
SIT रिपोर्ट में बड़े अफसरों पर गिरी गाज Source- X
Engineer Yuvraj Mehta Murder Case: नोएडा में 16 दिसंबर की रात भयानक कार हादसा हुआ था। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार पानी भरे गड्ढे में गिर गई और उनकी मौत हो गई। यह घटना अब सिर्फ हादसा नहीं लग रही, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की कमजोरी का बड़ा मामला बन गया है। सरकार ने इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाया। SIT ने कई विभागों से सवाल किए और रिपोर्ट मांगी। अब जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा रही है।
16 दिसंबर की रात नोएडा सेक्टर-150 में युवराज मेहता अपनी कार चला रहे थे। रास्ते में एक प्लॉट के पास पानी भरा गहरा गड्ढा था, जहां कार गिर गई। युवराज ने काफी देर तक मदद के लिए चिल्लाया, लेकिन रेस्क्यू में 2 घंटे से ज्यादा की देरी हुई। नतीजा यह हुआ कि वे डूब गए। यह गड्ढा निर्माण कार्य के दौरान खोदा गया था और उसे ठीक नहीं किया गया था। पानी सीवर और ड्रेनेज की वजह से भरा था।
SIT ने इस मामले की गहराई से जांच की। उन्होंने 22 से ज्यादा सवाल नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और अन्य विभागों से पूछे। नोएडा प्राधिकरण ने 150 पन्नों की रिपोर्ट दी, जबकि पुलिस ने 450 पन्नों की। सूत्रों के मुताबिक, SIT ने रेस्क्यू में देरी का मुख्य कारण पूछा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जांच टीम मेरठ गई और वहां रिपोर्ट का विश्लेषण किया। SIT ने 100 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए, जिनमें SDRF, पुलिस, कंट्रोल रूम और रेस्क्यू टीम के सदस्य शामिल थे।
नोएडा प्राधिकरण शहर के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालता है। सीईओ लोकेश एम. की जिम्मेदारी थी कि प्लॉट के पास हादसे के बाद अधीनस्थ अधिकारियों से जवाब तलब करें। फाइल अप्रूव होने के बाद रोड कट पर काम नहीं हुआ और इसका फॉलोअप नहीं किया गया। इसलिए SIT ने सबसे पहले जूनियर इंजीनियर को हटाने के बाद सीईओ लोकेश एम. पर बड़ा एक्शन लिया। उन्हें पद से हटा दिया गया और वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया। आगे रिपोर्ट के आधार पर और कार्रवाई हो सकती है।
नोएडा डीएम मेधा रूपम जिले की डिजास्टर मैनेजमेंट हेड हैं। हादसे के बाद उन्हें चौथे दिन मौके पर पहुंचीं। उन्होंने युवराज के परिवार से बात तक नहीं की। घटना से एक दिन पहले आपदा प्रबंधन की बैठक हुई थी, लेकिन कोई तैयारी नहीं दिखी। SIT ने इस पर भी सवाल उठाए हैं।
हादसे के दौरान पुलिस के बाद अग्निशमन टीम पहुंची। कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें तैरना नहीं आता और उपकरण भी नहीं हैं। चीफ फायर ऑफिसर मौके पर नहीं पहुंचे और न ही किसी को गाइड किया। SIT ने इसकी वजह पूछी।
पुलिस सबसे पहले मौके पर पहुंची। डायल-112 का रिस्पांस समय ठीक था, लेकिन SHO सर्वेश सिंह मौके पर नहीं पहुंचे। उन्होंने रेस्क्यू की जानकारी अधिकारियों को नहीं दी। SIT ने पूछा कि एनडीआरएफ को समय पर क्यों नहीं बताया गया।
नोएडा ट्रैफिक सेल के जीएम एसपी सिंह की जिम्मेदारी थी कि ब्लैक स्पॉट चिह्नित करें, रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड और सुरक्षा उपाय करें। यह काम नहीं हुआ। जल-सीवर जीएम आरपी सिंह को ड्रेनेज देखना था। 12 सोसाइटी के 10 हजार लोगों का सीवर पानी टूटी लाइन से प्लॉट में जा रहा था। 2023 में सिंचाई विभाग को हेड रेगुलेटर बनाना था, लेकिन फॉलोअप नहीं हुआ।
जिस प्लॉट में गड्ढा था, वह अभय कुमार का है (बिज टाउन प्लानर नाम से रजिस्टर्ड)। उन्होंने बेसमेंट के लिए गड्ढा खुदवाया और खाली छोड़ दिया। पानी भर गया और युवराज बाहर नहीं निकल सके। बिल्डरों अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल वोहरा और निर्मल कुमार के खिलाफ FIR हुई। अब तक 4 बिल्डरों को गिरफ्तार किया गया है।
यह मामला अब सिस्टम फेल्योर से जुड़ गया। प्रशासनिक लापरवाही, रेस्क्यू की कमी और अधिकारियों की गैर-जिम्मेदारी सामने आई है। SIT रिपोर्ट का एनालिसिस कर सीएम योगी को सौंपी जाएगी। जानकारी के मुताबिक, इसमें कई बड़े चेहरों को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
Updated on:
25 Jan 2026 10:39 am
Published on:
25 Jan 2026 10:38 am

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