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IPS की कुर्सी, पावर और रुतबा… फिर भी बिहार की ‘लेडी सिंघम’ ने क्यों दिया था इस्तीफा? काम्या मिश्रा ने सुनाई अपनी कहानी

IPS Kamya Mishra: पूर्व IPS अधिकारी काम्या मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा देने के 18 महीने बाद आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक टॉक शो में बिहार में अपनी यात्रा के बारे में बात करते हुए, उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे के कारणों के बारे में भी बताया।

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पटना

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Anand Shekhar

Feb 04, 2026

IPS Kamya Mishra

पूर्व IPS Kamya Mishra (फोटो - kamya mishra Insta and X)

IPS Kamya Mishra: बिहार कैडर की 2019 बैच की चर्चित IPS अधिकारी काम्या मिश्रा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपने तेज-तर्रार काम करने के तरीके, बड़े ऑपरेशन्स और अपराधियों के खिलाफ सख्त रवैये के लिए 'लेडी सिंघम' के नाम से मशहूर काम्या मिश्रा ने 5 अगस्त, 2024 को अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। उस समय उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह सिर्फ "पारिवारिक और निजी कारण" बताए थे। लगभग 18 महीने की चुप्पी के बाद, अब उन्होंने पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपने फैसले के पीछे की असली कहानी बताई है।

TEDx मंच से टूटी चुप्पी

TEDxGIMS टॉक शो में काम्या मिश्रा ने अपने छह साल के पुलिस करियर और इस्तीफे के फैसले के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने अपनी पूरी ‘खाकी यात्रा’ को “मैजिकल रियलिज्म” यानी जादुई यथार्थवाद बताया। काम्या ने कहा कि बिहार में बिताए गए छह साल किसी फिक्शन से कम नहीं थे, जहां हर दिन नई चुनौती, नई सीख और इंसानी पीड़ा से आमना-सामना हुआ।

‘नार्कोस’ नहीं, ज्ञान की धरती है बिहार

टॉक शो की शुरुआत में ही काम्या मिश्रा ने बिहार को लेकर प्रचलित नकारात्मक सोच पर प्रहार किया और और राज्य के बारे में अपने नजरिए पर बात करते हुए कहा, "मैं नहीं चाहती कि आप बिहार को 'नार्कोस' की कहानी या भारत के कोलंबिया की तरह देखें। मेरे लिए बिहार बुद्ध और महावीर की ज्ञान भूमि है। यहां 6 साल वर्दी में बिताकर मैंने जो सीखा, वो किसी फिक्शन से कम नहीं था।" उन्होंने कहा कि इस राज्य ने उन्हें एक पुलिस अधिकारी के साथ-साथ एक इंसान के रूप में भी गढ़ा।

23 साल की उम्र में ASP, बिहार से पहचान

काम्या मिश्रा ने ओडिशा के रायरांगपुर जैसे छोटे शहर से UPSC परीक्षा पास करने और 23 साल की उम्र में ASP बनने तक के अपने सफर के बारे में बात की। बिहार में उनके प्रोफेशनल करियर की शुरुआत वैशाली के लालगंज में SHO के तौर पर हुई। इसके बाद उन्होंने पटना में ASP सदर, सेक्रेटेरिएट SP और फिर दरभंगा रूरल SP के तौर पर काम किया। उन्होंने कहा कि बिहार में उन्हें कभी भी यह महसूस नहीं कराया गया कि वह एक महिला ऑफिसर हैं, चाहे वह रेड हो या कोई ऑपरेशन, उन्हें वही जिम्मेदारियां दी गईं जो उनके पुरुष साथियों को दी जाती थीं।

वो घटनाएं जिन्होंने भीतर से झकझोर दिया

टॉक शो के दौरान काम्या ने कुछ ऐसी घटनाएं साझा कीं, जिन्होंने उनकी सोच और ‘पावर’ की परिभाषा बदल दी। काम्या ने अपने करियर की एक झकझोर देने वाली घटना साझा करते हुए बताया कि कैसे एक 8 साल की मासूम के साथ हुए दुष्कर्म के मामले ने उन्हें भीतर तक हिला दिया था। काम्या ने कहा, "मैंने उन आरोपियों को पकड़ा, उन्हें सजा दिलवाई, लेकिन मैं उस मानसिकता को गिरफ्तार नहीं कर पाई जिसने उस अपराध को जन्म दिया। तब मुझे समझ आया कि पावर सिर्फ गिरफ्तारी में नहीं है, बल्कि उस मानसिकता को बदलने में है जो ऐसे अपराधों को जन्म देती है।"

छठ, ठेकुआ और बिहार की इंसानियत

काम्या ने छठ पर्व से जुड़ा एक भावुक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि एक आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान उसकी मां रोती रही, लेकिन तीन दिन बाद वही महिला उनके पास ठेकुआ लेकर आई और कहा, “आपने सही किया, शायद अब मेरा बेटा सुधर जाए।” काम्या के मुताबिक, बिहार ने उन्हें सिखाया कि साधारण लोग भी कितनी असाधारण इंसानियत दिखा सकते हैं।

पुलिस की नौकरी और मानसिक थकान

काम्या मिश्रा ने पुलिस सेवा के एक ऐसे पहलू के बारे में भी खुलकर बात की जिस पर कम ही चर्चा होती है, मानसिक और भावनात्मक थकावट। उन्होंने कहा कि जब लोग त्योहार मनाते हैं, तो पुलिस दंगे होने की आशंका में ड्यूटी पर होती है। सबसे मुश्किल पल वे होते हैं जब आपको अपने साथी अधिकारियों को अपनी आंखों के सामने घायल होते या मरते हुए देखना पड़ता है। उन्होंने पुलिस के काम को "समाज के गंदे पानी, इंसानी दुख और दर्द को हर दिन साफ करना" बताया।

इस्तीफे की वजह

काम्या के इस्तीफे को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन उन्होंने सभी अफवाहों पर विराम लगाते हुए साफ किया कि यह फैसला 'हार' की वजह से नहीं, बल्कि 'बदलाव और विकास' के लिए था। मुट्ठी बांधने और खोलने के उदाहरण का इस्तेमाल करते हुए, उन्होंने कहा, "पावर और अधिकार को कसकर पकड़े रहना (मुट्ठी बांधना) थकाने वाला और दर्दनाक होता है। छोड़ देना हार नहीं है, बल्कि कुछ नया करने के लिए जगह बनाना है। मैंने सिस्टम के अंदर काम किया और अब मैं शिक्षा और रोजगार के जरिए सिस्टम के बाहर लोगों को सशक्त बनाना चाहती हूं।" उन्होंने आगे कहा, "वर्दी उतारी नहीं जाती, बस उसका रूप बदलता है।"

शिक्षा के क्षेत्र में करना चाहती हैं काम

अब काम्या मिश्रा शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। उनका मानना है कि जिन अपराधियों से उन्होंने पूछताछ की, अगर उन्हें सही शिक्षा और सपने देखने का मौका मिला होता, तो शायद उनकी जिंदगी अलग होती। उन्होंने कहा कि असली आजादी किसी पद या बैच से नहीं, बल्कि अपनी जीविका और उद्देश्य गढ़ने से आती है।

कभी-कभी चले जाना, बड़ा होना होता है

अपने संबोधन के अंत में काम्या मिश्रा ने कहा कि इस्तीफा देना त्याग नहीं, बल्कि आगे बढ़ना है। कुछ लोग सिस्टम के भीतर विकसित होते हैं, कुछ उसके बाहर। उनके लिए यह फैसला जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहां सेवा जारी है, बस तरीका बदल गया है।