की ओर है।
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव पिछले कई सालों से बना हुआ है। चीन की सेना में चल रही इस उथल-पुथल का भारत पर सीधा असर पड़ता है:
सीमा पर आक्रामकता: जब भी कोई तानाशाह घरेलू स्तर पर असुरक्षित महसूस करता है, वह अक्सर राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए सीमाओं पर तनाव पैदा करता है। भारत को सावधान रहना होगा कि जिनपिंग अपनी घरेलू कमियों को छिपाने के लिए LAC पर कोई नया दुस्साहस न करें।
नेतृत्व में बदलाव: चीन की 'रॉकेट फोर्स' और 'वेस्टर्न थिएटर कमांड' (जो भारत के साथ सीमा साझा करता है) में अधिकारियों का बदलना भारत की खुफिया एजेंसियों के लिए एक चुनौती है। नए कमांडरों की मानसिकता और युद्ध कौशल को समझना अब भारत के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।
चीन की इस आंतरिक अस्थिरता का असर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कई विदेशी कंपनियां अब चीन से अपना कारोबार समेटकर 'चीन प्लस वन' रणनीति के तहत भारत का रुख कर रही हैं।
सप्लाई चेन: चीन में राजनीतिक अस्थिरता के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो रही है। भारत के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वह खुद को एक स्थिर और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में पेश करे।
तकनीकी युद्ध: जिनपिंग का शुद्धिकरण अभियान तकनीक और चिप निर्माण क्षेत्र तक भी फैल गया है। भारत अपनी 'सेमीकंडक्टर नीति' के जरिए उन निवेशकों को आकर्षित कर सकता है जो चीन के सख्त नियमों से परेशान हैं।
भारतीय रक्षा विशेषज्ञ: "चीन की आंतरिक उठापटक को हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक अस्थिर चीन भारत के लिए और भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।"
राजनयिक विश्लेषक: "शी जिनपिंग अब किसी भी प्रकार के असंतोष को बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में चीन की विदेश नीति और भी अधिक कठोर और अप्रत्याशित होगी।"
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 के मध्य तक चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की एक बड़ी बैठक होनी है, जिसमें जिनपिंग अपनी टीम को पूरी तरह से 'वफादारों' से भर देंगे। भारत अपनी सीमा सुरक्षा (Border Infrastructure) को और मजबूत कर रहा है और चीन पर अपनी आयात निर्भरता कम करने के लिए कड़े कदम उठा रहा है।
बहरहाल,इस शुद्धीकरण का एक मानवीय पहलू भी है। चीन के कई बुद्धिजीवी और व्यवसायी अब देश छोड़कर भाग रहे हैं या चुप करा दिए गए हैं। यह दिखाता है कि चीन के भीतर लोकतंत्र की मांग तो दूर, अब पार्टी के भीतर भी बोलने की आजादी खत्म हो गई है।
Published on:
20 Jan 2026 08:43 pm
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