
CG News: देश के राष्ट्रीय संस्थान का तमगा लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को देखकर आम लोगों को जरूर लगता है कि यहां राष्ट्रीय स्तर की व्यवस्था और इलाज मिलता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। उपचार में ढिलाई और अव्यवस्थाओं से आम मरीज खासे परेशान रहते हैं, तो दूसरी ओर कई विभाग अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाए हैं। इलाज के अभाव में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ता है। हद तो तब हो गई जब एक फर्जी डॉक्टर और युवती कई दिनों से एम्स में घूम रहे थे।
इस दौरान दोनों ने कई मरीजों को इलाज के नाम पर भ्रमित भी किया। इसका खुलासा 4 फरवरी को हुआ। जब फर्जी डॉक्टर फ्लीबोटोमी एरिया में घूम रहा था। कुछ सुरक्षाकर्मियों ने संदेह के आधार पर उससे पूछताछ की। इसके बाद वह पकड़ा गया। बाद में युवती को भी पुलिस के हवाले किया गया। आमानाका पुलिस ने फर्जी डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज किया। बाद में उसे और युवती को थाने से ही छोड़ दिया गया। इससे पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। इसके पीछे बड़े रैकेट की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक ग्रामीण इलाके के मरीजों को दूसरे अस्पतालों और डाग्यनोसिस सेंटरों में जाने के लिए बरगलाया जाता है। दोनों का उसी रैकेट से लिंक होने की आशंका है।
मौके से भागने की कोशिश, सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ा
पुलिस के मुताबिक फ्लीबोटोमी एरिया में एक युवक डॉक्टरों जैसा एप्रन पहने हुए घूम रहा था। सुरक्षाकर्मियों ने उससे पूछताछ की, तो उसने खुद को एम्स में डॉक्टर दुर्जन सिंह गोयल बताया। उसके पहचान के लिए फ्लीबोटोमी स्टाफ विनय कुमार को बुलाया गया। विनय ने बताया कि दुर्जन सिंह वहां का स्टॉफ नहीं है। इसके बाद आरोपी ने स्वयं को रेडियो डायग्नोसिस विभाग में तकनीशियन बताया। इसके बाद वह मौके से भागने की कोशिश करने लगा। सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। फिर रेडियो डायग्नोसिस विभाग के एचओडी ने भी उसको पहचानने से इनकार कर दिया।
इससे खुलासा हुआ कि वह न एम्स का कर्मचारी था और न ही डॉक्टर था। वह एम्स का मोनो लगा एप्रान पहना हुआ था और उसकी जेब में एक आईडी कार्ड मिला, जिसमें उसका नाम दुर्जन सिंह गोयल और पद एसोसिएट प्रोफेसर रेडियो डायग्नोसिस लिखा था। उसके साथ एक अन्य युवती भी थी। वह भी एप्रान पहनी थी। एम्स प्रबंधन ने पूरे मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने दुर्जन सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
सुरक्षा में करोड़ों खर्च, मरीजों से भी चल रही वसूली
एम्स प्रबंधन सुरक्षा में करोड़ों रुपए का बजट देता है। इसके बाद भी यहां मरीजों और उनके परिजनों से पार्किंग के नाम पर वसूली कर रही है। एम्स परिसर में पार्किंग का ठेका दिया गया है। ठेके भी सुरक्षा गार्ड मुहैया कराने वाली एजेंसी को दिया गया है। यहां इलाज बाद में शुरू होता है, पहले पार्किंग शुल्क जमा करना पड़ता है। यह एकमात्र संस्थान हैं, जहां अस्पताल की रसीद कटवाने से पहले पार्किंग की रसीद कटवानी पड़ती है।
6-6 माह की वेटिंग कहीं इसलिए तो नहीं…
एम्स में सीटी स्कैन, एमआरआई और अन्य डायग्नोसिस जांच के लिए कई महीनों की वेटिंग बताई जाती है। एमआरआई के लिए तो 6-6 माह की वेटिंग दी जाती है। पकड़ा गया फर्जी डॉक्टर भी खुद को रेडिया डायग्नोसिस विभाग का एसोसिएट प्रोफेसर बताता था। आशंका है कि फर्जी डॉक्टर और युवती मरीजों को दूसरे अस्पताल में भेजने, पैसे लेकर जांच जल्दी करवाने आदि काम करवाता था।
एम्स प्रबंधन की अपील
एम्स रायपुर यह सूचित करता है कि पिछले दो दिनों के दौरान एम्स रायपुर के चिकित्सीय विशेषज्ञों का प्रतिरूपण करने वाले दो व्यक्तियों (एक पुरुष और एक महिला) को संस्थान परिसर से पकड़ा गया है। एम्स में रोज बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। इसका फायदा उठाकर कुछ लोग स्वयं को एम्स के चिकित्सक अथवा विशेषज्ञ बताकर आम जनता को भ्रमित करने व शोषण करने का प्रयास करते हैं। एम्स रायपुर इस प्रकार की गतिविधियों की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक व सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल ने आम जनता से अपील की है कि वे सतर्क रहें। एम्स रायपुर से संबद्ध बताने वाले किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान का सत्यापन अवश्य करें। आगे भी इस तरह की धोखाधड़ी या प्रतिरूपण में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इन घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा अधिकारी को परिसर में सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ व प्रभावी करने के निर्देश दिए गए हैं।
एम्स प्रबंधन की ओर से शिकायत मिलने के बाद आरोपी दुर्जन सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपी के साथ एक युवती भी थी। दोनों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है।
Published on:
06 Feb 2026 12:03 am
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