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इस तरह आपके घर आ सकता है साइलेंट किलर… 5 साल पहले शरीर देने लगता है ‘शुगर का अलार्म’

Diabetes Reversible: क्या आपकी गर्दन पर भी है कालापन? शुगर का सच बताती patrika.com की सीरीज diabetes reversible Episode 3 में जानें कैसे आपका शरीर शुगर होने के 5-10 पहले ही आपको देने लगता है अलार्म... लेकिन आप लगातार कर रहे होते हैं इग्नोर...

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Diabetes Reversible patrika series episode 3

Diabetes Reversible patrika series episode 3: वो पांच राज जो बता देंगे आप होने वाले हैं डायबिटीक(photo: AI)

Diabetes Reversible: पिछले दो एपिसोड में हमने भारत को शुगर कैपिटल बनते देखा। मध्यप्रदेश भी इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल अब ये है कि क्या आपको पता है कि आप भी इस खतरे में हैं या नहीं? इसका जवाब जानने के लिए अगर आप भी लैब जाने का समय निकालने की तैयारी करने वाले हैं, तो जरा रुकिए। शुगर का सच बताती पत्रिका की डायबिटीज रिवर्सल सीरीज के एपिसोड 3 में आज आप जानेंगे कैसे आपका शरीर 5 साल पहले ही आपको अलार्म देने लगता है। संजना कुमार की इस रिपोर्ट में जानें वो गुप्त संकेत और एक सेल्फ-चेक का आसान तरीका, जिससे आप अपने शरीर में शुगर के बड़े खतरे की आहट को भांप सकते हैं। patrika.com की इस खास सीरीज में जानें शुगर का सच... संजना कुमार की खास रिपोर्ट...

शरीर के ये अलार्म, कहीं आप तो नहीं कर रहे इग्नोर

राजधानी भोपाल के एक्सपर्ट डॉ. विनोद कोठारी ने बताए, आप के शरीर के वो 5 संकेत जो, 5-10 साल पहले ही आपको कर देते हैं शुगर के लिए अलर्ट...

1-गर्दन का कालापन

    भ्रांति- आपको क्या लगता है, जब आपकी गर्दन काली नजर आती है… मैल जमा हो गया है…

    असली सच- गर्दन पर जमा मैल ही गर्दन को काला नहीं करता। ये इशारा होता है आपके शरीर में बढ़ते इंसुलिन रेजिस्टेंस का। इंसुलिन की अधिकता से त्वचा मोटी और काली हो जाती है। खासतौर पर गर्दन, बगलें और उंगलियों के जोड़ों की त्वचा। एमपी समेत देशभर के ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में ऐसा होना बेहद आम है। लेकिन लोग इसे नजरअंदाज करते हैं।

    2- बेवजह थकान और सुस्ती


    भ्रांति- अगर आप समझते हैं कि कमर दुख रही है, काम ज्यादा हो गया, अब बस… और काम छोड़ आराम करने लगते हैं…या सुस्ती से काम करने लगते हैं…


    असली सच-जब शरीर की कोशिकाएं शुगर को एनर्जी में बदल नहीं पातीं, तो आपको लगातार थकान महसूस होती है। भले ही आपने कुछ खास काम नहीं किया हो। एमपी समेत देशभर में ऐसी सुस्त लाइफस्टाइल इसे बढ़ावा देती है।

    3- चेहरे-गर्दन, आंखों, बगलों पर मस्से (Skin Tags)

    भ्रांति- अरे ये तो उम्र का असर है… आमतौर पर कहीं इसे कुंडली दोषों, तो कहीं गलत मान्यताओं जैसे किसी के ऊपर थूकने से होने वाली त्वचा की बीमारी भी माना जाता है…

    असली सच- गर्दन, पलकों या बगल में अचानक उगने वाले ये छोटे-बड़े मस्से (Skin Tags) भी इशारा है कि आपके शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस शुरू हो चुका है। यानी शरीर में शुगर का लेवल खतरे के रूप बढ़ चुका है।

    4- बार-बार पेशाब आना और प्यास लगना

    भ्रांति- पानी ज्यादा पी लिया होगा… या फिर हम सोचते हैं..बदलते मौसम का असर है…
    असली सच- जब ब्लड में शुगर लेवल बढ़ जाता है, तो किडनी उसे बाहर निकालने की कोशिश करती है। इसलिए आपको बार-बार पेशाब आता है और प्यास भी ज्यादा लगती है।

    5- घावों का देर से भरना

    भ्रांति- कब से इलाज करवा रहे हैं, ये चोट ठीक ही नहीं हो रही है… कहीं आप भी तो नहीं करते इग्नोर

    असली सच- हाई ब्लड शुगर आपकी ब्लड वेसल्स यानी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए आपके शरीर की हीलिंग पावर कम हो जाती है। बड़े ही नहीं, छोटे-छोटे घाव भी भरने में बहुत समय लेते हैं।

    सेल्फ चेक मीटर से जानें डायबिटीज रिस्क (IDRS)

    आप डॉक्टर को दिखाए बिना, लैब में जाए बिना भी सेल्फ चेक मीटर से अपना IDRS यानी इंडियन डायबिटीज रिस्क स्कोर कितना है? IDRS का आसान तरीका है 4 सवालों के जवाब। उम्र, परिवार में शुगर, आपकी कमर का साइज, आपकी मेहनत से जुड़े सवालों के जवाब देकर आप इस खतरे को भांप सकते हैं।

    यहां जानें IDRS का तरीका

    • कॉपी और पेन लेकर बैठिए
    • अब एक पेज को दो कॉलम में बांटते हुए एक लाइन खींचिए।
    • एक कॉलम का टॉपिक है सवाल और दूसरे का नाम रखना है जवाब और नंबर का स्कोर

    सवाल 1- आपकी उम्र कितनी है?

    जवाब-

    • 20-34 साल- 0 नंबर,
    • 35-49 साल-20 नंबर
    • 50 साल से ऊपर-30 नंबर

    सवाल 2- आपके परिवार(माता-पिता, भाई-बहन) में किसी को शुगर है?

    • नहीं-0 नंबर
    • माता-पिता में से किसी एक को- 10 नंबर
    • माता-पिता दोनों को- 20 नंबर

    सवाल 3- आपकी कमर का साइज कितना है?

    • पुरुषों के लिए- <90cm- 0 नंबर, 90-99 cm(10 नंबर), >100cm (20 नंबर)
    • महिलाओं के लिए- <80cm- 0 नंबर, 80-89 cm (10 नंबर), >90cm (20 नंबर)

    सवाल 4- आप कितनी शारीरिक मेहनत करते हैं?

    • रोजाना (1 घंटा चलना/व्यायाम)- 0 नंबर
    • कभी-कभी (सप्ताह में 2-3 बार)- 20 नंबर
    • बिल्कुल नहीं(ज्यादातर बैठे रहना)- 30 नंबर

    इसके बाद अपना नंबर स्कोर जोड़ लें

    • कुल स्कोर- 30 से कम तो आप कम जोखिम में हैं
    • कुल स्कोर- 30-50 तो आप पर खतरा हल्का है, आपको जीवनशैली बदलने की जरूरत है। अगर आप ऐसा नहीं करते तो आप शुगर की चपेट में आ सकते हैं।
    • कुल स्कोर- 60 से ज्यादा- तो हो जाएं सावधान- आप बहुत ज्यादा खतरे में हैं। तुरंत डॉक्टर से मिलें और जांच करवाएं।

    मध्य प्रदेश समेत देशभर में जीवनशैली, खानपान, शारीरिक निष्क्रियता ही हमें इस खतरे में डाल रही है। आज भी हजारों लोग इन अलार्म और IDRS स्कोर को नजरअंदाज कर रहे हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो जान लें शुगर है साइलेंट किलर... इससे बचने में ही समझदारी।

    नोट- बता दें कि IDRS का ये तरीका मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के मशहूर डॉक्टर डॉ. वी. मोहन और उनकी टीम ने विकसित किया है। डॉ. मोहन दुनिया के जाने-माने डॉक्टर्स में से एक हैं। वहीं भारत सरकार की संस्था भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद IDRS को बड़े पैमाने पर स्क्रिनिंग के लिए सबसे भरोसेमंद मानती है। यही नहीं बारत में डायबिटीज पर काम करने वाली सबसे बड़ी संस्था RSSDI इसे गोल्ड स्टैंडर्ड मानती है। यह तरीका WHO से बिल्कुल अलग है। इसे भारतीयों की जांच के लिए प्रभावी और किफायती माना गया है।

    क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में ही हैं आपके दोस्त और शुगर के दुश्मन? अगर नहीं तो इन्हें जानने के लिए हेल्थ के इस सफर में बने रहिए पत्रिका.कॉम के साथ। शुगर का सच बताती Diabetes Reversible Series के Episode 3 में आप जानेंगे वो पारंपरिक भोजन और पुराने नुस्खे, जो आपको इस बीमारी से दूर रख सकते हैं।

    राजद के कई बड़े नेता और तेजश्री यादव की पत्नी ने कहा था कि बिहार में खेल होना अभी बाकि है। ऐसा होने के डर से ही नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा के नजदीक चाणक्य होटल में रात को रुकवाया।

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    लव सोनकर

    लव सोनकर

    लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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