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‘हर इंच वापिस लेंगे…’, CM सरमा का बड़ा एक्शन, 912 एकड़ जमीन पर चला बुलडोजर, दहशत में अवैध कब्जाधारी

912 Acres Land Freed: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बुलडोजर पिछले दो दिन से तांडव मचा रहा है। बेदखली अभियान में 912 एकड़ जमीन मुक्त करा ली गई है। सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा… नीचे पढ़ें पूरी खबर।

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भारत

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Saurabh Mall

Feb 04, 2026

Major action CM Sarma's bulldozer runs

CM सरमा के बुलडोजर ने मचाया हड़कंप, 912 एकड़ जमीन मुक्त (इमेज सोर्स: ANI)

Himanta Biswa Sarma: असम में पिछले दो दिनों से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (CM Himanta Biswa Sarma) का बुलडोजर लगातार सुर्खियों में है। हैलाकांडी जिले में सरकार ने ‘बेदखली अभियान’ (Assam Anti-Encroachment Campaign) चलाते हुए 912 एकड़ कब्जाई गई जमीन वापस ले ली। ये इलाका IIT गुवाहाटी के पूरे कैंपस से भी बड़ा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर खुद CM सरमा ने इस कार्रवाई को ‘हर इंच वापस लेने’ का संकल्प दोहराते हुए पोस्ट किया, जिसके बाद अवैध कब्जाधारियों में दहशत फैल गई है।

असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा का पोस्ट आया सामने

सोशल मीडिया X पर अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि जमीन वापस लेना सरकार के उस वादे को पूरा करना है कि हम अपनी जमीन का हर इंच कब्जे से छुड़ाएंगे। उन्होंने बताया कि सोमवार से लगातार बुलडोजर कार्रवाई जारी है। सरमा ने आगे लिखा, “यह हमारे जिंदा रहने का सवाल है, और हम जीतेंगे।”

बता दें हैलाकांडी में बेदखली अभियान जंगल, सरकारी और रिजर्व जमीन को कथित अवैध बसने वालों से खाली कराने की राज्य की एक बड़ी पहल का हिस्सा है, सरमा ने कहा कि यह अभियान असम के इकोलॉजिकल बैलेंस और मूल निवासी पहचान की रक्षा के लिए बहुत जरूरी है।

असम में अवैध कब्जों को हटाने की कोशिशों में जुटे हैं CM सरमा

एक आधिकारिक अपडेट में बताया गया है कि जिस 912 एकड़ जमीन को खाली कराया गया है, उसमें जंगल और सरकारी जमीन भी शामिल है। इस पर कई सालों से कब्ज़ा था।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जो 2021 से पूरे असम में अवैध कब्जों को हटाने की कोशिशों का नेतृत्व कर रहे हैं, उनका कहना है कि बाहरी लोगों के गैर-कानूनी कब्ज़ों को रोकना और राज्य में होने वाले जनसंख्या बदलाव को थामना बेहद जरूरी है।

सरमा ने कई बार कहा है कि बिना रोक-टोक के कब्ज़ों की वजह से आबादी का संतुलन बदल रहा है और इससे असम के मूल समुदायों के अधिकारों पर खतरा पैदा हो रहा है। पिछले साल भी उन्होंने बताया था कि इस तरह की बेदखली मुहिमों से राज्य में हजारों एकड़ जमीन वापस मिली है, जो न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर कब्जाधारी राजनीतिक रूप से मजबूत हो जाते हैं तो बाद में उन्हें हटाना बहुत मुश्किल हो जाता है, जिससे राज्य के मूल निवासियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

हैलाकांडी में इस बेदखली अभियान से सैकड़ों परिवार प्रभावित होने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि प्रभावित लोगों को सरकारी नियमों के अनुसार पुनर्वास का विकल्प दिया जाएगा। वहीं, विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी संगठनों ने बेघर हुए लोगों के लिए मानवीय तरीके अपनाने और उचित प्रक्रिया का पालन करने की अपील की है।