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Mamta Kulkarni को महामंडलेश्वर पद से क्यों हटाया गया? जानिए तीन प्रमुख कारण, शंकराचार्य पर बयान बर्दाश्त नहीं!

Mamta Kulkarni Mahamandaleshwar News: किन्नर अखाड़ा ने फिल्म अभिनेत्री रहीं ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से हटा दिया है।

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अखाड़े की प्रमुख महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और ममता कुलकर्णी फोटो सोर्स insta अकाउंट

Mamta Kulkarni Mahamandaleshwar: किन्नर अखाड़ा ने फिल्म अभिनेत्री रहीं ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से हटा दिया है। करीब एक साल तक इस पद पर रहीं ममता के कई बयानों ने विवाद खड़ा किया। अखाड़े का कहना है कि बार-बार समझाने के बावजूद वह संयम नहीं रख सकीं।

किन्नर अखाड़ा ने ममता कुलकर्णी को अखाड़े से निष्कासित करने का फैसला लिया है। वह करीब 1 साल 3 दिन तक महामंडलेश्वर की भूमिका में रहीं। इस दौरान उनके तीन बयान सबसे ज्यादा विवादों में रहे। पहला बयान डॉन दाऊद इब्राहिम को लेकर, दूसरा म्यूजिक डायरेक्टर ए.आर. रहमान से जुड़ा और तीसरा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दिया गया बयान।

ममता कुलकर्णी का अखाड़े से कोई संबंध नही

27 जनवरी को किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने साफ कहा कि अब ममता कुलकर्णी का अखाड़े से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि ममता न तो अखाड़े की अधिकारी हैं। और न ही सदस्य। उनके किसी भी बयान से अखाड़े का कोई लेना-देना नहीं है।

ममता कुलकर्णी ने खुद इस्तीफा दिया

इसके बाद ममता कुलकर्णी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने खुद महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दिया है। उनका कहना था कि सच्चा महंत या महामंडलेश्वर बनने के लिए वर्षों तक ध्यान, तपस्या और कठोर आध्यात्मिक अनुशासन की जरूरत होती है। जिसे उन्होंने करीब से महसूस किया।

महाकुंभ में सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए यह पद दिया गया

आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ममता को यह पद महाकुंभ के दौरान इसलिए दिया गया था। ताकि वह सनातन धर्म के प्रचार में सहयोग करें। लेकिन उनके व्यवहार और बयानों से ऐसा नहीं लगा कि वह इस जिम्मेदारी को निभा पा रही हैं। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि अखाड़ा सभी के लिए खुला है। चाहे वह महिला हों, पुरुष हों या किन्नर। लेकिन किसी को भी गलत या विवादित बयान देने की छूट नहीं दी जा सकती। ममता को कई बार समझाया गया। रोका गया, लेकिन वह बात नहीं समझ सकीं।

संत और शंकराचार्य पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं

उन्होंने बताया कि अखाड़े में किसी भी बड़े फैसले से पहले पदाधिकारियों से चर्चा होती है। ममता के दाऊद इब्राहिम को लेकर दिए बयान पर भी उन्हें चेतावनी दी गई थी। बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दिए गए बयान को संत समाज का अपमान माना गया। इसके बाद सभी पदाधिकारियों की सहमति से उन्हें अखाड़े से बाहर करने का निर्णय लिया गया। डॉ. त्रिपाठी ने साफ कहा कि संतों और शंकराचार्यों पर टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं है। बार-बार चेतावनी के बावजूद बयानबाजी जारी रहने के कारण अखाड़े को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।