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क्या बंगाल में टूटने वाला है ममता बनर्जी का मुस्लिम वोट बैंक? TMC में मचा सियासी भूचाल

Mamata Banerjee Muslim Vote Bank: पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर सियासत तेज हो गई है। टीएमसी से अलग हुए नेता और संभावित गठबंधनों ने ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी है।

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Mamata Banerjee

ममता बनर्जी के सामने बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर नई चुनौती (Photo-X)

Humayun Kabir New Party: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में बड़ी हलचल दिख रही है। साथ ही, तृणमूल कांग्रेस के मजबूत वोट बैंक माने जाने वाले मुस्लिम समुदाय में गहरी बैचेनी है। टीएमसी से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर मुस्लिमों को एक करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही, उनका आरोप है कि ममता बनर्जी अब मुस्लिमों के साथ दिखाई नहीं देती हैं। अब उनका मुस्लिमों से मोहभंग हो चुका है।

ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक को तोड़ने के लिए हुमांयू कबीर की नई पार्टी 'जनता उन्नयन पार्टी', इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) और कुछ अन्य छोटे संगठनों ने संभावित गठबंधन के संकेत दिए हैं। जानकारों का मानना है कि इससे ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक के छटकने की संभावनाएं हैं। इसके अतिरिक्त, माना जा रहा है कि मतदाता सूची संशोधन, वक्फ कानून और OBC विवाद जैसे मुद्दों ने अल्पसंख्यक समुदाय को सोचने पर मजबूर कर दिया है और नए राजनीतिक विकल्पों को तलाशने की ओर आगे बढ़ा दिया है।

हुमायूं कबीर की नई राजनीतिक पार्टी

तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बाहर होने के बाद हुमायूं कबीर ने 'जनता उन्नयन पार्टी' (JUP) के नाम से अपनी नई राजनीतिक पार्टी बना ली है। साथ ही, उन्होंने ऐलान किया है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में करीब 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी।

हुमायूं कबीर का आरोप है कि टीएमसी अब अल्पसंख्यक हितैषी नहीं रही। वह लगातार मुसलमानों से एकजुट होने की अपील कर रहे हैं।

इसके अलावा, जेयूपी ने वाम मोर्चा और कांग्रेस को गठबंधन का प्रस्ताव भी भेजा है। उनका कहना है कि अगर कांग्रेस ने जल्द फैसला नहीं लिया तो मालदा जैसे इलाकों में उसके बिना ही आगे बढ़ा जाएगा।

मुस्लिम बहुल इलाकों में नई रणनीति

पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा में टीएमसी और भाजपा के अलावा एकमात्र मुस्लिम विधायक इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के नौशाद सिद्दीकी हैं। उन्होंने टीएमसी और भाजपा दोनों के खिलाफ गठबंधन बनाने का विचार रखा था।

आईएसएफ का संबंध फुरफुरा शरीफ दरगाह से माना जाता है, जिसका मुस्लिम समाज में खास असर है। सूत्रों के मुताबिक, आईएसएफ, जेयूपी और केरल स्थित सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) समेत कुछ अन्य छोटे संगठन गठबंधन को लेकर बातचीत कर रहे हैं।

इनका मकसद साफ है कि उन इलाकों में पकड़ मजबूत करना जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, जैसे मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर।

बाबरी मस्जिद विवाद और 'SIR' नई चुनौती

चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में बाबरी मस्जिद बनाने और उसकी चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को और भी ज्यादा गरमा दिया है।

यहां एक निर्धारित किए गए मस्जिद स्थान पर बाबरी मस्जिद से जुड़े बैनर, टी-शर्ट और पोस्टर दिखाई दे रहे हैं। साथ ही, टीएमसी से निकाले गए हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद बनवाने का ऐलान किया है।

दूसरी ओर, मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को लेकर ममता बनर्जी भाजपा पर आक्रमक है और वोटरों को बाहर करने का आरोप लगा रही हैं।

इन सभी घटनाक्रमों के चलते पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है और माना जा रहा है कि मुस्लिम वोट बैंक टीएमसी से छिटक सकता है।