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CG News: छग की आबादी 3 करोड़ से ज्यादा, सरकारी प्राइवेट अस्पतालों में बेड महज 35 हजार, कैसे मिलेगा इलाज

CG News: प्रदेश के अस्पतालों में 35 हजार में केवल 9610 बेड सरकारी अस्पतालों में है। यह कुल बेड का 25 फीसदी है। यानी तीन चौथाई बेड निजी अस्पतालों में है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी अस्पतालों में किस तरह मरीजों का इलाज किया जा रहा है। प्र

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CG News: छग की आबादी 3 करोड़ से ज्यादा, सरकारी प्राइवेट अस्पतालों में बेड महज 35 हजार, कैसे मिलेगा इलाज

अस्पताल में भर्ती बच्चे

CG News: प्रदेश की 3 करोड़ से ज्यादा आबादी के इलाज के लिए सरकारी व निजी अस्पतालों में महज 35 हजार बेड हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में महज 1800 के आसपास डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति एक हजार आबादी पर एक डॉक्टर व तीन बेड होने चाहिए। इस हिसाब से प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी है। अस्पतालों में बेड भी अपर्याप्त है। यही कारण है कि कई बार आंबेडकर समेत दूसरे सरकारी अस्पतालों में एक बेड पर दो मरीजों का इलाज किया जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी।

प्रदेश के अस्पतालों में 35 हजार में केवल 9610 बेड सरकारी अस्पतालों में है। यह कुल बेड का 25 फीसदी है। यानी तीन चौथाई बेड निजी अस्पतालों में है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी अस्पतालों में किस तरह मरीजों का इलाज किया जा रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल में 700 बेड का सेटअप है, लेकिन 1300 से ज्यादा मरीजों को भर्ती किया जाता है। डॉक्टर, नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ 700 बेड के अनुसार है। इससे डॉक्टर समेत बाकी स्टाफ पर काफी वर्कलोड है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार 90 हजार बेड की जरूरत

डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रदेश में आबादी के हिसाब से 90 हजार बेड की जरूरत है। उपलब्ध बेड 38.88 फीसदी ही है, जो काफी कम है। 30 हजार के आसपास डॉक्टर होने चाहिए, जो महज 1800 है। यह जरूरत का महज 6 फीसदी है। नेहरू मेडिकल कॉलेज को छोड़कर अन्य 9 मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी नहीं है। यही स्थिति जिला अस्पतालों की है। दुर्ग, बिलासपुर व अंबिकापुर जिला अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं है। इससे मरीजों को रायपुर इलाज कराने के लिए आना पड़ रहा है। अस्पतालों में न जनरल फिजिशियन है और न गायनेकोलॉजिस्ट। यहां तक जनरल सर्जन व हड्डी रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है। यही कारण है कि ज्यादातर अस्पतालों में एमबीबीएस पास डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। क्रिटिकल केस ही नहीं सामान्य मरीजों को भी आंबेडकर अस्पताल रेफर किया जाता है।
10 मेडिकल कॉलेजों में 2660 में 1290 पद खाली

प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के 2660 में 1290 पद खाली है। इस साल 5 नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने की संभावना है। ऐसे में जब आधे पद खाली हैं तो नए कॉलेजों के लिए फैकल्टी कहां से आएंगे? इस साल कवर्धा, मनेंद्रगढ़, जांजगीर-चांपा, गीदम व जशपुर में 5 नए मेडिकल कॉलेज खुलने की संभावना है।

इन कॉलेजों में 100 से ज्यादा फैकल्टी की जरूरत होगी। फर्स्ट ईयर के हिसाब से एनाटॉमी, बायो केमेस्ट्री व फिजियोलॉजी के प्रोफेसरों के अलावा एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त करना होगा। हाल में केवल डीन की नियुक्ति की गई है। संबंधित जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पताल बनाया जाएगा। यहां मरीजों का इलाज किया जाएगा।
मेडिकल कॉलेजों में स्वीकृत व खाली पद

पद स्वीकृत खाली प्रतिशत

प्रोफेसर 241 117 48.5
एसो. प्रोफेसर 399 196 49.1
असि. प्रोफेसर 644 332 51.6

सीनियर रेसीडेंट 518 375 72.3
जूनियर रेसीडेंट 502 209 41.6
डेमोंस्ट्रेटर 302 51 16.9

हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद आंबेडकर समेत बाकी अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ा रहे हैं। दो साल में स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी विस्तार किया गया है। प्रदेश में 5 नए मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं। निश्चित ही इससे बेड की संख्या बढ़ेगी। 10 मेडिकल कॉलेजों का संचालन किया जा रहा है, जहां जरूरत के अनुसार सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। पीएससी से 125 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की जा रही है। इससे काफी हद तक मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर होगी।

श्यामबिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री
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