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डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई महिला, 15 मिनट में मिला 50 लाख का लोन, अब हाईकोर्ट ने लिया बड़ा ऐक्शन

Karnataka High Court: एक 32 वर्षीय महिला को सितंबर 2024 में 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले का शिकार बनाया गया, जिसमें धोखेबाजों ने उसे 50 लाख रुपये का लोन लेने के लिए मजबूर किया। कर्नाटक हाई कोर्ट ने बैंक द्वारा उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले पर रोक लगा दी है और बैंक की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।

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Karnataka High Court

कर्नाटक हाई कोर्ट

Digital Arrest Victim Loan Stay Karnataka High Court: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले की शिकार महिला के खिलाफ आईसीआईसीआई बैंक द्वारा शुरू किए गए आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह लोन 50 लाख रुपये का था, जो मात्र 15 मिनट में बिना किसी दस्तावेज या सत्यापन के महिला के खाते में क्रेडिट कर दिया गया था। कोर्ट ने बैंक से सवाल किया कि इतनी बड़ी राशि बिना किसी जांच के कैसे जारी की गई।

2024 का है मामला

घटना 17 सितंबर 2024 की है। महिला को फेडएक्स के एक कर्मचारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति का कॉल आया, जिसमें कहा गया कि उनके आधार नंबर का इस्तेमाल ड्रग्स खरीदने में हुआ है। फिर कॉल मुंबई पुलिस से जुड़े व्यक्ति को ट्रांसफर की गई, जिसने बताया कि उनके आधार कार्ड से कई फ्रॉड मामलों में जुड़ा है और बैंक खाते फ्रॉड से लिंक हैं।

महिला को ऑनलाइन इंस्टेंट लोन के लिए किया मजबूर

कॉल आगे बढ़ते हुए डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) होने का दावा करने वाले व्यक्ति तक पहुंची, जिसने कहा कि उनके फंड्स से एके-47 जैसी चीजें खरीदी गई हैं। फिर कॉल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के एक अधिकारी को ट्रांसफर हुई, जिसने कहा कि नाम क्लियर कराने के लिए कुछ फंड ट्रांसफर करने होंगे। धोखेबाजों ने महिला के स्काइप अकाउंट में लॉग इन किया और उन्हें ऑनलाइन इंस्टेंट लोन लेने के लिए मजबूर किया।

बिना दस्तावेज या वेरिफिकेशन के 15 मिनट में 50 लाख का लोन

आईसीआईसीआई बैंक ने प्री-अप्रूव्ड लोन के तहत 50 लाख रुपये 15 मिनट में क्रेडिट कर दिए, बिना किसी दस्तावेज या वेरिफिकेशन के। धोखेबाजों ने महिला से तीन पेयी जोड़वाए और पूरी राशि ट्रांसफर करवा दी, यह आश्वासन देकर कि उसी दिन नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) मिल जाएगा और सभी केस क्लियर हो जाएंगे। महिला लगभग 10 घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रही।

पुलिस ने 10 लाख किए रिकवर

घोटाले के बाद महिला ने एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस जांच में 10 लाख रुपये म्यूल अकाउंट्स से रिकवर किए गए। फिर भी बैंक ने महिला के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की। महिला ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

कोर्ट ने कार्यवाही पर लगाई रोक

30 जनवरी को जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने आदेश दिया, पिटीशनर के खिलाफ आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक रहेगी, अगली सुनवाई तक। आईसीआईसीआई बैंक (रिस्पॉन्डेंट नंबर 1) इस ट्रांजेक्शन के आधार पर पिटीशनर के खिलाफ कोई कोर्सिव स्टेप नहीं उठाएगा। कोर्ट ने बैंक पर सवाल उठाया, बैंक ने 50 लाख रुपये बिना किसी दस्तावेज के कैसे ट्रांसफर कर दिए?

बैंक पर लगाए गंभीर आरोप

अतिरिक्त राज्य लोक अभियोजक बी एन जगदीश ने भी कहा कि इतनी बड़ी सार्वजनिक राशि बिना दस्तावेज के कैसे जारी की गई। याचिकाकर्ता के वकील सुरज संपथ ने तर्क दिया कि बैंक ने फ्रॉड, मिसरिप्रेजेंटेशन और कोर्शन से लोन लिया जाना माना, फिर भी कार्यवाही की। कोर्ट ने राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को तय की।