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‘अगर भाजपा का सामना कोई कर सकता है, तो…’ ममता बनर्जी से मिलते ही ऐसा क्यों बोले अखिलेश? क्या कांग्रेस के लिए है बड़े संकेत!

Mamata Banerjee and Akhilesh Yadav Meeting: अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ मुकाबला सिर्फ ‘दीदी’ ही कर सकती हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस को भी संदेश देने की कोशिश की है।

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भारत

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Kuldeep Sharma

Jan 27, 2026

Mamata and Akhilesh Meeting

भाजपा का मुकाबला सिर्फ ममता ही कर सकती हैं (फोटो-एक्स)

Akhilesh Message to Congress: कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के हमलों का मजबूती से जवाब देश में सिर्फ ‘दीदी’ ही दे सकती हैं।

दोनों नेताओं की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि ममता बनर्जी ने भाजपा की नीतियों और दबावों का बहादुरी से सामना किया है। यह पूरे देश के लिए एक मिसाल है।

अखिलेश यादव ने यह भी साफ किया कि समाजवादी पार्टी लोकतंत्र की रक्षा के लिए ममता के साथ खड़ी है। वहीं, उन्होंने कांग्रेस को भी संकेत दिया कि भाजपा के सामने खड़े होने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों को साथ लेना जरूरी है।

‘दीदी’ ही BJP का जवाब दे सकती हैं

अखिलेश यादव ने कोलकाता के नबन्ना में स्थित सचिवालय भवन में ममता बनर्जी से मुलाकात की। यह करीब 40 मिनट तक चली। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा के राजनीतिक हमलों का मुकाबला करने की ताकत सिर्फ ममता बनर्जी में है।

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि ममता बनर्जी ने भाजपा की नीतियों और राजनीतिक दबावों का सामना बहुत ही हिम्मत और दृढ़ता से किया है। उन्होंने कहा, "सिर्फ दीदी ही हैं जो भाजपा के हर राजनीतिक हमले का मजबूती से जवाब दे सकती हैं।"

साथ ही, अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया और कहा कि वह देश के सेकुलरिज्म से खिलवाड़ कर रही है। इलेक्शन कमीशन इस काम में भाजपा का साथ दे रहा है।

SIR के नाम पर NRC लागू करने की कोशिश

अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर NRC लागू करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची संशोधन के दौरान करीब 2.89 करोड़ लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए। अखिलेश ने कहा कि मतदाता सूची के नाम पर लोगों को डराया जा रहा है उनके लोकतांत्रिक अधिकार कमजोर किए जा रहे है।

क्षेत्रीय दलों को तवज्जों देना जरूरी

अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की इस मुलाकात पर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात बढ़ती नजदीकियों और आगामी चुनावों से पहले संभावित गठबंधन की ओर इशारा हो सकता है।

हालांकि, इस बैठक में कोई औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई, लेकिन दोनों नेताओं के बयान से यह साफ है कि भाजपा के खिलाफ एक अलग मोर्चा बनाने के लिए नींव रखी जा रही है।

इसी बीच, अखिलेश ने कांग्रेस को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने यह इशारा किया है कि चुनावी राजनीति में आगे बढ़ने के लिए कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर चलना होगा।

साथ ही, अगले साल उत्तर प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में यह बयान कांग्रेस की भूमिका पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।