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कपिल मिश्रा पर कानून के अनुसार…पंजाब के डीजीपी ने आतिशी मामले पर FIR को लेकर दिया जवाब

Atishi Case: दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर पर आतिशी की टिप्पणी मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है। जालंधर पुलिस कमिश्नर के बाद अब पंजाब के डीजीपी ने दिल्ली विधानसभा को अपना विस्तृत जवाब भेजा है।

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Punjab DGP reply Delhi Assembly AAP leader Atishi case FIR against Kapil Mishra in accordance with law

Atishi Case: दिल्ली विधानसभा में सिख गुरु सम्मान पर टिप्पणी मामले को लेकर पंजाब पुलिस और दिल्ली विधानसभा के बीच तकरार बढ़ गई है। आम आदमी पार्टी की विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी के वीडियो पर एफआईआर को लेकर दिल्ली विधानसभा ने पंजाब पुलिस से जवाब मांगा था। इसपर पहले जालंधर पुलिस कमिश्नर और अब पंजाब के डीजीपी ने अपना जवाब दिया है। पंजाब पुलिस जहां आतिशी के वीडियो को एडिटेड बताकर धार्मिक भावनाएं आहत करने वाला बता रही है, वहीं दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष इसे गुरुओं का अपमान बता रहे हैं। इसके साथ ही पंजाब पुलिस द्वारा दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा पर FIR दर्ज करने को विशेषाधिकार का हनन बताया था।

पंजाब पुलिस के तीन अधिकारियों से मांगा था जवाब

इसके साथ ही दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस के तीन अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसपर पहले जालंधर के पुलिस कमिश्नर ने अपना जवाब भेजा। इसके बाद 21 जनवरी को पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने पंजाब सरकार के गृह विभाग के माध्यम से नोटिस का जवाब भेजा। इससे पहले जालंधर की पुलिस आयुक्त धनप्रीत कौर ने भी ऐसा ही जवाब दाखिल किया था। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने एक विस्तृत जवाब में स्पष्ट किया है कि जालंधर निवासी की शिकायत के आधार पर कानून के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

पंजाब के डीजीपी ने बताया पूरा मामला

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 7 जनवरी को सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो क्लिप्स में आतिशी को सिख गुरुओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, दिल्ली विधानसभा में उसी भाषण का मूल वीडियो बाद में आतिशी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किया गया, जिसमें ऐसी कोई टिप्पणी मौजूद नहीं थी, जो भाजपा नेताओं द्वारा वायरल की गई थी। इससे यह संकेत मिलता है कि वायरल वीडियो को एडिटेड रूप में पेश किया गया, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची और सांप्रदायिक तनाव भड़कने की संभावना प्रबल हो गई।

पंजाब के डीजीपी ने अपने जवाब में क्या कहा?

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने अपने जवाब में कहा "इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को पंजाब की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, एसएएस नगर (मोहाली) भेजा गया। जांच के दौरान सामने आया कि वीडियो फाइल से निकाले गए ऑडियो में 'गुरु' शब्द का उच्चारण ही नहीं किया गया है। यह एफएसएल रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है। पंजाब पुलिस ने फोरेंसिक जांच को प्राथमिकता दी।"

सदन के अधिकार की भी बताई व्याख्या

पंजाब के डीजीपी ने अपने जवाब में आगे कहा "जालंधर कमिश्नरेट पुलिस को जब एक स्थानीय निवासी की लिखित शिकायत मिली, जिसमें इसे संज्ञेय अपराध बताया गया। इसके बाद पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना कानूनी दायित्व बन जाता है। कानून के अनुसार, यदि पुलिस अधिकारी को मिली सूचना में संज्ञेय अपराध का संकेत मिलता है तो एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।" डीजीपी ने इस मामले में विधानसभा के विधायी विशेषाधिकार पर कहा "संविधान द्वारा प्रदत्त विशेषाधिकार केवल उस सामग्री तक सीमित हैं, जो विधानमंडल के किसी सदन या उसके अधिकार के तहत प्रकाशित की गई हो। जबकि मौजूदा मामले में जिस वीडियो क्लिप पर FIR दर्ज की गई है, वह न तो सदन के अधिकार के तहत प्रकाशित नहीं की गई।"

शरारती तत्वों पर दर्ज किया गया मुकदमा

पंजाब के डीजीपी ने कहा कि यदि किसी प्रकार का विशेषाधिकार लागू भी होता है तो वह केवल उस सदस्य को संरक्षण देता है, जिसने सदन में भाषण दिया है। इस प्रकरण में वह सदस्य विपक्ष नेता आतिशी हैं। हालांकि, उनके सदन के भीतर दिए गए भाषण के लिए उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। एफआईआर अज्ञात शरारती तत्वों के खिलाफ दर्ज की गई है, जिन्होंने सदन के बाहर उनके भाषण का दुरुपयोग करने का प्रयास किया। डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर का उद्देश्य यह जांचना है कि मूल रूप में दिए गए भाषण का कोई हिस्सा अपराध की श्रेणी में आता है या नहीं। उन्होंने कहा कि जांच का केंद्र बिंदु विधानसभा के बाहर अज्ञात व्यक्तियों द्वारा किए गए कृत्य हैं, जिनमें वीडियो क्लिप को काटना, संपादित करना और उस पर आपत्तिजनक उपशीर्षक जोड़कर डिजिटल छेड़छाड़ करना शामिल है।

न्यायालयों के प्रति पंजाब पुलिस जवाबदेह

डीजीपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की धाराओं का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब पुलिस की जांच संबंधी जवाबदेही न्यायिक मजिस्ट्रेट और सक्षम न्यायालयों के प्रति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएनएसएस या किसी अन्य कानून में किसी विधायिका को किसी अन्य राज्य की पुलिस पर निरीक्षण या नियंत्रण का अधिकार नहीं दिया गया है, विशेषकर ऐसे मामलों में जिनका सीधा संबंध कानून-व्यवस्था से हो।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस जांच में हस्तक्षेप का कोई भी प्रयास विधानसभा के नियमों का उल्लंघन होगा, क्योंकि न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों को विधानसभा में नहीं उठाया जाना चाहिए। डीजीपी ने पंजाब की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की सीमा पाकिस्तान से लगती है और यहां सीमा पार आतंकवाद व आंतरिक अशांति का लंबा इतिहास रहा है, जिसमें कई बार धार्मिक रंग देखने को मिला है। ऐसे में सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए गए भ्रामक कंटेंट कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।