
जठिया देवी सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर ग्रामीण डरे हुए हैं।
Shimla Satellite township: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ग्रामीण इलाकों में पड़ने वाले 9 गांवों का अधिग्रहण का काम शुरू होने जा रहा है। राज्य की कांग्रेस सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य राजधानी शिमला पर बढ़ रही आबादी का बोझ कम करना है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि टाउनशिप का यह प्रोजेक्ट (Shimla satellite town project) उनकी पैतृक कृषि भूमि और मंदिरों के लिए खतरा पैदा करने वाला है।
Jathia Devi township Plan : राजधानी शिमला के आठ गांवों मझौला, शिल्डू, दनोखर, आंजी, शिल्ली बागी, पंटी, कयारगी, चानन और सोलन जिला की ममलीग तहसील के मझियारी गांव में जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।
हिमाचल सरकार ने जठिया देवी सैटेलाइट टाउनशिप (Jathia Devi township Plan) के लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। पहले चरण में 119 फ्लैट तैयार किए जाएंगे। इसके तहत वन बीएचके, टू बीएचके और थ्री बीएचके फ्लैट तैयार किए जाएंगे। हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (HIMUDA) इस टाउनशिप के तहत यहां विला और इको रिजॉर्ट का भी निर्माण कराएगा। यह प्रदेश की पहली नियोजित पर्वतीय बस्ती होगी।
जठिया देवी सैटेलाइट टाउनशिप शिमला शहर से महज 14 किलोमीटर और जुब्बरहट्टी स्थित जुबली हवाई अड्डे से 2 किलोमीटर दूरी पर बसाने की योजना है। लगभग 1,374 करोड़ रुपये की लागत इस परियोजना को साकार किया जाना है। हालांकि, हिमुडा की ओर से प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप की चर्चा वर्ष 2014 से चल रही है। हालांकि अब जब हिमुडा ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 5 और नियम 8 के तहत भूमि अधिग्रहण के नोटिस चिपकाए तो इन नौ गांवों के निवासियों में चिंता की लहर दौड़ गई।
13.36 हेक्टेयर में वाणिज्यिक क्षेत्र और 15.7 हेक्टेयर में औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ लगभग 33 हेक्टेयर में फैले हरित क्षेत्र और नदी तट क्षेत्र की योजना बनाई गई है। टाउनशिप में स्मार्ट सड़कें, उपयोगिता क्षेत्र और हेलीपैड कनेक्टिविटी की सुविधा होगी।
अधिकारियों का कहना है कि शिमला हवाई अड्डे से 3 से 4 किलोमीटर और शिमला आईएसबीटी से 20 से 22 किलोमीटर दूर स्थित इस स्थल को सुगम पहुंच और भूभाग की उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए चुना गया है। प्रथम चरण की योजनाओं में 895 आवासीय इकाइयां शामिल हैं।
जठिया देवी के अशोक समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि हमें यह बताया गया था कि हमारी सारी ज़मीनें, जिनमें कृषि भूमि और घर भी शामिल हैं, अधिग्रहित कर ली जाएंगी। असल में, सरकार की योजना नए लोगों के लिए घर बनाने की है, जबकि यहां पीढ़ियों से रह रहे लोगों को विस्थापित किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हमें सरकार और सरकारी अधिकारियों की बातों का कोई भरोसा नहीं है।
इस प्रस्तावित टाउनशिप के मुद्दे पर जाठिया देवी के स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री और शिमला के विधायक विक्रमादित्य सिंह से पिछले दिनों मिला था। ग्रामीणों ने मंत्री से मिलकर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराईं। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को यह भरोसा दिलाया है कि इस मामले में किसी भी तरह का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा और सभी पहलुओं पर गहराई से विचार किया जाएगा।
विक्रमादित्य सिंह ने मीडिया से कहा कि शिमला शहर में भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी होने के कारण यहां अधिकांश सरकारी कार्यालय और कमर्शियल गतिविधियां केंद्रित हैं। शिमला में पर्यटकों के आवाजाही भी काफी है। पर्यटन से जुड़े रोजगार के चलते शिमला शहर में यातायात और जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी दबाव को कम करने के उद्देश्य से शिमला से बाहर नया शहर बसाने का प्रस्ताव वर्षों से विचाराधीन है।
उन्होंने बताया कि जाठिया देवी में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के लिए केंद्र सरकार को “हिल टाउनशिप” के नाम से प्रस्ताव भेजा गया है, हालांकि अभी तक इसकी औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि लैंड पूलिंग मॉडल के तहत हिमुडा के माध्यम से विकास की संभावनाओं पर विचार कर रही है। मंत्री के अनुसार हिमुडा के पास पहले से ही लगभग 282 बीघा भूमि उपलब्ध है, जिसे पहले चरण में विकसित किया जाएगा।
नोटिस में 29 दिसंबर, 2025 तक सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) अध्ययन पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गईं। उस रिपोर्ट के अनुसार, शिमला के आठ ग्रामीण गांवों - चानन, पांती, आंजी, शिल्ली बागी, मझोला, शिलरू, धनोकरी और क्यारागी और एक सोलन के गांव मंजियारी में 249 हेक्टेयर (लगभग 2,959 बीघे) की संभावित अधिग्रहण के लिए पहचान की गई है।
हिमुडा के सीईओ और सचिव सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि किसी को भी अपनी जमीन छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हम स्थानीय लोगों की इच्छा के विरुद्ध जमीन का कोई भी टुकड़ा अधिग्रहित नहीं करने जा रहे हैं। 29 दिसंबर की सुनवाई तो सिर्फ पहला कदम था। सुझाव, आपत्तियां और प्रतिक्रियाएं प्रक्रिया का हिस्सा हैं।'
शिमला (ग्रामीण) के उप-मंडल मजिस्ट्रेट मनजीत शर्मा ने मीडिया से कहा कि 29 दिसंबर को जठिया देवी में आयोजित जन सुनवाई में कई महिलाओं सहित लगभग 300 ग्रामीण उपस्थित थे। उन्होंने कहा, 'यह केवल एक मसौदा रिपोर्ट है, अंतिम निर्णय नहीं। अधिग्रहण की प्रक्रिया उचित प्रक्रिया और सहमति के बाद ही आगे बढ़ सकती है।'
शिमला के निवासी और हिंदी के वरिष्ठ कथाकार एस. आर हरनोट बताते हैं, शिमला शहर को अंग्रेजों ने 10 हजार लोगों के हिसाब से बनाया था। आज की इसकी आबादी 1 लाख से ज्यादा हो गई। शहर पर आबादी का बहुत दबाव तो बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। गांव के उजड़ने की बात पर वह कहते हैं कि यह तो होता ही आया है। गांव की बलि शहर के विकास के लिए हमेशा से चढ़ती आई है।
शिमला में कैनेडी हाउस (Kennedy House) को 1822 में एक स्कॉटिश सिविल सेवक और ब्रिटिश एजेंट चार्ल्स प्रैट कैनेडी (Charles Pratt Kennedy) ने बनाया गया था। यह शिमला में बना पहला पक्का घर था। इसके बाद अंग्रेजों ने शिमला को अपना ग्रीष्मकालीन मुख्यालय बनाया।
Published on:
09 Jan 2026 08:30 am
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