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रेंज में पुलिस को छका रही चोरों की चाल, 15 दिन में 34 वारदातें, ग्वालियर सबसे आगे

बाहरी बदमाश, लोकल पुलिस के लिए बड़ी मुश्किल

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ग्वालियर। ग्वालियर रेंज (ग्वालियर, शिवपुरी, गुना और अशोकनगर) में चोरों की बढ़ती वारदातें पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। पुलिस का ही लेखा-जोखा बता रहा है कि चोरों की चाल इतनी तेज है कि अधिकतर मामलों में वारदात के बाद ही पुलिस को भनक लग पा रही है। चोरियों पर लगाम लगाने के तमाम दावों के बावजूद रेंज पुलिस अब तक कोई ठोस तोड़ नहीं खोज पाई है।

ग्वालियर। ग्वालियर रेंज (ग्वालियर, शिवपुरी, गुना और अशोकनगर) में चोरों की बढ़ती वारदातें पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। पुलिस का ही लेखा-जोखा बता रहा है कि चोरों की चाल इतनी तेज है कि अधिकतर मामलों में वारदात के बाद ही पुलिस को भनक लग पा रही है। चोरियों पर लगाम लगाने के तमाम दावों के बावजूद रेंज पुलिस अब तक कोई ठोस तोड़ नहीं खोज पाई है।

ग्वालियर। ग्वालियर रेंज (ग्वालियर, शिवपुरी, गुना और अशोकनगर) में चोरों की बढ़ती वारदातें पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। पुलिस का ही लेखा-जोखा बता रहा है कि चोरों की चाल इतनी तेज है कि अधिकतर मामलों में वारदात के बाद ही पुलिस को भनक लग पा रही है। चोरियों पर लगाम लगाने के तमाम दावों के बावजूद रेंज पुलिस अब तक कोई ठोस तोड़ नहीं खोज पाई है।

रेंज पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, इस महीने के शुरुआती 15 दिनों में चोरों ने चारों जिलों में 34 मकानों और दुकानों को निशाना बनाया। इनमें सबसे ज्यादा 17 वारदातें अकेले ग्वालियर जिले में हुई हैं। पिछले साल जनवरी के शुरुआती दिनों की तुलना में इस बार चोरियों का आंकड़ा ज्यादा है, जिससे साफ है कि इस बार चोर ज्यादा सक्रिय और योजनाबद्ध तरीके से वारदात कर रहे हैं।

बाहरी बदमाश, लोकल पुलिस के लिए बड़ी मुश्किल

पुलिस अधिकारी मानते हैं कि चोरों पर नकेल कसने के लिए रात गश्त बढ़ाई गई है और मुखबिरों को सतर्क किया गया है, लेकिन पूरी तरह लगाम लगाना आसान नहीं है। वजह साफ है—कई वारदातों में बाहरी बदमाश शामिल हैं। ये अपराधी दूसरे जिलों या राज्यों से आकर सूने मकानों की रैकी करते हैं और वारदात के बाद तुरंत निकल जाते हैं। लोकल पुलिस के पास न तो उनका पुराना रिकॉर्ड होता है और न ही पहचान का कोई ठोस जरिया, जिससे हाथ खाली रह जाते हैं।

दिल्ली-आगरा गैंग पकड़ी, फिर भी चुनौती बरकरार

क्राइम ब्रांच के डीएसपी नागेन्द्र सिंह सिकरवार के मुताबिक हाल ही में दिल्ली और आगरा के चोरों की एक गैंग को पकड़ा गया था, जिनसे घरों और वाहनों में चोरी की कई वारदातें खुली हैं। इसके बावजूद दूसरे जिलों और राज्यों से आकर अपराध करना पुलिस के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है।

चोरियों का लेखा-जोखा
जिला 1 से 15 जनवरी 15 से 31 दिसंबर (गत वर्ष) जनवरी (गत वर्ष शुरुआती दिन)
ग्वालियर 17 10 15
शिवपुरी 07 03 03
गुना 07 02 08
अशोकनगर 03 02 05
कुल 34 17 31