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Tobacco Ban in Odisha: ओडिशा में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में बढ़ रही स्मोकिंग की लत, देश में हर घंटे तंबाकू से होती हैं 154 मौतें

Ban on Tobacco : ओडिशा में 2013 में तंबाकू पर प्रतिबंध लगाया जा चुका था लेकिन सरकार ने इस दिशा में एक और सख्त कदम बढ़ाया है। राज्य में तंबाकू या निकोटीन युक्त सभी पदार्थों पर हर तरह की पाबंदी लगा दी गई। देश और दुनिया में तंबाकू से होने वाली मौतों का आंकड़ा डराने वाला है। आइए पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।

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Tobacco Ban

Tobacco Ban in Odisha

Tobacco Ban in Odisha : ओडिशा राज्य में तंबाकू या निकोटीन युक्त सभी खाद्य उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण या बिक्री पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसमें गुटखा, पान मसाला, सुगंधित खाद्य उत्पाद और चबाने वाले खाद्य उत्पाद शामिल हैं।

ओडिशा सरकार ने यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लिया है और तंबाकू के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में बढ़ती चिंताओं के बाद लिया गया है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के दूसरे राउंड में ओडिशा की 42 फीसदी आबादी स्मोकलेस तंबाकू इस्तेमाल करती पाई गई है, जो राष्ट्रीय दर से दोगुना है। तेजी से बढ़ रहे स्मोकलेस तंबाकू का सेवन भी सरकार की निर्णय में सहायक रहा।

ओडिशा में 2013 में गुटखा की बिक्री पर लगा था बैन

वर्ष 2013 में ओडिशा ने तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस दिशा में राज्य ने एक और मजबूत कदम उठाते हुए तंबाकू और सभी निकोटिन उत्पादों पर बैन लगा दिया है। राज्य भर में सभी तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के उत्पादन, निर्माण, पैकेजिंग और स्टोर करने पर पाबंदी लगा दिया है।

कैंसर के बढ़ते मामले बने स्वास्थ्य विभाग की चिंता की वजह

ओडिशा के हेल्थ डिपार्टमेंट का कहना है कि इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने चबाने वाले तंबाकू, च्यूइंग गम, गुटखा और दूसरे तंबाकू प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल को कैंसर के मुख्य कारणों के तौर पर पहचाना है। इसके साथ ही, पान मसाला, पान, तंबाकू के पत्ते जैसे स्मोकलेस तंबाकू प्रोडक्ट्स भी सेहत के लिए बहुत खराब हैं।

(Photo: IANS)

सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में दिया था ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में तंबाकू को लेकर एक प्रमुख फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने तंबाकू उत्पादों पर 85% भाग पर तस्वीर सहित चेतावनी को अनिवार्य ठहराया। दुनिया में भारत से पहले 85% भाग पर तस्वीर सहित चेतावनी का फैसला कहीं नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, 'तंबाकू का सेवन जानलेवा है, ऐसे में लोगों को इसके खतरे के बारे में पूरी जानकारी देना सरकार का दायित्व है।' इस फैसले का उद्देश्य युवाओं और नए उपभोक्ताओं को तंबाकू से दूर रखने की कोशिश था। फैसले में जन स्वास्थ्य को व्यापा​रिक हितों को सबसे ऊपर रखा गया था।

1 फरवरी 2026 से तंबाकू वाले उत्पादों पर जीएसटी बढ़ेगा

पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू युक्त अन्य उत्पादों पर 1 फरवरी से 40% वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगेगा। वहीं, बीड़ी पर 18% जीएसटी लगेगा। इसके अतिरिक्त, पान मसाला और तंबाकू से संबंधित उत्पादों पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर भी लगाया जाएगा।

ओडिशा के बारे में क्या कहता है NFHS-5 सर्वे?

एनएफएचएस-5 (NFHS-4) सर्वेक्षण के अनुसार, ओडिशा में तंबाकू का सेवन राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु की 38.41% आबादी तंबाकू का सेवन करती है। देश में इस आंकड़े के साथ ओडिशा देश में छठे स्थान पर है। ओडिशा के बारे में एक और तथ्य चौंकाने वाला यह है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ध्रूमपान की लत बढ़ रही है। एनएफएचएस-4 (NFHS-4) सर्वेक्षण में ओडिशा में 55.9 फीसदी पुरुष धूम्रपान करते थे, जो बाद के सर्वे में घटकर 51. 6 प्रतिशत रह गया। वहीं, एनएफएचएस-4 में 17.3 फीसदी महिलाएं तंबाकू का धूम्रपान करती पाई गई थीं, लेकिन अगले सर्वे में ऐसा करने वाले महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर 26 फीसदी हो गया।

(Photo: IANS)

राज्य में खैनी सबसे ज्यादा पॉपुलर

ओडिशा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए एक आंकड़े के अनुसार, प्रदेश में खैनी और तंबाकू का सर्वाधिक होता है। तंबाकू का सेवन करने वालों में 16.9 पुरुष और 14.9 फीसदी महिलाएं होती हैं।

स्कूली छात्र-छात्राएं भी तंबाकू की जद में

ओडिशा में वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण (GYTS) ने एक सर्वे कराया था। इस सर्वे के अनुसार, राज्य में स्कूल जाने वाले लगभग 6.2 प्रतिशत छात्र तंबाकू का सेवन किसी न किसी रूप में करते हैं। इन छात्रों में 7 प्रतिशत लड़के और 5.5 प्रतिशत लड़कियां शामिल हैं। देश में करीब 8.5 प्रतिशत स्टूडेंड तंबाकू का उपयोग करते हैं। ग्लोबल यूथ टौबैको सर्वे यह सर्वे 13-15 वर्ष के स्टूडेंट्स के बीच आयोजित कराती है। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो की जानकारी के अनुसार, 13-15 वर्ष की आयु के स्कूली बच्चों में तंबाकू का सेवन 14.6% से घटकर 8.5% हो गया है।

ग्रामीण इलाकों में होता है ज्यादा तंबाकू का इस्तेमाल

राज्य में 55 प्रतिशत पुरुष और 26 प्रतिशत महिलाएं चबाने वाले तंबाकू और निकोटीन उत्पादों का उपयोग करती हैं। कुल तंबाकू और निकोटीन प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल का 45 फीसदी ग्रामीण इलाकों में होता है। वहीं शहरी इलाकों में सिर्फ 36% लोग इनका इस्तेमाल करते हैं।

देश में तंबाकू से सालाना 13-14 लाख लोगों की मौत होती है

Tobacco deaths annually in India : पिछले एक दशक का आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में हर साल तंबाकू के सेवन से प्रतिवर्ष लगभग 13 से 14 लाख तक मौतें होती हैं। इन मौतों के लिए धूम्रपान (bidis, cigarettes)और धूम्रपान रहित तंबाकू (Gutkha, Khaini Etc.) दोनों ही जिम्मेदार हैं। भारत में कुल मौतों का यह लगभग 9.5% के आसपास बैठता है। तंबाकू कैंसर cancer, हृदय रोग heart disease और सीओपीडी COPD जैसी बीमारियों की वजह बनता है।

भारत: तथ्य और आंकड़े

  • तंबाकू से हर रोज करीब 3700 और हर घंटे 154 लोगों की मौत होती है
  • लगभग 29% वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं।
  • 50% से अधिक कैंसर तंबाकू के सेवन से जुड़े हैं।

Tobacco Deaths in World : दुनिया में तंबाकू के सेवन से प्रतिवर्ष 80 लाख से अधिक मौतें होती हैं, जिनमें से 70 लाख से अधिक मौतें सीधे सेवन से और लगभग 13 लाख मौतें अप्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान करने से होती हैं।

दुनिया : तथ्य और आंकड़ें

  • 1.3 से 1.6 मिलियन मौतें सालाना उन लोगों की होती हैं जो प्रत्यक्ष तौर पर धूम्रपान नहीं करते हैं।
  • तंबाकू के चलते 20 से अधिक प्रकार के कैंसर होने का जोखिम रहता है।

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लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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