
बांगड़ अस्पताल की मोर्चरी में कंकाल को पोटली में लेकर जाता मृतक ललित सेन का बड़ा भाई भरत सेन। फोटो पत्रिका
पाली। बांडी नदी में डूबे युवक की चार माह बाद शिनाख्त हो पाई। पुलिस ने डीएनए सैंपल मैच के बाद सोमवार को युवक का कंकाल परिजनों को सौंपा। बेटे की अस्थियां देखते ही पिता खुद को संभाल नहीं सके और फूट-फूटकर रो पड़े। भारी मन से परिजनों ने अंतिम संस्कार किया।
अनंत चतुर्थी पर गणेश विसर्जन के दिन 6 सितंबर 2025 को इंद्रा कॉलोनी निवासी विजय सिंह व ललित सेन बांडी नदी में बह गए थे। उनमें से विजय सिंह का शव मिल गया, लेकिन ललित सेन नहीं मिला था। बीते 11 नवम्बर को बांडी नदी में एक कंकाल मिला था। उसकी डीएनए जांच के लिए ललित के पिता हरिराम सेन व उसकी मां सोनी देवी के सैंपल लिए थे। उनको एफएसएल जोधपुर में जांच के लिए भेजा था। वहां से रिपोर्ट में सैंपल मैच हो गए।
पुलिस ने कंकाल सुबह ललित के भाई भरत सेन और पिता हरिराम सेन को सौंपा। बेटे की अस्थियां एक कपड़े में बंधी देख पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने कांपते हाथों से पुष्प अर्पित किए और मौन होकर बेटे को अंतिम विदाई दी। इसके बाद परिजन अस्थियां लेकर हिंदू सेवा मंडल श्मशान पहुंचे, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
नदी में बहने के चार माह बाद परिजन धीरे-धीरे जीवन की पटरी पर लौटने लगे थे, लेकिन डीएनए रिपोर्ट ने जख्म फिर हरे कर दिए। मां, बहन और परिवार के अन्य सदस्यों की आंखें एक बार फिर नम हो गईं। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने ढांढस बंधाने की कोशिश की, लेकिन माता-पिता के आंसू नहीं थमे। बेटे की यादें हर पल उनके दिल को कचोटती रहीं।
Published on:
05 Jan 2026 06:45 pm
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