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New Notification on Vande Mataram: वंदे मातरम् पर सरकारी निर्देश से गदगद विश्व हिंदू परिषद, डायटिशियन बोलीं- मानसिक तौर पर भी बनेंगे मजबूत

वंदे मातरम् पर मोदी सरकार के नए निर्देश से देश में नई लहर उठ रही है, हिंदूवादी संगठन इसे एक तरह से नए भारत के उदय के तौर पर देख रहे हैं...

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Views on Vande Mataram

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बुधवार सुबह मोदी सरकार की ओर से वंदे मातरम् पर आए नए निर्देश के बाद से ही आज देशभर में ये चर्चा का मुद्दा बन गया है। नए निर्देश के अनुसार अब सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 6 छंदों का गाना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए तीन मिनट दस सेकंड का समय भी सरकार की ओर से निर्धारित किया गया है।

ये गीत नहीं, क्रांतिकारी मंत्र है

सरकार के इस निर्णय के बाद देश के बड़े संगठन विश्व हिंदू परिषद गदगद है। वीएचपी के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए पत्रिका डॉट कॉम से कहा कि ये गीत नहीं, क्रांतिमंत्र है, जिसने देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों को बहुत प्रोत्साहित किया था। हमारे कई शहीद इसे गुनगुनाते हुए ही देश पर जान न्यौछावर कर फांसी पर चढ़े थे। ये गीत हिंदू, मुस्लिम समेत सभी के लिए है पर 1908 में अंग्रेजों ने साजिश रचकर इसे लेकर हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच मनमुटाव डाला था। गुलामी की मानसिकता को हटाने ये वंदे मातरम् की अहम भूमिका रही है। आज राष्ट्रनिर्माण के बेला में ये गीत प्रेरणास्रोत बन भारत के सामर्थ्य में वृद्धि करेगा।

आने वाली पीढ़ी के लिए अहम है ये फैसला

इस विषय पर वीएचपी के क्षेत्रीय संगठन मत्री (उत्तर) नीरज दौनेरिया कहते हैं कि निर्णय हर भारतीय को गौरान्वित महसूस कराने वाला है। वंदे मातरम् के जरिए भारत अब अपनी आने वाली पीढ़ी में नया जोश भर देश को विकसित बनाने की ओर अग्रसरित रहेगा। वंदे मातरम् वास्तव में स्वतंत्रता आंदोलन का वह मंत्र है, जिसने उस दौर के भारत में बहुत ही सकारात्मकता भरी थी।

सम्पूर्ण देश इसे पूरे मनोयोग से सस्वर गाएगा

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल कहते हैं कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रगीत वन्देमातरम् के गायन को अनिवार्य किए जाने का निर्णय एक सराहनीय व स्वागत योग्य कदम है। यह गीत ही है जिसने सम्पूर्ण देश को एकाकार कर स्वाधीनता व राष्ट्र रक्षार्थ सर्वस्व न्यौछावर करने वाले राष्ट्रभक्तों की एक विशाल जीवनदायिनी शक्ति निर्मित की।
हालांकि यह देश का दुर्भाग्य ही है कि इस गीत को लेकर पूर्व की तरह विभाजनकारी सोच कुछ मजहबी लोगों के मन मस्तिष्क में आज भी जिन्दा है और सरकार को इसे अनिवार्य करना पड़ा। खैर! राष्ट्र प्रेरणा और वंदना के महामंत्र राष्ट्र गीत वन्देमातरम् की 150वीं वर्षगांठ से ही सही, अब सम्पूर्ण देश इसे पूरे मनोयोग से सस्वर गाएगा। साधुवाद सरकार।

मानसिक तौर पर मजबून बनाता है वंदे मातरम्

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी डायटिशियन डॉ. रेणुका डंग वंदे मातरम् के नए निर्देश को कुछ इस तरह से परिभाषित करती है। वे कहती हैं कि तीन मिनट दस सेकेंड का जो समय सरकार ने इसके लिए निर्धारित किया है वो आम भारतीय की न सिर्फ फिटनेस सुधारेगा, साथ ही उसे मानसिक तौर पर मजबूत भी करेगा। उनका मानना है कि जब आप पूरी एकाग्रता के साथ इसका उच्चारण करेंगे तो ये आपके अंदर नई स्फूर्ति का संचार करेगा। इसके शब्द अपने देश के प्रति भावना भरेंगे, जिसका असर आपके मन-मस्तिष्क पर पॉजिटिव रूप में पड़ेगा।