
AI जनरेटेड फोटो
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के रेप और मौत के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पुलिस के तरीकों पर नए सवाल उठ रहे हैं। खासकर, मृत छात्रा की मां, पिता, भाई और मामा से DNA सैंपल लिए जाने के बाद स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। परिवार इसे अपनी बदनामी की कोशिश बता रहा है, जबकि SIT और पुलिस इसे जांच में एक 'जरूरी वैज्ञानिक कदम' बता रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिवार से DNA सैंपल क्यों लिए गए और पुलिस उनसे पूछताछ क्यों कर रही है?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, DNA सैंपल लेने का मकसद किसी भी परिवार के सदस्य पर शक करना नहीं है, बल्कि फोरेंसिक प्रक्रिया को पूरा करना है। पुलिस का दावा है कि FSL रिपोर्ट में मिले स्पर्म के DNA की पहचान में किसी भी तकनीकी गड़बड़ी से बचने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।
मां का DNA इसलिए लिया गया ताकि एक रेफरेंस प्रोफाइल तैयार की जा सके। पिता के सैंपल से छात्रा की जेनेटिक प्रोफाइल की पुष्टि की जाएगी। भाई के DNA से पारिवारिक DNA स्ट्रक्चर समझा जाएगा, ताकि किसी भी तरह की फॉल्स मैचिंग से बचा जा सके। मामा का DNA इसलिए लिया गया क्योंकि वह मातृ पक्ष की जेनेटिक लाइन को कंफर्म करता है। इसके बाद इन सभी प्रोफाइल का मिलान संदिग्धों और जेल में बंद हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन के DNA से किया जाएगा।
परिवार से पूछताछ का एक बड़ा कारण प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के एक डॉक्टर का बयान है। डॉक्टर के अनुसार, छात्रा के मोबाइल फोन से एक WhatsApp मैसेज भेजा गया था जिसमें कहा गया था कि परिवार इस मामले में केस दर्ज नहीं कराना चाहता। हालांकि बाद में औपचारिक FIR दर्ज की गई, लेकिन यह अभी भी साफ नहीं है कि मैसेज किसने लिखा था या किन परिस्थितियों में भेजा गया था। क्या उस समय छात्रा होश में थी, या कोई और फोन इस्तेमाल कर रहा था? इन सवालों के जवाब जानने के लिए पुलिस परिवार वालों से बार-बार पूछताछ कर रही है।
SIT ने अब CCTV फुटेज की FSL (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) जांच का आदेश दिया है, जिसे शुरू में इस सबूत के तौर पर पेश किया गया था कि घटना वाले दिन छात्रा के कमरे में कोई नहीं घुसा था। जांच अब इस बात पर फोकस कर रही है कि क्या फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई थी, क्या फोरेंसिक सबूत नष्ट किए गए थे और क्या शुरुआती पुलिस कार्रवाई में लापरवाही हुई थी। इसके लिए थाना स्तर पर दर्ज रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट और पुलिस कर्मियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।
NEET छात्रा रेप और मर्डर केस में, पिछले दो दिनों में 15 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं। इनमें हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन, जो अभी बेउर जेल में बंद है, छात्रा के माता-पिता, भाई, दो मामा और छह ऐसे युवक शामिल हैं जो अक्सर हॉस्टल आते-जाते थे। कोर्ट की इजाजत मिलने के बाद, SIT टीम बेउर जेल गई और मनीष रंजन का DNA सैंपल लिया। वह फिलहाल इस मामले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी है।
शनिवार को FSL ने SIT को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें छात्रा के अंडरगारमेंट्स पर स्पर्म होने की पुष्टि हुई। इसके बाद DNA प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई और मामले में POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं। शुरुआत में POCSO नहीं लगाया गया था क्योंकि छात्रा की उम्र लगभग 18 साल मानी जा रही थी, लेकिन बाद में यह साफ हो गया कि वह नाबालिग थी।
परिवार का कहना है कि माता-पिता और मामा से DNA सैंपल लेने से समाज में गलत संदेश जाता है। उनका आरोप है कि SIT को परिवार पर शक करने के बजाय असली संदिग्धों पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, परिवार ने यह भी कहा है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
इस मामले को एक गंभीर आपराधिक साजिश मानते हुए, पुलिस मुख्यालय ने हॉस्टल, अस्पताल, परिवार और स्थानीय पुलिस की भूमिकाओं की जांच करने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार, DGP ने विधानसभा सत्र से पहले मामले को सुलझाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस मुख्यालय ने जांच के लिए 59 बिन्दुओं में दिशा-निर्देश भेजे हैं, जिसमें से IG और SSP को कम से कम 40 सवालों के जवाब ढूंढने को कहा गया है।
इस मामले की जांच में अब CID भी शामिल हो गई है। CID टीम हॉस्टल पहुंची और सैंपल और तस्वीरें इकट्ठा कीं। इस बीच, PMCH की रिपोर्ट के बाद, पटना AIIMS से दूसरी राय मांगी गई है, हालांकि जरूरी दस्तावेज जमा न होने के कारण इसमें देरी हो रही है।
FSL रिपोर्ट के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है कि छात्रा के साथ रेप हुआ था। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन की जांच के आधार पर, एक दर्जन से ज्यादा लोग SIT की जांच के दायरे में हैं। इन सभी का DNA टेस्ट होना है।
Published on:
28 Jan 2026 10:38 am

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