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Aheri Court Judge: महाराष्ट्र के माओवाद प्रभावित गढ़चिरोली जिले में आदिवासी समुदायों के लिए विशेष रूप से स्थापित अहेरी सत्र न्यायालय में दो बार न्यायाधीश की कमी के कारण न्याय व्यवस्था ठप हो गई। यह कोर्ट 2023 में तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जज भूषण आर गवई द्वारा उद्घाटित किया गया था, जिसका उद्देश्य आदिवासी बहुल तालुकाओं—अहेरी, मुलचेरा, सिरोंचा, भामरगढ़ और एतापल्ली—के 725 गांवों तक न्याय पहुंचाना था। गवई ने उद्घाटन पर कहा था, 'न्याय व्यवस्था आदिवासियों के द्वार पर पहुंच गई है।' लेकिन वास्तविकता अलग निकली।
जनवरी 2026 में 1 से 22 जनवरी तक 22 दिनों तक कोई न्यायाधीश नहीं था, जिससे ट्रायल, बैल सुनवाई और रूटीन कार्य रुक गए। इससे पहले 2025 में जुलाई तक लगभग तीन महीने तक कोर्ट खाली रहा। परिणामस्वरूप 200 से अधिक अंडरट्रायल मामले लंबित हो गए, कई आरोपी सालों से जेल में हैं। वकीलों को 120 किमी दूर गढ़चिरोली जाना पड़ता था। अंडरट्रायल कैदियों ने जेल से ही गढ़चिरोली कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट को पत्र लिखे।
यह मामला 21 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट की नजर में आया, जब भीमा-कोरेगांव मामले के सह-अभियुक्त सुरेंद्र गडलिंग की बैल याचिका पर सुनवाई हुई। गडलिंग पर 2016 में सुर्जागढ़ खदानों से आयरन ओर ले जा रहे 76 वाहनों को जलाने की साजिश का आरोप है। उनके वकील ने बताया कि ट्रायल शुरू नहीं हो सका क्योंकि कोर्ट में स्थायी जज और अभियोजक नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को 7 दिनों में सक्षम न्यायाधीश नियुक्त करने का निर्देश दिया। दो दिन बाद नियुक्ति हो गई।
अहेरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद मेंगनवार ने कहा, "2025 में तीन महीने खाली रहने पर हम नागपुर बेंच के प्रशासनिक अधिकारियों से मिले और रिक्ति भरने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से तुरंत हो गया।" कोर्ट रिकॉर्ड्स में दर्ज है कि नए जज ने 22 जुलाई 2025 को चार्ज संभाला और 200 से अधिक अंडरट्रायल मामलों तथा बैल एप्लीकेशनों को प्राथमिकता दी।
Updated on:
03 Feb 2026 07:53 pm
Published on:
03 Feb 2026 07:50 pm
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