30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सावधान! ऑनलाइन खरीदारी से सोशल मीडिया पर दिखावे तक, साइबर ठगों की आप पर नजर

Cyber Fraud : सोशल मीडिया पर दिखावा करने वाले अमीर इन दिनों साइबर ठगों के निशाने पर हैं। पिछले साल प्रदेश में 581 करोड़ की साइबर ठगी की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें से साइबर पुलिस की सतर्कता से 137 करोड़ की ठगी की रकम को सीज कर बचाया गया है।

2 min read
Google source verification
Cyber Fraud

साइबर ठगों के निशाने पर अमीर (Photo Source- Patrika)

Cyber Fraud : दिखावा, महंगी खरीदारी को भले ही अमीर वर्ग के लोग शौक के रूप में सोशल मीडिया पर प्रस्तुत करें, लेकिन आजकल सोशल मीडिया पर लोगों की ऐसी गतिविधि उन्हीं को भारी पड़ सकती है। दरअसल, साइबर अपराधी इसी आधार पर उनकी प्रोफाइलिंग कर रहे हैं, यानी दिखावा करने वाले अमीर इन दिनों साइबर ठगों के निशाने पर हैं।

आपको बता दें कि, हालही में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगों ने सीबीआई एसपी बनकर एक सेवानिवृत उप पंजीयक को 48 दिन डिजिटल अरेस्ट करके रखा। इस बीच डरा धमकाकर उनसे 01 करोड़ 12 लाख रुपए 04 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर भी करा लिए।

सोशल मीडिया पर शेयर की थी जानकारी

ऐसे ही, 7 दिन पहले बैतूल में एक सेवानिवृत अधिकारी से साढ़े 23 लाख रुपए की साइबर ठगी की गई। दोनों घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि, साइबर ठगों के पास ये जानकारी आई कहां से मिली है कि संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में करोड़ों रुपए हैं।

ठगों का सॉफ्ट टारगेट बुजुर्ग

मामले को लेकर साइबर मुख्यालय के एसपी प्रणय नागवंशी का कहना है कि, सोशल मीडिया के साथ-साथ अन्य माध्यम से बड़े शौक, बड़ी खरीदारी दिखाते हैं तो साइबर ठग ऐसे लोगों की प्रोफाइल तैयार करते हैं। इस दौरान ये भी देखा जाता है कि, उनकी उम्र क्या है? बुजुर्ग लोग कई बार घर पर अकेले रहते हैं। जल्दी फोन भी उठा लेते हैं। तीसरी बात ये कि, धोखाधड़ी की घटनाओं के संबंध में उतना जागरूक भी नहीं होते, इसलिए जल्दी फंस भी जाते हैं। ठग फोन नंबर पता कर बातचीत करते हैं और डिजिटल अरेस्ट का शिकार बना लेते हैं।

क्या कहते हैं साइबर एक्सपर्ट?

साइबर विशेषज्ञ अभिनव शर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि, सरकार की वेबसाइटों का ये जानने के लिए ऑडिट नहीं हो रहा कि, डाटा बाहर तो नहीं जा रहा। हकीकत में आज देशभर में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं, जिसका आधार कार्ड लीक न हुआ हो। आधार से पैन जुड़ा होता है, जिससे ठगों को लेनदेन का पता चल जाता है। जिस तरह से डाटा लीक हो रहा है, उससे आगामी एक साल में प्रदेश के लोगों से साइबर ठगी की घटनाएं बढ़ने की आशंका है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, सरकार को अपना डाटा प्रोटेक्शन सिस्टम मजबूत करना चाहिए।

साल 2025 में एमपी में 581 करोड़ का साइबर फ्रॉड

आपको बता दें कि, साल 2025 में सिर्फ मध्य प्रदेश में ही 581 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हो चुकी है। ठगी का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, ये अच्छी बात है कि, लोगों की जागरूकता और पुलिस की सक्रियता से पिछले साल 137 करोड़ रुपए होल्ड कराने में सफलता प्राप्त हुई है।