
लंदन के ब्रेंट में पान की पीक लगभग हर जगह नजर आ रही है। (फोटो डिजाइन: पत्रिका)
Paan Stains London: सड़कों पर लगे पेड़ों की जड़ें और तने गहरे लाल रंग में रंगे हुए हैं। यही रंग फोन बूथों, लैम्प पोस्टों, पोस्ट बॉक्स के निचले हिस्सों, दीवारों, दुकानों के शटरों और वेम्बली के कोनों पर भी दिखाई देता है। क्या भारत की गुटखा खाने वाली बीमारी लंदन में भी फैल गई है। लंदन, एक ऐसा शहर है जिसे दुनिया के ऐसे शहरों में गिना जाता है जहां के सख्त नियमों और क़ानून व्यवस्था की मिसालें दी जाती हैं। मगर कुछ समय से लंदन के ब्रेंट में पान की थूक की लकीरें लगभग हर जगह नजर आती हैं, जिससे स्थानीय लोग बेहद परेशान और नाराज हैं। स्थानीय प्रशासन इसे न सिर्फ सफाई, बल्कि स्वास्थ्य और सिविक सेन्स से जुड़ी गंभीर समस्या मान रहा है।

लंदन में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है। इसका असर वहां की संस्कृति, खानपान और त्योहारों में साफ दिखता है, लेकिन कई बार भारत की कुछ बुरी आदतें भी विदेशों तक पहुंच जाती हैं। तकरीबन 2 महीने पहले सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा रही थी। पिछले साल ब्रिटेन की एक पत्रकार ब्रूक डेविस ने लंदन के ब्रेंट और वेम्बली में टहलते समय 30 मिनट के रास्ते में लगभग 50 पान के दाग देखे और गिने। उन्होंने पान के धब्बों की फोटोज और वीडियोज को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया था। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा था कि ये धब्बे पान थूकने से होते हैं, जिससे यहां के निवासियों और शॉपकीपर्स की चिंता बढ़ गई है।
दक्षिण एशियाई समुदाय में प्रचलित पान की आदत अब ब्रिटेन की सड़कों पर भी गंदगी और स्वास्थ्य चिंता का कारण बन रही है।
अब सोचने वाली बात ये है कि इतने नियमों वाले शहर में पान थूकने की समस्या कैसे पैदा होती है, क्या कूड़ेदान कम लगते हैं, दूसरे देश अपने शहर कैसे साफ रखते हैं, जबकि शहर की कई काउंसिल्स हर साल सड़कों की सफाई पर सैकड़ों मिलियन पाउंड खर्च करती हैं, और कई संस्थाएं थूकने, कचरा फैलाने और अन्य असुविधाजनक एक्टिविटीज पर हजारों पाउंड का जुर्माना लगाती हैं।
इसमें की दोराय नहीं है कि लंदन की सड़कों तक पान उसी तरह पहुंचा जैसे प्रवासी अपने खान-पान की परंपराएं साथ लाते हैं। ये बहुत आम बात है कि भारतीय, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और नेपाली समुदाय दशकों से यूके (United Kingdom) में रह रहे हैं और अगर भारतियों की बात की जाए तो यहां के अधिकतर लोगों को खाना खाने के बाद पान खाने की आदत होती है। मगर अगर बात की जाए लंदन की तो वहां पान खुले बाजारों में नहीं मिलता, बल्कि दक्षिण एशियाई बहुल इलाकों, जैसे साउथहॉल, वेम्बली, ब्रेंट, इलफोर्ड, टूटिंग और ईस्ट हैम जैसी जगहों पर मिलता है। छोटी एशियाई किराना दुकानों में पान के पत्ते, सुपारी और पान मिक्स काउंटर के पीछे रखे जाते हैं और ये सभी तंबाकू मुक्त होते हैं इसलिए ये गैर-कानूनी नहीं माने जाते हैं। अब जबकि ये खुले तौर पर बाजारों में नहीं बिकते हैं इसलिए वहां के लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है। लेकिन समस्या तब खड़ी होती है जब कुछ लोग पान को चबाने के बाद पब्लिक प्लेसेस पर इसको थूक देते हैं।
पान और गुटखे की समस्या के निपटने के लिए लंदन की कई काउंसिल्स दाग-धब्बों को हटाने के लिए जेट स्प्रे का इस्तेमाल करने वाले ठेकेदारों को काम पर रखने के लिए सालाना 30,000 पाउंड (तकरीबन 38 लाख रुपये) खर्च करती हैं, फिर भी सड़कों पर जमने वाले इन दाग-धब्बों की सफाई सीमित ही रहती है। इस समस्या से लंदन के वेम्बली और ब्रेंट जैसी जगहों के अधिकतर प्रवासी दुकानदार और लोग भी बहुत परेशान हैं।
ये तो बात हुई लन्दन में पान की समस्या पर, अब बात करते हैं कि लंदन और दक्षिणी देशों पान खाना कितना आम है और सार्वजानिक स्थानों पर पान थूकने पर कितना जुर्माना है।
आपको बता दें कि दक्षिण एशिया में पान आदत के रूप में खाया जाता है और इस पर न ही कोई खास नियम क़ानून हैं और ना ही कोई बड़ा जुर्माना, जबकि यूके में इसे कानूनी उल्लंघन माना जाता है। इस अंतर को विस्तार से समझिये।
| क्षेत्र | देश | पान सेवन कितना आम | सार्वजनिक थूकने पर नियम / जुर्माना |
|---|---|---|---|
| दक्षिण एशिया | भारत | बहुत आम; उत्तर, पूर्व, मध्य भारत और तटीय राज्य (महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल) | नगर निगमों में जुर्माना 100 रुपये –1,000 रुपये या उससे ज्यादा, कई राज्यों में गुटखा प्रतिबंध, प्रवर्तन असमान |
| पाकिस्तान | शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आम | शहरों में सार्वजनिक थूकना दंडनीय; जुर्माना सीमित/स्थानीय | |
| बांग्लादेश | सामाजिक परंपरा का हिस्सा | कुछ नगरों में जुर्माना; प्रवर्तन कमजोर | |
| नेपाल | तराई व शहरी इलाकों में प्रचलित | स्थानीय नियम; कम सख़्ती | |
| श्रीलंका | ग्रामीण व बुज़ुर्ग आबादी में | सार्वजनिक स्थानों पर थूकना दंडनीय (स्थानीय कानून) | |
| भूटान | सीमित, कुछ समुदायों में | सख़्त स्वच्छता नियम, कम सहनशीलता | |
| यूनाइटेड किंगडम | यूनाइटेड किंगडम | परंपरागत रूप से आम नहीं; मुख्यतः प्रवासी दक्षिण एशियाई समुदायों तक सीमित | सार्वजनिक थूकना/गंदगी कानूनी अपराध; £80–£150 (9,883.90 से 18,532.32 रुपये तक) फाइन, भुगतान न करने पर £1,000 (1,23,548.40 रुपये) तक और आपराधिक रिकॉर्ड संभव |
चलिए अब एक नजर डालते हैं लन्दन और दक्षिणी एशियाई देशों जैस भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका में होने वाली पान उत्पादों की खपत पर।
| क्षेत्र | खपत की व्यापकता | इस्तेमाल की प्रकृति |
|---|---|---|
| लन्दन/यूके सामान्य आबादी | कम | बहुत कम |
| लन्दन के South Asian समुदाय | मध्यम-उच्च | पान, तंबाकू-पूर्ण उत्पाद |
| भारत | उच्च (कुछ क्षेत्रों में विशेष रूप से) | पान मसाला, गुटखा, पान |
| पाकिस्तान | मध्य-उच्च | पान/गुटखा और अन्य SLT |
| बांग्लादेश | उच्च | पान संस्कृति में व्यापक |
GATS-2 (2016–17) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 12.1% वयस्क (15 साल से अधिक उम्र) किसी न किसी रूप में पान मसाला का सेवन करते हैं, यानी हर 100 में करीब 12 लोग। इसके अलावा इसमें लैंगिक अंतर भी साफ दिखता है, मतलब कि पुरुषों में यह खपत लगभग 17.8% है, जबकि महिलाओं में करीब 6.0%। वहीं, तंबाकू-युक्त पान मसाला/गुटखा का उपयोग करने वाले वयस्कों का अनुपात लगभग 9% है, यानी हर 100 में करीब 9 लोग। .
| श्रेणी | अनुमान/आंकड़ा |
|---|---|
| भारत में पान मसाला users | 12.1% वयस्क लोग |
| पान मसाला + तंबाकू (गुटखा) | 9% वयस्क लोग |
| स्मोकलेस तंबाकू कुल उपभोग | 25.9% वयस्क |
| मुँह के कैंसर में तंबाकू/गुटखा का योगदान | 62% मामले |
| भारत में विश्व की कुल ओरल कैंसर स्थितियों का हिस्सा | लगभग 1/3 विश्व के मामलों में भारत शामिल |
| श्रेणी | राज्य | खपत का स्तर | प्रमुख कारण / ट्रेंड |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | बहुत ज्यादा | गुटखा, खैनी, पान मसाला का व्यापक उपयोग |
| 2 | बिहार | बहुत ज्यादा | कम कीमत, सामाजिक स्वीकार्यता |
| 3 | झारखंड | अधिक | सुपारी + तंबाकू का प्रचलन |
| 4 | ओडिशा | अधिक | पान-तंबाकू सांस्कृतिक परंपरा |
| 5 | छत्तीसगढ़ | अधिक | कम उम्र में शुरुआत के मामले |
| 6 | नगालैंड | अधिक | सुपारी आधारित उत्पादों का चलन |
| 7 | महाराष्ट्र | मध्यम | शहरी में पान मसाला, ग्रामीण में खैनी |
| 8 | मध्य प्रदेश | मध्यम | प्रतिबंध के बावजूद अवैध बिक्री |
| 10 | पश्चिम बंगाल | मध्यम | पान-सुपारी सामाजिक संस्कृति |
अगर भारत की बात की जाए भारत में पान, पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों के दुष्प्रभाव कई स्तरों पर देखे जाते हैं, इनमें प्रमुख स्वास्थ्य, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव हैं।

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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Published on:
13 Feb 2026 06:06 pm
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