
अमेरिका ने सीरिया से आतंकियों को इराक शिफ्ट किया।(फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट, डिजाइन:पत्रिका)
Islamic State fighters: मध्य पूर्व (Middle East) में एक बड़े और नाटकीय घटनाक्रम में, अमेरिकी सेना ने सीरिया से अपनी वापसी का रास्ता साफ़ कर दिया है। अमेरिका ने सीरिया की जेलों में बंद लगभग 5,700 संदिग्ध लड़ाकों इस्लामिक स्टेट(ISIS Detainees Transfer) को हवाई और जमीनी रास्ते से इराक की सरकार को सौंप दिया (US Troops Withdrawal) है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह सीरिया में अमेरिकी मिशन के अंत की शुरुआत है। अधिकारियों ने बताया कि यह महा-अभियान 21 जनवरी को शुरू हुआ था और गुरुवार रात को पूरा हुआ। अमेरिकी सैनिकों ने सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF Kurdish Forces) और इराकी सेना के साथ मिल कर इन खतरनाक कैदियों को शिफ्ट किया। इसके लिए विशेष विमानों और हथियारों से लैस गाड़ियों के काफिले का इस्तेमाल किया गया। इन कैदियों को अब बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित 'अल-कर्ख' जेल (पूर्व में कैम्प क्रॉपर) में रखा जाएगा। इराक की न्यायिक परिषद के अनुसार, इन कैदियों में लगभग 3,000 सीरियाई नागरिक भी शामिल हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीरिया से बचे हुए लगभग 1,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाना चाहते हैं। ट्रंप ने सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (जो दिसंबर 2024 में बशर अल-असद को हटाने के बाद सत्ता में आए) के साथ तालमेल बढ़ाया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि वे सीरिया को स्थिर और शांत देखना चाहते हैं। हालांकि, इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स ने चेतावनी दी है कि ISIS दोबारा सिर उठा सकता है और पश्चिमी देशों पर हमले की साजिश रच सकता है।
सालों तक अमेरिका का साथ देने वाले कुर्दिश समूह (SDF) के लिए यह एक बड़ा झटका है। SDF के प्रतिनिधि अब्दुल करीम उमर ने इसे "अंतरराष्ट्रीय विश्वासघात" करार दिया है। उनका कहना है कि कुर्द लोग अंतरराष्ट्रीय समझौतों के शिकार बने हैं। दरअसल, अमेरिका द्वारा सीरियाई राष्ट्रपति शरा के बलों को इलाके का नियंत्रण सौंपने से कुर्द नाराज हैं। 19 जनवरी को शरा की सेना के हमले के कारण जेलों से लगभग 200 कैदी भाग भी गए थे, जिससे वाशिंगटन में हड़कंप मच गया था।
इराकी सुरक्षा सलाहकार हुसैन अलावी का कहना है कि इराक इन कैदियों को संभालने में सक्षम है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती होगी। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने निजी तौर पर बगदाद को चेतावनी दी थी कि अगर ये आतंकी शरा सरकार के पास रहते, तो वे रिहा हो सकते थे या भाग सकते थे, जिससे इराक की सुरक्षा को खतरा होता। अब गेंद इराक के पाले में है।
व्हाइट हाउस: राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनकी टीम ने "सीरिया के साथ मिल कर एक बड़ा मसला हल किया है और कई जानें बचाई हैं।" उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति शरा को "टफ गाय" बताते हुए उनकी तारीफ की है।
SDF (कुर्द बल): कुर्द नेताओं ने इसे पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया है। उनका कहना है कि अमेरिका की नई दोस्ती के चलते कुर्दों की कुर्बानी को नजरअंदाज किया गया है और शरा की सेना क्षेत्र में आक्रामकता दिखा रही है।
इराक: इराकी अधिकारी सतर्क हैं और अन्य देशों से अपील कर रहे हैं कि वे अपने-अपने देशों के ISIS कैदियों को वापस ले लें, ताकि इराक पर बोझ कम हो।
पूर्ण वापसी: आने वाले हफ्तों में अमेरिका अपने बाकी बचे सैन्य अड्डों को भी सीरियाई राष्ट्रपति शरा की सेना को सौंप सकता है। तनफ गैरीसन का नियंत्रण पहले ही सौंपा जा चुका है।
सुरक्षा का सवाल: क्या इराकी जेलें इतने खूंखार आतंकियों को संभाल पाएंगी? और क्या सीरिया में बचे हुए 2,000 अन्य कैदियों का ट्रांसफर शांतिपूर्ण होगा? इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
ISIS का खतरा: इंटेलिजेंस एजेंसियों की नजर इस बात पर होगी कि क्या इस उथल-पुथल का फायदा उठाकर ISIS फिर से संगठित होने की कोशिश करता है।
अमेरिका ने अपनी विदेश नीति में बड़ा यू-टर्न लिया है। कल तक जो कुर्द (SDF) अमेरिका के सबसे भरोसेमंद साथी थे, आज उन्हें किनारे कर दिया गया है। वहीं, अहमद अल-शरा, जिनका अतीत खुद एक जिहादी संगठन (अल-कायदा) से जुड़ा रहा है, अब अमेरिका के नए साझेदार हैं। यह बदलाव मध्य पूर्व में शक्तियों के संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है। सवाल यह है कि क्या एक पूर्व उग्रवादी (शरा) वास्तव में ISIS को रोक पाएगा, या यह फैसला अमेरिका को भारी पड़ेगा?
(वॉशिंगटन पोस्ट का यह आलेख patrika.com पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है।)
राजद के कई बड़े नेता और तेजश्री यादव की पत्नी ने कहा था कि बिहार में खेल होना अभी बाकि है। ऐसा होने के डर से ही नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा के नजदीक चाणक्य होटल में रात को रुकवाया।

क्या आपको लगता है कि यह टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा?

लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Updated on:
14 Feb 2026 02:30 pm
Published on:
14 Feb 2026 01:30 pm

टिप्पणियाँ (0)
टिप्पणियाँ (0)