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डायबिटीज या शुगर जड़ से खत्म हो सकती है? जानें एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी का सच

Diabetes Reversal Episode 11: अगर आपको भी है डायबिटीज या शुगर की बीमारी और आप भी ढूंढ़ रहे हैं इसी सवाल का जवाब, तो जरूर पढ़ें पत्रिका की शुगर का सच बताने वाली Diabetes Reversal Series के सभी 11 भाग, इन्हीं में छिपा है वो हर जवाब जो आप जानना चाहते हैं...

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Diabetes Reversal Series patrika treatment in ayurveda homeopathy allopathy

Diabetes Reversal Series patrika treatment in ayurveda homeopathy allopathy(photo:AI)

Diabetes Reversal Episode 11: दुनिया की डायबिटीज कैपिटल कहलाने लगा है। बदलती जीवनशैली, तनाव और खानपान की आदतों ने इस बीमारी को हर उम्र तक पहुंचा दिया है। patrika.com पर Diabetes Reversal series के 10 भागों में हमने आपको बताया कि कैसे शुगर ने भारतीयों को अपना निशाना बनाया। अमरीका की जरा सी चूक भारतीय थाली पर भारी पड़ गई। एलोपैथिक डॉक्टर्स से जाना क्या है डायबिटीज या आम भाषा में शुगर कहलाने वाली ये बीमारी। क्या हैं इसके जरूरी टेस्ट, मॉनिटरिंग, इंसुलिन और इंसुलिन इंजेक्शन से लेकर शुगर मॉनिटरिंग के दौरान की जाने वाली गलतियां। लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि डायबिटीज क्या है, कैसे हाई होने पर शरीर को खराब कर देती है, कैसे दवाएं या डाइट इसे रोकती है? बल्कि बड़ा प्रश्न ये भी है कि इलाज के अलग-अलग सिस्टम डायबिटीज या शुगर को कैसे देखते हैं? एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी? इन तीनों पद्धतियों की सोच, शब्दावली और उपचार का तरीका अलग है। पढ़ें संजना कुमार की विशेष रिपोर्ट...

पहले जानें डायबिटीज क्या है?

आधुनिक चिकित्सा के मुताबिक डायबिटीज एक क्रॉनिक मेटाबॉलिक डिजीज है, जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या उसे सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता।

कितने तरह की होती है शुगर की ये बीमारी?

टाइप 1 डायबिटीज- शरीर इंसुलिन नहीं बनाता या बनाना ही बंद कर देता है। ये डायबिटीज आमतौर पर बच्चों और नवजातों में पाई जाने वाली बीमारी है। टाइप 2 डायबिटीज- इंसुलिन रेजिस्टेंस, सबसे आम। इसमें पैंक्रियाज जरूरत से ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है, ताकि ग्लूकोज को एनर्जी में बदला जा सके।

गेस्टेशनल डायबिटीज- गर्भावस्था में होने वाली बीमारी (शुगर)

World Health Organization के अनुसार यह दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है।

अब जानें- क्या कहती है एलोपैथी?

एलोपैथी में डायबिटीज को ब्लड शुगर कंट्रोल की समस्या मानता है, जो एक लाइफस्टाइल डिसीज है

इलाज कैसे होता है?

-ब्लड शुगर और HbA1c की नियमित जांच
-ओरल एंटी-डायबिटिक दवाएं
-जरूरत पड़ने पर इंसुलिन
-डाइट और एक्सरसाइज

Indian Council of Medical Research की गाइडलाइंस के अनुसार टाइप-1 में इंसुलिन अनिवार्य है, जबकि टाइप-2 में दवा और जीवनशैली दोनों ही अहम हैं।

एलोपैथी में 'रिवर्सल' शब्द की जगह अक्सर 'रिमिशन' इस्तेमाल किया जाता है, यानी शुगर स्तर कुछ समय तक सामान्य रहना, लेकिन निगरानी जारी रखना।

आयुर्वेद की नजर में डायबिटीज

मध्यप्रदेश के पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट और एसोशिएट प्रोफेसर डॉ. विवेक शर्मा कहते हैं कि आयुर्वेद में प्रमेह बीमारी सिर्फ शुगर नहीं, बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी को कहा गया है। यहां भी इसे आधुनिक लाइफस्टाइल, शारीरिक गतिविधियां कम होने, मोटापा और भारी भोजन के कारण होने वाली बीमारी माना गया है। इसे वात प्रधान सब कैटेगरी का रोग माना गया है।

इलाज कैसे होता है?

-योग, प्राणायाम, अन्य व्यायाम
-कुछ मामलों में पंचकर्म
-कुछ में खानपान और लाइफस्टाइल चेजेंस

Ministry of AYUSH आयुर्वेद को समग्र स्वास्थ्य पद्धति मानता है, लेकिन साथ ही नियमित जांच की सलाह भी देता है। कुछ छोटे अध्ययनों में HbA1c में सुधार दिखा है, लेकिन बड़े वैज्ञानिक ट्रायल सीमित हैं।

Diabetes Reversal Series patrika: क्या कहता है आयुर्वेद। (photo:patrika)

कॉलेज में अभी चल रही है PHI Research

पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट पीएचआई (इनिशिएटिव प्रोजेक्ट) पर कॉलेज में काम किया जा रहा है। इसके लिए करीब डेढ़ लाख लोगों को इस रिसर्च में शामिल किया गया है। लार्ज स्केल पर स्क्रिनिंग की जा रही है। इनमें मरीजों को शुगर के संदिग्ध, नये शुगर मरीज ऐसे पेशेंट में 1050 लोगों को अलग-अलग 350-350-350 के ग्रुपों में बांटा गया है।

पहले ग्रुप को ऐसे दिया जा रहा है ट्रीटमेंट

इनमें पहले ग्रुप में वो हैं जिनमें पहली बार डाइबिटीज डिटेक्ट हुई है। इन मरीजों का विरेचन प्रोसेस किया जाता है, इनका मोशन के थ्रू बॉयो प्यॉरिफिकेशन किया जाता है। इसके बाद पेशेंट को आयुर्वेद की दवाओं से ट्रीटमेंट शुरू किया।

दूसरे ग्रुप को पंचकर्म नहीं, सीधे दी हैं दवाएं

दूसरा ग्रुप को हमने पंचकर्मा यानी विरेचन का एक प्रोसेस नहीं किया और डायरेक्ट उनकी दवाएं शुरू कीं।

तीसरे ग्रुप का ट्रीटमेंट लाइफस्टाइल और डाइट को बनाया है

वहीं तीसरे ग्रुप को डाटरेक्ट लाइफ स्टाइल और डाइट के थ्रू ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। जल्द ही ये प्रोजेक्ट पूरा होने वाला है। उम्मीद है ये प्रोजेक्ट नई राहत लेकर आएगा। ये एक साल का प्रोजेक्ट है। बीफोर, आफ्टर ट्रीटमेंट का असिस्मेंट रहेगा। यानी इनके डायट्री मोडिफिकेशन और लाइफस्टाइल मोडिफिकेशन पर काम किया जा रहा है।

4-5 साल से यहां डायबिटीज के लिए एक आइसोलेटेड स्पेशिलिटी क्लिनिक है यहां। डायबिटीज को लेकर यहां लंबे समय से काम चलता ही रहता है। इस बीमारी के निदान बताते हैं कि ये लाइफस्टाइल बीमारी है।

डायबिटीज रिवर्सव या रिमिशन पर आयुर्वेद का नजरिया

होम्योपैथ में क्या है डायबिटीज या शुगर?

'होम्योपैथी बीमारी को सिर्फ शुगर लेवल नहीं, बल्कि व्यक्ति की संपूर्ण मानसिक-शारीरिक प्रोफाइल से जोड़कर देखती है। ये एक सिद्धांत पर काम करता है, 'सिमिलिया सिमिलिबस क्युरेंटर' समान से समान का उपचार।'

होम्योपैथी में डायबिटीज लाइफस्टाइल की बीमारी

राजधानी भोपाल के होम्योपैथ एक्सपर्ट डॉ. देवीराम नरवड़े बताते हैं कि पेशेंट के नेचर के अनुसार दवाएं शुरू की जाती हैं। वे बताते हैं कि इंसुलिन बेसिकली एक हॉर्मोन है, पैंक्रियाज की बीटा सेल इसे बनाती हैं। होम्योपैथ की दवाएं इन डिएक्टिव सेल्स को एक्टिव कर देती है। ये दवाएं बीटा सेल्स को हेल्दी कर देती है। इंसुलिन सीक्रेशन के लिए उन्हें प्रेरित करती हैं। तो इससे इंसुलिन हॉर्मोन बनने लगता है और डायबिटीज नॉर्मल स्थिति में आ जाती है।

फिजिकल एक्सरसाइज और डाइट का बहुत बड़ा रोल

जब उनसे पूछा गया कि क्या फिजियोलॉजिकली या डाइट पर भी कोई काम किया जाता है, तो देवीराम ने बताया कि हां इनका भी बड़ा रोल होता है। फिजिकल एक्सरसाइज करवाई जाती है। जिस सेल में ये परेशानी आती है, उन सेल्स के ग्लूकोज को जलाता है या कम करता है, वहीं फिजिकल एक्सरसाइज करने से सेल्स निरंतर एक्टिव बनी रहती हैं। हमारे ऑर्गन पर जब प्रेशर पड़ता है, तो पैंक्रियाज के ये सेल्स हेल्थी और एक्टिव होंगे, रिलेक्स होते हैं, तो वे फिर से काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

बड़ा दावा, होम्योपैथ जड़ से खत्म कर देती है बीमारी

वहीं वैज्ञानिक समीक्षाओं में कहा गया है कि होम्योपैथ में अभी बड़े और उच्च-स्तरीय क्लिनिकल ट्रायल अभी सीमित हैं। होम्योपैथी के 'रिवर्सल' दावों के लिए पर्याप्त ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

तीनों ही पैथियां मानती हैं कि डायबिटीज का इलाज सिर्फ दवा नहीं, बल्कि जीवनशैली का अनुशासन है। वहीं इसके लिए एलोपैथी मजबूत वैज्ञानिक आधार पर खड़ी है। आयुर्वेद समग्र दृष्टिकोण देता है। होम्योपैथी व्यक्तिगत लक्षणों पर ध्यान देती है।

अब सवाल क्या वाकई डायबिटीज 'जड़ से खत्म' हो सकती है?

आज डायबिटीज रिवर्सल सीरीज का अंतिम और 11वां भाग भी पूरा हो गया है। डायबिटीज को जड़ से खत्म करने के दावे फिलहाल उतने मजबूत नजर नहीं आ रहे हैं, वहीं जो रिवर्सल शब्द ट्रेंड में बना हुआ है और मेडिकली ये सही शब्द है रिमिशन यानी डॉक्टर की देखरेख में ही डायबिटीज पर कंट्रोल, वो भी आपकी हेल्दी लाइफ स्टाइल और डाइट और डिसिप्लीन पर ही निर्भर करता है। ऐसे में ये तीन बातें जरूर याद रखें-

-1- टाइप-1 में इंसुलिन को जीवनरक्षक माना है। इसे लेना अनिवार्य है।
-2- टाइप-2 में वजन कम करने और सख्त जीवनशैली से रिमिशन संभव है।
-3- किसी भी पद्धति में दवा अचानक बंद करना जोखिमभरा हो सकता है।

नोट- यह कतई न भूलें कि Diabetes Reversal Series के सभी 11 एपिसोड्स में दी गई जानकारी कई लेखों, रिपोर्ट्स और डॉक्टर्स के साथ ही डायटिशियन जैसे एक्सपर्ट्स से बातचीत के आधार पर दी गई हैं। इन्हें खुद से फॉलो बिल्कुल न करें। आप जो भी इलाज ले रहे हैं, अपने डॉक्टर से लगातार संपर्क में रहें। शुगर की मॉनिटरिंग करते रहें, सही तरीके से शुगर टेस्ट करें और कभी भी अपनी बीमारी का इलाज यू ट्यूब या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तब तक न लें जब तक कि आप उनके बारे में न जानते हों। आपकी ये भूल आपकी जान पर बन सकती है।

हेल्थ और लाइफ स्टाइल से जुड़ी ये जानकारियां आपको कैसी लगीं, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। पत्रिका स्पेशल कैटेगरी में शामिल हेल्थ से जुड़ी ऐसी ही विस्तृत और रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहें patrika.com के साथ।

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लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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