
650 करोड़ से ज्यादा का भुगतान नहीं (photo source- Patrika)
Ayushman Bharat Scheme: आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी व निजी अस्पतालों में कैशेलस इलाज फिर डगमगाने लगा है। अकेले आंबेडकर अस्पताल को 70 करोड़ और डीकेएस का 34 करोड़ बाकी है। निजी अस्पतालों की बात करें तो कुल 650 करोड़ का भुगतान नहीं हुआ है।
इससे निजी अस्पताल कैशलेस इलाज से हाथ खड़े करने लगे हैं। वे सीधे मरीजों को लौटा तो नहीं रहे हैं, लेकिन कैश से इलाज करने की बात कह रहे हैं। कुछ अस्पताल सरकार से पैसा मिलने के बाद लिए गए पैसे लौटाने की बात भी कर रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना में पिछले वित्तीय वर्ष का भुगतान नहीं किया गया है। डीकेएस में 2024-25 का 19 करोड़ व चालू वित्तीय वर्ष का 15 करोड़ समेत 34 करोड़ रुपए बाकी है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इससे वेंडर्स को भुगतान करने में कितनी परेशानी हो रही होगी।
आंबेडकर अस्पताल में मरीजों का बुरा हाल छिपा नहीं है। जुलाई से हार्ट की बायपास सर्जरी समेत वॉल्व रिप्लेसमेंट व वैस्कुलर सर्जरी ठप है। हिप-नी रिप्लेसमेंट एक साल बाद शुरू हो पाया है। कार्डियोलॉजी विभाग में भी वेंडर कभी भी जरूरी सामान सप्लाई करने से मना कर देता है। इससे हार्ट के मरीजों की एंजियोप्लास्टी अटक जाती है।
हाल में कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन रितेश अग्रवाल ने बैठक में वेंडर का भुगतान दो दिन के भीतर करने का आदेश अस्पताल प्रबंधन को दिया था। हालांकि एसएनए से फंड नहीं मिलने के कारण भुगतान में दिक्कत हो रही थी।
Ayushman Bharat Scheme: दिवाली के बाद आयुष्मान योजना के तहत किसी तरह का भुगतान नहीं होने से निजी अस्पतालों का भी बुरा हाल है। उनका कहना है कि वे डॉक्टर समेत नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ को वेतन कैसे दें। वेंडर को भुगतान करने में भी परेशानी हो रही है। प्रदेश सरकार आयुष्मान योजना में पिछले दो साल से करीब 2200 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। इतनी बड़ी राशि कैशलेस इलाज में खर्च हो रही है। हालांकि कुछ निजी अस्पताल इसका बेजा फायदा भी उठा रहे हैं।
प्रदेश को पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार से आयुष्मान भारत योजना (शहीद वीर नारायण ङ्क्षसह स्वास्थ्य सहायता योजना) के लिए 130 करोड़ मिले थे। राज्य सरकार ने 375 करोड़ रुपए जारी किए थे। इस तरह 505 करोड़ रुपए हुए थे। इस फंड को सरकारी-निजी अस्पतालों को भुगतान किया गया।
प्रदेश में प्रतिदिन 1700 के आसपास कैशलेस इलाज का क्लेम किया जा रहा है। यानी रोजाना 4 करोड़ रुपए का फ्री इलाज हो रहा है। 375 करोड़ रुपए जारी होने के बाद आईएमए ने भी सभी निजी अस्पतालों को योजना के तहत मरीजों का कैशलेस इलाज करने को कहा था। हालांकि रेट रिवाइज व समय पर भुगतान करने की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है।
Updated on:
18 Jan 2026 12:50 pm
Published on:
18 Jan 2026 12:49 pm
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