
ममता बनर्जी (फोटो- एएनआई)
Supreme Court Ruling: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को बहाल रखते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (डीए) पाना उनका लोकतांत्रिक और कानूनी अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को वर्ष 2008 से 2019 तक का बकाया 100 फीसदी महंगाई भत्ता देना होगा।
जस्टिस संजय करण की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आदेश दिया कि कर्मचारियों को 25 फीसदी महंगाई भत्ते का भुगतान तुरंत किया जाए। शेष 75 फीसदी राशि के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति गठित है, जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ट जस्टिस इंदु मल्होत्रा करेंगी।
यह समिति राज्य सरकार से बातचीत कर तय करेगी कि शेष बकाया कितनी राशि और कितनी किश्तों में भुगतान किया जाएगा। बैठक 6 मार्च तक पूरी करनी होगी। अदालत ने निर्देश दिया कि शेष 75 फीसदी राशि की पहली किश्त 31 मार्च तक दी जाए और बाकी किश्तें तय तारीखों पर अदा की जाएं। गठित समिति 15 अप्रेल को सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेगी। इसमें यह जानकारी होगी कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों को भुगतान शुरू किया है या नहीं। इस फैसले का लाभ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी मिलेगा।
पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारी 2016 से महंगाई भत्ते के लिए आंदोलन कर रहे थे। उन्हें ट्रायल कोर्ट, कलकत्ता हाईकोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। गुरुवार को इस संघर्ष का निर्णायक अंत हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले कहा था कि महंगाई भत्ता सरकार की दया पर निर्भर है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है।
Published on:
06 Feb 2026 01:55 am
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