AI-generated Summary, Reviewed by Patrika
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Ladli Behna Yojana : मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना (MP Government Schemes)आज देशभर में महिलाओं के सशक्त होने की सबसे बड़ी मिसाल बन गई है। अब सवाल यह पैदा होता है कि आखिर इस योजना में ऐसा क्या है। जवाब, यह योजना न सिर्फ महिलाओं को हर महीने सीधी आर्थिक मदद देती है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। शुरू में 1000 रुपये से शुरू हुई यह राशि अब बढ़ कर 1500 रुपये हो गई है। दिसंबर 2025 में 31वीं किस्त (Ladli Behna Yojana 31st Installment) के रूप में 1.26 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के खातों में (Women Cash Transfer Schemes India) यह राशि पहुंच चुकी है। लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana )की सफलता देख कर अब कई अन्य राज्य भी ऐसी ही स्कीम चला रहे हैं। आइए जानते हैं कि यह योजना क्या है और क्यों यह दूसरे राज्यों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है।
यह योजना मार्च 2023 में शुरू हुई थी और जून 2023 से पहली किस्त महिलाओं के खातों में पहुंची। इसका मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे अपने स्वास्थ्य, पोषण और परिवार की जरूरतों पर खुद खर्च कर सकें। हर महीने 1500 रुपये सीधे बैंक खाते में आने से महिलाएं छोटी-मोटी जरूरतें पूरी कर पाती हैं। इससे न सिर्फ घर की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है, बल्कि महिलाओं की परिवार में आवाज भी मजबूत होती है। अब तक सरकार ने 45 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा इस योजना पर खर्च किए हैं, जो इसकी लोकप्रियता दिखाता है।
यह मदद 21 से 60 साल की महिलाओं को मिलती है, जो मध्य प्रदेश की रहने वाली हों। परिवार की सालाना कमाई 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। सरकारी नौकरी वाली, आयकर देने वाली या महंगी गाड़ी वाली महिलाएं इसमें शामिल नहीं हो सकतीं। अभी 1.26 करोड़ महिलाएं इसका फायदा उठा रही हैं। राशि डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर से खाते में पहुंचती है, इसलिए कोई दलाली या देरी नहीं होती। यह पैसा महिलाओं की अपनी मर्जी से खर्च होता है, जो उनकी स्वतंत्रता बढ़ाता है।
इस योजना ने महिलाओं में खुशी की लहर दौड़ा दी है। कई बहनें कहती हैं कि अब वे अपनी छोटी जरूरतें खुद पूरी कर लेती हैं, जैसे बच्चों की किताबें या घर का सामान। राजनीतिक रूप से भी यह बहुत लोकप्रिय हुई। 2023 के चुनाव में यह बीजेपी के लिए बड़ा हथियार बनी। महिलाएं इसे अपना हक मानती हैं और सरकार की तारीफ करती हैं। समाज में भी लोग कहते हैं कि इससे परिवार मजबूत हो रहे हैं और महिलाओं का सम्मान बढ़ा है।
यह योजना महिलाओं के लिए वरदान है। क्योंकि भारत में महिलाओं की नौकरी दर कम है। इससे पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य बेहतर होता है। गरीबी और लिंग भेद कम करने में मदद मिलती है। लेकिन दूसरी तरफ राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कुछ राज्यों में कर्ज बढ़ा है और बजट पर दबाव पड़ा है। फिर भी, विशेषज्ञ कहते हैं कि लंबे समय में यह योजना समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगी।
लाभ केवल 21 से 60 वर्ष (कुछ स्रोतों में 23 से 60) की महिलाओं को मिलता है, जो मध्य प्रदेश की स्थायी निवासी हों। परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। आयकर दाता, सरकारी कर्मचारी या चार पहिया वाहन वाले परिवार की महिलाएं अपात्र हैं। वर्तमान में 1.26 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना की लाभार्थी हैं।
लाड़ली बहना योजना अन्य राज्यों के लिए लाभदायक हो सकती है, क्योंकि भारत में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर कम है (ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों की तुलना में काफी कम)। यह योजना महिलाओं को सीधे नकद सहायता देकर आर्थिक स्वतंत्रता देती है, जिससे उनका स्वास्थ्य, पोषण और बच्चों की शिक्षा में सुधार होता है। इससे परिवार में महिलाओं की भूमिका मजबूत होती है और वे निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनती हैं। एमपी में इस योजना ने महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा बढ़ाई और राजनीतिक रूप से भी लोकप्रियता हासिल की। अन्य राज्यों में गरीबी, लिंग असमानता और कम आय वाली महिलाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ऐसी योजना सामाजिक-आर्थिक विकास को गति दे सकती है। साथ ही, यह योजना राज्यों के लिए वोट बैंक मजबूत करने का माध्यम भी बन सकती है, जैसा कि एमपी और अन्य राज्यों में देखा गया।
वर्तमान में (2025 तक) 12 से 15 राज्यों में लाड़ली बहना जैसी महिलाओं को मासिक नकद हस्तांतरण योजनाएं चल रही हैं। इन पर कुल खर्च 1.68 से 2.46 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है। प्रमुख योजनाएं:
महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना – 21-65 वर्ष की महिलाओं को 1500 रुपये मासिक।
कर्नाटक: गृह लक्ष्मी योजना – परिवार की मुखिया महिलाओं को 2000 रुपये मासिक।
झारखंड: मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना – 2500 रुपये तक मासिक (सबसे अधिक राशि)।
पश्चिम बंगाल: लक्ष्मी भंडार योजना – 500-1000 रुपये मासिक।
तमिलनाडु: कलाइग्नर मगलिर उरिमाई थोगाई – 1000 रुपये मासिक।
ओडिशा: सुभद्रा योजना – वार्षिक 10,000 रुपये (दो किस्तों में)।
छत्तीसगढ़: महतारी वंदन योजना – 1000 रुपये मासिक।
हिमाचल प्रदेश: इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि – विभिन्न लाभ।
तेलंगाना: महालक्ष्मी योजना – विभिन्न राशि।
असम: ओरुनोदोई योजना – 1250 रुपये।
अन्य में दिल्ली, हरियाणा आदि में भी समान पहल।
आर्थिक प्रभाव: भारत में महिलाओं की नौकरी दर कम है। ये स्कीम्स घरेलू काम की मान्यता देती हैं और छोटी बचत या जरूरतें पूरी करने में मदद करती हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है।
सामाजिक बदलाव: महिलाएं अब निर्णय लेने में सक्रिय हैं। लिंग समानता बढ़ी और गरीबी कम हुई।
राजनीतिक सफलता: एमपी और महाराष्ट्र में इन योजनाओं ने चुनावी जीत दिलाई। महिलाएं वोटर के रूप में मजबूत हुईं, इसलिए सभी पार्टियां ऐसी स्कीम्स ला रही हैं।
ये योजनाएं लाड़ली बहना से प्रेरित हैं और महिलाओं के सशक्तीकरण पर फोकस करती हैं। कई राज्यों में ये चुनावी वादों का हिस्सा बनीं और सफल रहीं। हालांकि, इनसे राज्यों पर वित्तीय बोझ भी बढ़ा है, जिससे कुछ में राजस्व घाटा हुआ।
बहरहाल, लाड़ली बहना जैसी योजनाएं साबित कर रही हैं कि महिलाओं को सीधे मदद देना कितना जरूरी है। यह न सिर्फ आर्थिक आजादी देती है, बल्कि समाज को बदल रही है। अगर सभी राज्य इसे अपनाएं तो भारत की महिलाओं को बहुत लाभ होगा।
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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Updated on:
31 Dec 2025 09:42 pm
Published on:
31 Dec 2025 09:41 pm


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