
CM नीतीश कुमार (ANI)
नीतीश कैबिनेट ने राज्य के औद्योगिक और आर्थिक भविष्य को नई दिशा देने के उदेश्य से गुरूवार को बड़ा फैसला लेते हुए ‘बिहार सेमीकंडक्टर नीति, 2026’ को मंजूरी दे दी। इसके लागू होने से बिहार में करीब 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है। इसके साथ ही बिहार को पूर्वी भारत का टेक्नोलॉजी हब बनाना है। सरकार ने इसके लिए वर्ष 2030 तक का लक्ष्य रखा है। इसके मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय-3: समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार’ विजन का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
बिहार सेमीकंडक्टर नीति को मंजूरी मिलने से राज्य में करीब 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश की संभावना है। सरकार की योजना सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट, डिस्प्ले फैब और चिप डिजाइन से जुड़े उद्योगों को बिहार में स्थापित करना है। सरकार बिहार में इन्वेस्टर्स को आकर्षित करने के उदेश्य से बिजली, पानी, जमीन और SGST को खास प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इससे बिहार की तकनीकी सेक्टर में मजबूत पहचान बनेगी। इसके साथ ही बिहार में 2 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
कैबिनेट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक और अहम फैसला लिया गया। बिहार राज्य विपणन प्राधिकार (BSMA) के गठन को भी कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी है। यह संस्था ग्रामीण उत्पादों, हस्तशिल्प, किसानों और सूक्ष्म उद्योगों के सामान की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग करेगी। ताकि बिहार के पारंपरिक उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक में अपनी पहचान बना सके। इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और लोगों की आमदनी में इजाफा होगा।
सरकार ने निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए औद्योगिक अनुदान को लेकर भी बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सरकार ने बिहार आकस्मिकता निधि से 1700 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रावधान को मंजूरी दी है। इसका उदेश्य बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति, 2016 के तहत लंबित अनुदान दावों का भुगतान करना है।
Published on:
29 Jan 2026 11:06 pm
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