
प्रशांत किशोर और जनसुराज के अन्य नेता (फ़ोटो- X@@MaithilAnup)
राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने याचिका दायर कर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों को अमान्य घोषित करने और नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की है।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर एक रिट याचिका में पार्टी ने तर्क दिया है कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने के दौरान और चुनाव के दौरान प्रति परिवार एक महिला को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 10,000 रुपये का वितरण करने से समान अवसर का माहौल खराब हुआ और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों को कमजोर किया गया।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत लगभग 25-35 लाख महिला मतदाताओं को लाभ दिया, जो सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा प्रलोभन, रिश्वतखोरी और भ्रष्ट आचरण के बराबर है।
वकील आदित्य सिंह के माध्यम से दायर याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को नए सिरे से जोड़ना और चुनाव अवधि के दौरान किए गए भुगतान अवैध, असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन हैं।
बड़े पैमाने पर मतदाताओं को लुभाने का आरोप लगाते हुए जन सुराज पार्टी ने सर्वोच्च न्यायालय से भारत निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत कार्रवाई करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।
याचिका में मतदान के दोनों चरणों के दौरान मतदान केंद्रों पर JEEVIKA कार्यक्रम के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 1.80 लाख महिला लाभार्थियों की तैनाती पर भी सवाल उठाया गया है, जिसे अवैध और अनुचित बताया गया है।
याचिका में मुफ्त योजनाओं और डीबीटी-आधारित कल्याणकारी योजनाओं पर व्यापक दिशानिर्देश बनाने और चुनाव की घोषणा से पहले ऐसी योजनाओं को लागू करने के लिए न्यूनतम समय अंतराल तय करने की भी प्रार्थना की गई है।
बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया था कि हजारों गरीब परिवारों को वोटों के बदले हर परिवार को 10,000 रुपये की रिश्वत दी गई, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और बीआर अंबेडकर द्वारा तय संवैधानिक भावना का उल्लंघन बताया था।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर पब्लिश कॉजलिस्ट के अनुसार, जन सुराज पार्टी की याचिका पर शुक्रवार को CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है।
खास बात यह है कि चुनाव में मुफ्त चीजें बांटने का बड़ा मुद्दा पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक पेंडिंग याचिका पर विचाराधीन है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक पार्टियों द्वारा लुभावने वादे राज्यों को जल्द ही दिवालियापन की ओर धकेल सकते हैं और इस मामले को तीन जजों की बेंच को भेज दिया है।
Published on:
05 Feb 2026 07:36 pm
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