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क्यों था बजट का समय शाम 5 बजे? क्या था लंदन कनेक्शन? बजट से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को लगातार नौंवी बार आम बजट पेश करेंगी। एक समय में बजट शाम के पांच बजे पेश किया जाता था। 1999 में तत्कालीन वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट का समय शाम 5 बजे की जगह सुबह 11 बजे किया। पढ़ें बजट से जुड़े दिलचस्प किस्से...

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Budget 2026

देश के आम बजट में क्या खास। (प्रतीकात्मक फोटो: AI)

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को लगातार नौंवी बार आम बजट पेश करेंगी। बजट भले ही अर्थव्यवस्था और देश के समग्र विकास का खाका होता है, लेकिन इसका इतिहास और परंपराएं हमेशा चर्चा में रही हैं। समय के साथ इसके स्वरूप में काफी बदलाव आए। पहले जहां बजट को कृषि और वस्तु और सेवाओं के सस्ती और महंगी होने के रूप में ही देखा जाता था, लेकिन डिजिटल युग में अब बजट मेें इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, शिक्षा-चिकित्सा और कृषि उत्पादों के साथ-साथ मेगाबाइट्स की रफ्तार और एआइ जैसे विषय भी जुड़ गए हैं। इसके साथ ही कई रोचक बदलाव भी बजट का हिस्सा बनें।

बजट से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य और बदलाव

✩1999 में तत्कालीन वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट का समय शाम 5 बजे की जगह सुबह 11 बजे किया। 5 बजे अंग्रेजों के जमाने से था, ताकि लंदन के समय के साथ तालमेल बन सके।

✩2017 से पहले बजट फरवरी के आखिरी दिन पेश होता था, लेकिन नई योजनाओं के लागू होने में परेशानी के कारण अरुण जेटली ने इसे एक फरवरी कर दिया।

✩2017 में ही पहली बार रेल बजट को आम बजट में विलय कर दिया गया। इससे पहले रेल बजट अलग से पेश होता था।

✩सबसे ज्यादा 10 बार बजट पेश करने का रेकॉर्ड मोरारजी देसाई के नाम है। इनमें 8 पूर्ण और 2 अंतरिम बजट थे।

✩समय के हिसाब से सबसे लंबा भाषण (2 घंटे 42 मिनट) 2020 में निर्मला सीतारमण ने पेश किया।

✩शब्दों के लिहाज से सबसे लंबा भाषण (18,650 शब्द) डॉ. मनमोहन सिंह ने 1991 में पेश किया।

✩सबसे छोटा भाषण (800 शब्द) हीरूभाई एम. पटेल ने 1977 में पेश किया।

✩बजट अब पूरी तरह पेपरलेस हो चुका है, और सभी दस्तावेज आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जाते हैं।

✩नॉर्थ ब्लॉक में बजट छपाई की सदियों पुरानी प्रक्रिया अब सीमित हो चुकी है, क्योंकि ज्यादातर वितरण डिजिटल माध्यम से होता है।

✩बजट से पहले राष्ट्रपति से मुलाकात और दही-चीनी की रस्म आज भी निभाई जाती है, लेकिन इसका दस्तावेजीकरण डिजिटल हो चुका है।

✩बजट दस्तावेज अब संसद में रखने के साथ-साथ तुरंत ऑनलाइन सार्वजनिक कर दिए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता बढें।

कागजी दस्तावेज की जगह टैबलेट

2021 में सीतारमण ने पारंपरिक कागजी दस्तावेजों की जगह घरेलू निर्मित डिजिटल टैबलेट का उपयोग शुरू किया, जो लाल कपड़े के बही-खाता शैली के थैले में रखा जाता है। इस टैबलेट पर सुनहरे राष्ट्रीय प्रतीक के साथ लाल कपड़े का आवरण है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' की पहल को दर्शाता है।