
13वें राष्ट्रीय चुनाव में सिर्फ 7 महिलाएं सांसद बनीं
बांग्लादेश चुनाव 2026 महिला सांसद : बांग्लादेश में 12 फरवरी को संपन्न हुए 13वें राष्ट्रीय चुनाव में सिर्फ सात महिला उम्मीदवार विजयी रहीं। इन महिला सांसदों में से छह बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) से और एक निर्दलीय थीं। पिछले पांच चुनावों में महिलाओं की यह न्यूनतम जीत है। पिछले चार राष्ट्रीय चुनावों में क्रमश: 2008 (19), 2014 (18), 2018 (22) और 2022 (20) महिलाएं सांसद बनीं।
Bangladesh Election 2026 Women MPs : वहीं भारत में 1952 में हुए पहले आम चुनाव में 45 महिला उम्मीदवारों में से 22 जीतकर सांसद बनीं थीं। आइए जानते हैं कि बांग्लादेश आम चुनाव में बाजी मारने वाली 7 महिलाएं कौन हैं और उन्होंने कितने मतों के अंतर से चुनाव में जीत दर्ज की। इसके साथ ही इस स्टोरी में हम आपको भारत में आम चुनाव में महिलाओं के संसद पहुंचने के इतिहास के बारे में बता रहे हैं।
बांग्लादेश में लोकसभा में कुल 299 सीटें हैं, जबकि भारत में कुल 543 सीटें। बांग्लादेश में पिछले आम चुनाव के मुकाबले इस बार काफी कम महिलाएं चुनाव में उतरीं। चार साल पहले यानी 2022 में हुए आम चुनाव में 99 महिलाओं ने राष्ट्रीय चुनाव में भाग लिया था, जबकि इस बार सिर्फ 85 महिलाएं ही चुनावी दंगल में उतरीं।
| वर्ष | महिला उम्मीदवार | निर्वाचित महिला सांसद |
|---|---|---|
| 1973 | 0 | 0 |
| 1979 | 0 | 0 |
| 1986 | 0 | 5 |
| 1988 | 0 | 4 |
| 1991 | 40 | 4 |
| 1996 | 30 | 5 |
| 2001 | 38 | 6 |
| 2008 | 59 | 19 |
| 2014 | 29 | 18 |
| 2018 | 69 | 22 |
| 2024 | 99 | 20 |
| 2026 | 84–85 | 7 |
History of Woman participation in Bangladesh Parliament Election History :बांग्लादेश में पहला आम चुनाव 1973 में लड़ा गया था। देश के पहले राष्ट्रीय चुनाव में किसी भी पार्टी ने एक भी महिला को चुनावी दंगल में नहीं उतारा और ना ही किसी महिला निर्दलीय उम्मीदार ने चुनाव में भाग लिया। यह आलम अगले 15 वर्षों में तक बना रहा। वहां 1988 तक चार आम चुनाव हुए लेकिन महिलाएं नदारद रहीं। वहां 1991 में पहली बार चुनावी जंग में 40 महिलाएं उतरीं, जिसमें से सिर्फ 4 को जीत मिली।
History of Women Participation in India's Parliament Election: वहीं, भारत में पहले आम चुनाव में सिर्फ 45 महिलाओं ने भाग लिया था, जबकि 2024 में 799 महिलाएं चुनाव में शामिल हुई थीं। 2024 लोकसभा में महिला सांसदों का प्रतिनिधित्व लगभग 13.6% रहा। बांग्लादेश में 85 में से 66 को विभिन्न दलों ने टिकट दिया था, जबकि 19 ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में किस्मत आजमाई।
| वर्ष | महिला उम्मीदवार | निर्वाचित महिला सांसद |
|---|---|---|
| 1952 | 45 | 22 |
| 1957 | 45 | 27 |
| 1962 | 66 | 31 |
| 1967 | 67 | 29 |
| 1971 | 86 | 28 |
| 1977 | 70 | 19 |
| 1980 | 143 | 28 |
| 1984 | 164 | 42 |
| 1989 | 198 | 29 |
| 1991 | 325 | 37 |
| 1996 | 599 | 40 |
| 1998 | 274 | 43 |
| 1999 | 284 | 49 |
| 2004 | 355 | 45 |
| 2009 | 556 | 59 |
| 2014 | 668 | 62 |
| 2019 | 724 | 78 |
सिलहट-2 सीट पर बीएनपी नेता एम इलियास अली की पत्नी ताहसीना रुशदिर लूना ने 79,321 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। लूना को 2018 के राष्ट्रीय चुनाव में भी बीएनपी का टिकट मिला था, लेकिन अंतिम समय में उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। उनके पति इलियास अली वर्ष 2012 से लापता हैं। यह आरोप है कि उन्हें जबरन लापता किया गया है। सिलहट डिवीजन में बीएनपी की ओर से नामित एकमात्र महिला उम्मीदवार लूना ने स्थानीय नेतृत्व के कुछ वर्गों के विरोध के बावजूद अपने पति के समर्थक जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव प्रचार किया।
लूना ने चुनाव में अपनी जीत को अपने लापता पति और क्षेत्र की जनता को समर्पित करते हुए कहा, “यह जीत इलियास अली के प्रति लोगों के प्रेम और भावनाओं का परिणाम है। मतदाताओं ने उनके नाम का सम्मान करने और अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए वोट दिया।”
रूमीन फरहाना ने बीएनपी से टिकट न मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। ब्राह्मणबारिया-2 से रूमीन फरहाना ने चुनाव में जीत हासिल की।
रूमीन फरहाना एक राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनके पिता ओली अहमद एक प्रसिद्ध भाषा आंदोलनकार और राजनेता के बतौर पहचाने जाते हैं। पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश के निर्माण के बाद उन्हें सम्मान भी मिला था। उन्होंने विधि (law) की पढ़ाई की है और बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट में अभ्यास करने वाली वकील (Barrister) के रूप में काम कर चुकी हैं। उन्होंने अपने संपत्ति विवरण में बताया कि उनके पास कई जमीन और फ्लैट हैं और वे कानूनी, किराये और परामर्श से आय अर्जित करती हैं।
उन्होंने बताया कि उनकी जीत तय होते ही बीएनपी नेतृत्व ने उनसे संपर्क किया था।“ उन्होंने साथ बैठने का सुझाव दिया और इशारा किया कि मुझे सांसद पद से बड़ा कुछ मिल सकता है। मैंने मना कर दिया। उन्होंने मुझे पार्टी से निकाल दिया था। अब यह मेरी पार्टी नहीं है,” उन्होंने कहा।
फरीदपुर-2 से बीएनपी की केंद्रीय संगठन सचिव शमा ओबैद इस्लाम ने 32,953 मतों के अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि जनता का अपार समर्थन उनके प्रति प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद का प्रतीक है। उनके पिता क. म. ओबैदुर रहमान बीएनपी के पूर्व जनरल सेक्रेटरी रहे। वह देश के जानेमाने नेताओं में से एक रहे। उन्होंने राजनीति में अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है।
वर्ष 2024 में शमा को पार्टी के कुछ समर्थकों के बीच झड़प के दौरान एक व्यक्ति की मौत के बाद उठे विवादों के कारण संगठन सचिव के पद से कुछ समय के लिए निलंबित भी कर दिया गया था। हालांक बाद में पार्टी नेतृत्व ने निलंबन वापस ले लिया और उन्हें पद पर बरकरार रखा गया।
फरीदपुर-3 से बीएनपी उम्मीदवार नयाब यूसुफ अहमद ने 24,430 मतों से जीत दर्ज की। उन्होंने मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ाता है। नयाब ने कहा कि उनका प्राथमिक लक्ष्य क्षेत्र का विकास, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना होगा।
नयाब का जन्म एक राजनीतिक परिवार में हुआ। उनके पिता चौधरी कमाल इब्ने यूसुफ बीएनपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री थे। इब्ने यूसुफ ने फरीदपुर-3 सीट से कई बार सांसद के रूप में सेवा की। उनके दादा और पूर्व पीढ़ियां भी सार्वजनिक सेवा और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े रहे हैं, जिससे उनके परिवार की राजनीतिक जड़ें इस क्षेत्र में गहरी हैं।
नाटोर-1 से बैरिस्टर फरजाना शरमीन पुतुल ने अपने दिवंगत पिता और बीएनपी नेता और पूर्व मंत्री फजलुर रहमान पाताल की सीट दोबारा हासिल की। चुनाव के दौरान उन्हें पारिवारिक चुनौती का भी सामना करना पड़ा। उनके बड़े भाई यासिर अरशद राजोन ने पहले निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया था, लेकिन बाद में बहन के समर्थन में नाम वापस ले लिया।
फरजाना शरमीन पुतुल बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट में लॉ प्रैक्टिस करती हैं। उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ लॉ की पढ़ाई की और बाद में लंदन से लॉ से मास्टर की पढ़ाई पूरी की। उनके पिता फजलुर रहमान पाताल एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता थे। फजलुर चार बार नाटोर-1 से सांसद रहे और राज्य मंत्री के बतौर उन्होंने अपनी सेवाएं दी।
झालाकाठी-2 से इसरत सुल्ताना एलेन भुट्टो ने बीएनपी के टिकट पर तीसरी बार जीत दर्ज की। एलेन वर्ष 2000 के उपचुनाव में पहली बार निर्वाचित हुई थीं। वह 2001 में फिर से बीएनपी उम्मीदवार के रूप में जीतीं। हालांकि 2008 के राष्ट्रीय चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सुल्ताना के दिवंगत पति ज़ुलफिकर अली भुट्टो एक लोकप्रिय सांसद थे। यही वजह है कि सुल्ताना को स्थानीय जनता बहुत प्यार करती है और भाभी कहकर बुलाती है। अली भुट्टो की मृत्यु के बाद यह सीट खाली हुई थी।
माणिकगंज-3 से बीएनपी उम्मीदवार अफरोजा खानम रीता ने 1,03,103 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। आजादी के 55 वर्षों में वह इस क्षेत्र से चुनी जाने वाली पहली महिला सांसद बनीं। इस सीट से तीन महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में थीं। अफरोजा खानम रीता वरिष्ठ उद्योगपति और चार बार के सांसद रहे हारूनर रशीद खान मोन्नो की पुत्री हैं, जो पूर्व मंत्री भी रहे।
राजद के कई बड़े नेता और तेजश्री यादव की पत्नी ने कहा था कि बिहार में खेल होना अभी बाकि है। ऐसा होने के डर से ही नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा के नजदीक चाणक्य होटल में रात को रुकवाया।

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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Published on:
14 Feb 2026 04:03 pm

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