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एस्ट्रोटर्फ का वादा अधूरा, स्मार्ट सिटी का लाखों का स्टेडियम बदहाली का शिकार

छत्री बाजार मैदान में एस्ट्रोटर्फ बिछाने का वादा एक साल बाद भी अधूरा, मैदान में गड्ढे, गंदगी और वाहनों की एंट्री से खिलाड़ियों को अभ्यास में भारी परेशानी।

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छत्री बाजार मैदान में एस्ट्रोटर्फ बिछाने का वादा एक साल बाद भी अधूरा, मैदान में गड्ढे, गंदगी और वाहनों की एंट्री से खिलाड़ियों को अभ्यास में भारी परेशानी।

छत्री बाजार मैदान में एस्ट्रोटर्फ बिछाने का वादा एक साल बाद भी अधूरा, मैदान में गड्ढे, गंदगी और वाहनों की एंट्री से खिलाड़ियों को अभ्यास में भारी परेशानी।

छत्री बाजार मैदान में एस्ट्रोटर्फ बिछाने का वादा एक साल बाद भी अधूरा, मैदान में गड्ढे, गंदगी और वाहनों की एंट्री से खिलाड़ियों को अभ्यास में भारी परेशानी।

एक साल पहले किया था एस्ट्रोटर्फ का वादा

ग्वालियर। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत खेल सुविधाओं के विकास के जो सपने दिखाए गए थे, वे छत्री बाजार मैदान में आकर पूरी तरह टूटते नजर आ रहे हैं। एक साल पहले यहां हॉकी खिलाड़ियों की सुविधा के लिए एस्ट्रोटर्फ बिछाने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक न एस्ट्रोटर्फ बिछा और न ही मैदान की दुर्दशा सुधरी।

केन्द्रीय मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री ने मंच से घोषणा की थी कि यहां आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा, ताकि शहर के हॉकी खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मिल सके। अब खिलाड़ी सिर्फ इंतजार ही कर रहे हैं।

लाखों खर्च, नतीजा शून्य

स्मार्ट सिटी द्वारा लाखों रुपये खर्च कर विकसित किए गए इस स्टेडियम की हालत खुद बदहाली की कहानी बयां कर रही है। मैदान में जगह-जगह गहरे गड्ढे, सूखी घास, टूटी बाउंड्री और चारों ओर फैली गंदगी साफ नजर आती है।

न नियमित सफाई हो रही है और न ही रखरखाव। पानी नहीं डाले जाने से घास सूख चुकी है, जिससे मैदान में खेलना तो दूर, खड़ा रहना भी जोखिम भरा हो गया है।

मैदान बना खुला रास्ता, वाहनों की बेरोकटोक एंट्री

यह मैदान खासतौर पर हॉकी खिलाड़ियों के लिए विकसित किया गया था, लेकिन वर्तमान हालात में हॉकी के बच्चों को मैदान नहीं मिल पा रहा है। इसके उलट क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी और दोपहिया-चारपहिया वाहन बेरोकटोक मैदान के अंदर आ रहे हैं।

मैदान खेल का मैदान कम और आवागमन का रास्ता ज्यादा बन चुका है। इससे खिलाड़ियों की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ हो रहा है।

चौकीदारी हटते ही शराबियों का कब्जा

सबसे गंभीर स्थिति यह है कि स्टेडियम से चौकीदार की व्यवस्था ही हटा दी गई है। नतीजा यह कि रात होते ही मैदान शराब पीने वालों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है।

खाली शराब की बोतलें, तोड़फोड़ और गंदगी इस बात का प्रमाण हैं कि मैदान को प्रशासन ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है।

खिलाड़ी झाड़ू लगाएं या मेडल जीतें?

विडंबना यह है कि जिन खिलाड़ियों के लिए यह स्टेडियम बनाया गया था, वही खिलाड़ी अब मैदान की सफाई करने को मजबूर हैं। सुबह अभ्यास से पहले झाड़ू लगाना, पत्थर हटाना और गड्ढों से बचते हुए खेलना क्या यही स्मार्ट सिटी का खेल मॉडल है?

बच्चों को प्रैक्टिस करने में भारी परेशानी आती है

“एस्ट्रोटर्फ का दावा पूरी तरह झूठ साबित हुआ है। मैदान की हालत ऐसी है कि हॉकी के बच्चों को प्रैक्टिस करने में भारी परेशानी आती है। यहां क्रिकेट खेला जाता है और वाहन भी अंदर आ जाते हैं। चौकीदारी हटा दी गई है, जिससे सफाई भी नहीं हो रही।”
— अशोक चव्हाण, हॉकी कोच