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CM राइज स्कूल में टूटा मासूम का पैर, नहीं मिली एंबुलेंस; बाइक पर ले जाना पड़ा अस्पताल

MP News: मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जावद में स्थित सीएम राइज स्कूल में पांच वर्षीय मासूम छात्र के साथ हुई घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैँ।

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नीमच

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Himanshu Singh

Feb 09, 2026

MP News: मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'सीएम राइज स्कूल' के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। नीमच जिले के जावद स्थित सीएम राइज स्कूल में केजी-2 के एक 5 वर्षीय मासूम छात्र के साथ हुई दुर्घटना ने स्कूल प्रबंधन की संवेदनशीलता और वहां की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम खोर निवासी राहुल नायक का 5 वर्षीय पुत्र विनायक, जो जावद के सीएम राइज स्कूल में केजी-2 का छात्र है, स्कूल में दुर्घटना का शिकार हो गया। बताया जा रहा है कि स्कूल के क्लास रूम में रखी एक भारी प्लाई अचानक बच्चे के पैर पर गिर गई, जिससे उसका पैर बुरी तरह फैक्चर हो गया।

तड़पता रहा बच्चा, नहीं मिली एंबुलेंस

घटना के बाद मासूम विनायक दर्द से तड़पता रहा, लेकिन स्कूल प्रशासन ने उसे प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई। बच्चे के पिता राहुल नायक ने बताया कि वे काम के सिलसिले में बाहर थे। जब उन्हें सूचना मिली, तो उन्होंने अन्य परिजनों को स्कूल भेजा।

स्कूल में एंबुलेंस की कोई व्यवस्था नहीं थी। अंततः, बच्चे की हालत बिगड़ते देख परिजन उसे मोटरसाइकिल के बीच में बिठाकर दर्द से कराहती हालत में नीमच अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि की है कि बच्चे का पैर टूट गया है।

प्रबंधन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया

इस पूरी घटना पर स्कूल प्रबंधन का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। स्कूल में वर्तमान में कोई स्थाई प्राचार्य नहीं है, सारा कार्यभार प्रभारियों के भरोसे चल रहा है।

प्राथमिक स्कूल के प्रभारी प्राचार्य गोपाल चंदेल का कहना है कि, "मेरी बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगी थी। यह घटना क्लास टाइम में नहीं बल्कि लंच (रेस्ट) के समय हुई थी।" वहीं स्कूल के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वे "बेटे की शादी में व्यस्त हैं" और इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दे सकते।

अभिभावकों में आक्रोश

इस घटना के बाद अन्य छात्रों के अभिभावकों में भी भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि सीएम राइज जैसे प्रतिष्ठित स्कूलों में सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा (एम्बुलेंस) की सुविधा नहीं है, तो बच्चों का भविष्य कितना सुरक्षित है?