
पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब पर हुआ हंगामा (Photo-IANS)
Modi Government Book Ban: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)” का जिक्र करने पर हंगामा मचा हुआ है। दरअसल, इस किताब में पूर्व सेना अध्यक्ष ने अपने सैन्य जीवन के अनुभवों को शेयर किया है। इसके अलावा 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव, पूर्वी लद्दाख में हुए मिलिट्री एक्शंस, सरकार और सेना के बीच डिसीजन मेकिंग प्रोसेस और रणनीतिक सोच का भी जिक्र किया है। मोदी सरकार ने इस किताब के पब्लिश होने पर रोक लगा दी।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकार ने सेना के अधिकारियों की किताब पर पब्लिश होने से बैन लगा दिया हो। इससे पहले भी कई सैन्य अधिकारियों की किताब पर बैन लगाया जा चुका है। इसके अलावा कई अधिकारियों ने अपनी रिटायरमेंट के बाद अपनी आपबीती बताने वाली किताबें प्रकाशित करने का जोखिम उठाया है और इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी है।
पूर्व जनरल वीके सिंह की 2007 में प्रकाशित किताब ‘इंडियाज एक्सटर्नल इंटेलिजेंस: सीक्रेट्स ऑफ रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ पर भी चर्चा तेज हो गई। पूर्व अधिकारी किताब प्रकाशित होने के 19 साल बाद भी ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मुकदमा चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक इस पर ट्रायल शुरू नहीं हुआ है।
2007 में पुस्तक प्रकाशित होने के तुरंत बाद, सीबीआई ने मेजर जनरल सिंह के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) के तहत मामला दर्ज किया, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद के विस्तार सहित 2004 तक प्रतिनियुक्ति पर चार साल सेवा की थी। गुरुग्राम स्थित उनके घर पर छापा मारा गया और उनका कंप्यूटर, पासपोर्ट और डायरी जब्त कर ली गईं। पिछले महीने, उनके द्वारा उन दस्तावेजों की प्रतियां प्राप्त करने की याचिका, जिनके आधार पर उन पर मुकदमा चलाया जा रहा था, सर्वोच्च न्यायालय पहुंची।
“Himalayan Blunder” किताब पर विवाद मुख्य रूप से 1962 के भारत-चीन युद्ध (Sino-Indian War) को लेकर है और इसमें लिखे तथ्यों, आलोचनाओं और आलोचना के तरीके को लेकर विवाद पैदा हुआ था। इस किताब को उस समय के भारतीय सेनानी ब्रिगेडियर J.P. डालवी (John Dalvi) ने लिखी है।
किताब में डालवी ने भारत के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की आलोचना की, खासकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, रक्षा मंत्री और सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की रणनीति को।
डालवी ने यह कहा कि भारत के नेतृत्व ने युद्ध के लिए अच्छी तैयारी नहीं की थी और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की योग्यता पर सवाल उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत फैसलों और रणनीति के कारण भारत को भारी नुकसान हुआ।
किताब को प्रकाशित होने के तुरंत बाद ही सरकार ने बैन (प्रतिबंध) कर दिया था। सरकार ने ऐसा इसलिए किया माना जाता है क्योंकि किताब में राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य निर्णयों की तीव्र आलोचना थी, जो उस समय के लिए बहुत संवेदनशील विषय था। बाद में यह प्रतिबंध हटाया गया था और किताब दोबारा उपलब्ध हुई थी।
Published on:
05 Feb 2026 09:12 am
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