
इंदौर. गीता एकमात्र धार्मिक ग्रंथ नहीं है, ये जीवन जीने का तरीका सिखाता है। जो महापुरुष या स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जेल गए उन्होंने भी जेल में गीता का अध्ययन किया। आगे का जीवन गीता के माध्यम से प्रशस्त किया। वे हर समय गीता के मार्ग पर चलें और अपने जीवन को सार्थक किया। आप जेल में आ गए तो ये अंत नहीं है, हो सकता है नई शुरूआत हो। मैं कई जेलों में संबोधन दे चुका हूं, लेकिन यहां के कैदियों में अनुशासन और रचनात्मकता देखी है।यह कहना गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का है। वह शुक्रवार को सेंट्रल जेल में भगवत गीता पर प्रवचन देने पहुंचे थे।
जेल विभाग के महानिदेशक वरुण कपूर ने स्वामी ज्ञानानंद का स्वागत किया। इस दौरान अतिरिक्त जेल महानिरीक्षक संजय पांडे, दिनेश नरगावे, अधीक्षक अलका सोनकर, जेलर इंदर नागर, संतोष लडि़या, अभिषेक दांगी मौजूद रो। स्वामी ज्ञानानंद ने जेल उत्पाद प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। बाल राधाकृष्ण उपहार प्रदान किए। ढोल नगाड़ों की थाप आदिवासी बंदियों ने भगोरिया नृत्य की प्रस्तुति दी तो महिला बंदियों ने कलश यात्रा निकाली। कैदियों ने श्रीकृष्ण भक्ति नृत्य देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। स्वामी ज्ञानानंद द्वारा अपने जीवन में भगवत गीता के उपदेशों द्वारा समस्त विश्व कल्याण के लिए क्या कर्म किए जाने चाहिए इससे अवगत कराया गया।
गीता हमारी आंखें खोलने वाला ग्रंथ है। यह आंख विचार, विवेक और दिव्यता की दृष्टि प्रदान करती है। भगवद गीता वह दिव्य ग्रंथ है जिसके संदेश नैराश्य के गर्त से व्यक्ति को आशा और विश्वास के शिखर तक पहुंचाने में सक्षम है। गीता की शुरुआत धृतराष्ट्र जैसे दृष्टिहीन पात्र के साथ होती है। यह अपने आप में अद्भुत तथ्य है कि जो गीता व्यक्ति को दिव्य दृष्टि प्रदान करती है, उसकी शुरुआत एक दृष्टिहीन पात्र के साथ हो रही है। आज के वातावरण में समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए गीता हर दृष्टि से प्रासंगिक और बहुआयामी ग्रंथ है।
महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद ने उक्त प्रवचन शुक्रवार को कनाडि़या रोड पर सूठीबाई दौलतराम पारमार्थिक न्यास की मेजबानी में शुरू हुए गीता सत्संग के दौरान कहे। इस दौरान बालकृष्ण छावछरिया, समाजसेवी विनोद अग्रवाल, पुरुषोत्तम अग्रवाल, कुलभूषण मित्तल, विमल तोड़ी, मनोरंजन मिश्रा, डॉ. निशा जोशी, विनय छावछरिया ने पूजन किया। सांसद दर्शन चौधरी ने मंगलाचरण के बीच दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया। गीता के दसवें अध्याय के श्लोक 39 से 45 के सामूहिक पाठ से प्रवचनों की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा, गीता 18 अध्यायों और 700 श्लोकों का बहुत छोटा शास्त्र है, जो केवल हमारे पूजा घरों में रखने अथवा किसी संन्यासी और सेवानिवृत्त लोगों के लिए नहीं बल्कि यह दिव्य ग्रंथ सभी के लिए है।
Published on:
06 Feb 2026 09:27 pm
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