
Delhi: नोएडा में गड्ढे में गिरने से हुई इंजीनियर की मौत का मामला अभी ठीक से ठंडा भी नहीं पड़ा था कि दिल्ली में ऐसी ही एक और दर्दनाक घटना सामने आ गई। दरअसल, 25 साल का युवक रात में अपने घर लौट रहा था, तभी उसकी बाइक दिल्ली जल बोर्ड के करीब 4.5 मीटर गहरे गड्ढे में जा गिरी। बताया जा रहा है कि वह करीब आठ घंटे तक गड्ढे में पड़ा रहा और जीने की उम्मीद लिए राहगीरों से मदद की गुहार लगाता रहा। हैरानी की बात यह है कि उसके गड्ढे में गिरने की जानकारी कम से कम पांच लोगों को थी, लेकिन किसी ने भी उसकी मदद नहीं की। इतना ही नहीं, जिस गड्ढे में कमल ध्यानी की जान गई, वह सिर्फ सड़क में नहीं था, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही में भी उतना ही गहरा था। संबंधित विभागों ने मानो आंखों पर पट्टी बांध रखी थी न कोई चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग और न ही निगरानी। हादसे के बाद भी संवेदनहीनता की सारी हदें तब पार हो गईं, जब घंटों तक कोई भी जिम्मेदार हरकत में नहीं आया।
आपको बता दें कि यह घटना 6 फरवरी की है, नोएडा के युवराज की तरह दिल्ली का कमल भी लापरवाही के भेंट चढ़ गया। HT की रिपोर्ट के मुताबिक यह दर्दनाक हादसा शुक्रवार तड़के करीब 12:15 बजे हुआ। 25 वर्षीय कमल ध्यानी रोहिणी स्थित एक कॉल सेंटर में अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान जनकपुरी के आंध्र स्कूल के पास सड़क पर खुले पड़े गहरे गड्ढे ने उनकी जान ले ली। शुरुआती जांच में सामने आया कि दुर्घटनास्थल पर न तो किसी तरह की उचित बैरिकेडिंग की गई थी और न ही लोगों को सतर्क करने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कमल कई घंटों तक उसी गड्ढे में पड़े रहे, लेकिन किसी ने समय पर प्रशासन को सूचना नहीं दी। आखिरकार सुबह करीब 8 बजे एक महिला राहगीर ने इमरजेंसी नंबर पर कॉल कर पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर प्रशासन को हादसे का पता चला। यह घटना न सिर्फ एक युवक की मौत की कहानी है, बल्कि सिस्टम की घोर लापरवाही और उदासीनता को भी उजागर करती है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर और आपराधिक लापरवाही का साफ उदाहरण है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए उप-ठेकेदार राजेश प्रजापति को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया है। साथ ही, इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि यह गड्ढा सीवर लाइन से जुड़े काम के लिए खोदा गया था, लेकिन काम पूरा होने के बाद न तो इसे ढका गया और न ही आसपास किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था की गई। न बैरिकेडिंग लगाई गई, न चेतावनी बोर्ड, और न ही रात के समय रोशनी की कोई व्यवस्था की गई, जिसके चलते यह गड्ढा सड़क से गुजरने वालों के लिए जानलेवा साबित हुआ। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस लापरवाही के पीछे किन-किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है और किस स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई।
Published on:
08 Feb 2026 01:14 pm
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