
बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी
दुनिया में लगातार बढ़ रहे डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल्स के बढ़ते प्रयोग के चलते बिजली की मांग में अप्रत्याशित तेजी आ रही है। एक अनुमान के अनुसार अगले पांच साल में दुनिया में बिजली की मांग 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी जो पिछले दशक के औसत से पचास प्रतिशत ज्यादा है। वहीं बिजली का उपयोग कुल ऊर्जा मांग की तुलना में कम से कम ढाई गुना तेजी से बढ़ेगा। भारत की बिजली की मांग 2030 तक 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो विश्व भर में सबसे ज्यादा है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) की सालाना रिपोर्ट इलेक्ट्रिसिटी 2026 के अनुसार वैश्विक बिजली मांग में हर साल लगभग 1,100 टेरावाट-घंटे (टीडब्ल्यूएच) की बढ़ोतरी होगी और 2030 तक दुनिया में बिजली की खपत 33,600 टीडब्ल्यूएच पहुंच सकती है। गौरतलब है कि यह 2025 में 28,200 टीडब्ल्यूएच थी। सबसे ज्यादा चीन में 2030 तक लगभग 2,600 टीडब्ल्यूएच बिजली की मांग का अनुमान है।
एडवांस्ड इकोनॉमी में बिजली की डिमांड लगभग 15 साल की स्थिरता के बाद फिर से बढ़ रही है, जिसका कारण डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, हीट पंप और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में वैश्विक बिजली मांग बढ़ोतरी में एडवांस्ड इकोनॉमी का हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत था और इसके आगे भी इतना ही बने रहने की उम्मीद है।
कूलिंग, इंडस्ट्री और एग्रीकल्चर और परिवहन के साधनों के इलेक्ट्रिफिकेशन के कारण भारत की मांग 2030 तक सालाना औसतन 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो दुनिया भर में सबसे तेज है। गौरतलब है कि लगातार चार सालों तक छह प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के बाद 2025 में भारत की बिजली की मांग में बढ़ोतरी तुलनात्मक रूप से कम रही थी।
जिसका मुख्य कारण शुरुआती मानसून के बाद तापमान में नरमी थी, जिससे एयर-कंडीशनिंग का इस्तेमाल और एग्रीकल्चर पंपिंग कम हो गई। पर अगले पांच सालों में भारत की सालाना बिजली की खपत में 570 टीडब्ल्यूएच से ज्यादा की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसमें उद्योगों का हिस्सा एक तिहाई रहेगा। बढ़ी हुई कुल मांग में एयर कंडीशनिंग का योगदान 20 प्रतिशत से ज्यादा हो सकता है। कृषि और परिवहन का इलेक्ट्रिफिकेशन भी प्रमुख कारण रहेगा। गौरतलब है कि भारत में 2017 से राष्ट्रीय पीक डिमांड में 54 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो 2024 में लगभग 250 गीगावाट तक पहुंच गई है।
क्षेत्र सालाना बढ़ोतरी दर
चीन 4.9 प्रतिशत
भारत 6.4 प्रतिशत
दक्षिण पूर्वी एशिया 5.3 प्रतिशत
संयुक्त राज्य अमेरिका 2 प्रतिशत
यूरोपीय संघ 2.3 प्रतिशत
Published on:
09 Feb 2026 06:40 am
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