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पटना में नीट छात्रा की मौत ने पुलिस और दबंगों के गठजोड़ का राज खोल दिया है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे बढ़ रही परतें वैसे वैसे खुलती जा रही है। पटना में चलने वाले गर्ल्स हॉस्टल के सिस्टम और उसकी कार्यशैली पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल, अकेला नहीं है। पटना में ऐसे कई गर्ल्स हॉस्टल जहां पर लड़की की मर्जी के खिलाफ कई उल्टा सीधा काम का दबाव बनाया जाता है। पुलिस और दबंगों के गठजोड़ से चलने वाले इस धंधे का विरोध करने वालों को प्रताड़ना से मौत तक की सजा दी जाती है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल की घटना इसकी एक बानगी है।
शंभू गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा का रेप के बाद मौत मामले में पुलिस की भूमिका पर ही सवाल खड़े हो गए। पुलिस ने पूरे मामले को रफा दफा करने के लिए रेप के बाद हत्या की घटना को आत्म हत्या बता रही थी। इधर, परिजनों पर भी पैसा लेकर पूरे मामले को रफा दफा करने के लिए दबाव बना रही थी। छात्रा को उस अस्पताल में भर्ती कराया जहां पर इलाज के उचित व्यवस्था तक नहीं थे। पीड़िता की मां के सवाल पर अस्पताल कर्मी और हॉस्टल की वार्डेन की ओर से उनकी आवाज पैसे से दबाने का पूरा प्रयास किया गया। पीड़िता की मां ने अस्पताल और हॉस्टल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि वे जवाब सवाल करने पर जान से मारने तक की धमकी दे रहे थे। पीड़िता की मां का कहना है कि बेटी के शरीर पर कई जगहों पर नाखून और प्राइवेट पार्ट पर जख्म के निशान चीख-चीख कर पूरी घटना को बयां कर रही थी। लेकिन, अस्पताल प्रबंधन पूरे मामले को आत्म हत्या बताने पर जुटा था। अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि नींद की गोली ज्यादा खाने से बच्ची की मौत हो गई।
बच्ची की हालत बिगड़ने पर हॉस्टल प्रबंधन ने इलाज के लिए प्रभात मेमोरियल अस्पताल में ही क्यों गए? अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के प्राइवेट पार्ट में जख्म और शरीर पर नाखून के निशान की चर्चा क्यों नहीं की? बच्ची के शरीर पर जब नाखून के निशान और प्राइवेट पार्ट में जख्म थे तो इसकी सूचना अस्पताल प्रबंधन की ओर से पुलिस को क्यों नहीं दी गई। जन सुराज प्रमुख शनिवार को इस मामले में पीड़ित छात्रा के परिजनों के साथ पटना के एसएसपी से मिले। उन्होंने एसएसपी से अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग किया और इस मामले में न्याय की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन करने वालों को राहत देने का आग्रह किया। इसके साथ महिला अधिकारी जो इस केस की जांच कर रहीं थीं। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग किए।
दरअसल, पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद गैंगरेप और युवती से अमानवीय यौन हिंसा से जुड़ी सूचना सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। पुलिस की शुरुआती जांच को पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कठघरे में खड़ा कर दिया। पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवती के शरीर पर नाखून के गहरे निशान की बात कही गई है। रिपोर्ट में इस बात के संकेत भी है कि युवती ने खुद को बचाने की कोशिश की थी। जो कि शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान साफ-साफ इशारा करते हैं। रिपोर्ट में एक से अधिक लोगों द्वारा दुष्कर्म यानी गैंगरेप की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही युवती को अचेत या नियंत्रित करने के लिए दवा या इंजेक्शन दिए जाने की संभावना भी सामने आई है।
Updated on:
17 Jan 2026 08:15 pm
Published on:
17 Jan 2026 06:53 pm
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